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जीवन में अधिक से अधिक शुभ कर्म करो : शास्त्री
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- भोलेश्वर महादेव मंदिर में चल रही कथा में श्रीराम से जुड़े प्रसंग भी सुनाए
माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। नई सड़क स्थित भोलेश्वर महादेव मंदिर में श्रीमद्भागवत महापुराण कथा के चौथे दिन कथा व्यास डॉ. राम प्रकाश शास्त्री ने कहा कि मृत्यु हमारे जीवन का इतिहास लिखती है। मनुष्य को ऐसा जीवन जीना चाहिए जिससे आने वाली पीढ़ियां गर्व महसूस करें। इसके लिए अधिक से अधिक शुभ कर्म करो। इससे अपने साथ ही हम औरों के कल्याण में भी सहयोगी होंगे। कथा में श्रीराम के जीवन से जुड़े प्रसंग भी सुनाए गए।
डॉ. शास्त्री ने कहा कि भागवत कथा का उद्देश्य मानव को शुभ कर्मों की प्रेरणा देना है। हमारे जीवन की पोथी का कोई भी पृष्ठ ऐसा नहीं होना चाहिए जिससे समाज या परिवार का सिर झुक जाए। हमारे कर्म प्रेरणा का स्रोत बनें। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार भगवान श्रीराम और श्रीकृष्ण के चरित्र का गुणगान किया जाता है। उसी प्रकार मनुष्य के कर्म भी इतिहास बन जाते हैं।
उन्होंने कहा कि व्यक्ति के पास चाहे कितनी भी धन-संपत्ति क्यों न हो, यदि उसके भीतर दान, परोपकार, सरलता, सहजता और संवेदनशीलता का अभाव है तो वह स्वयं एक बड़ा शून्य है। कथा के दौरान प्रभु श्रीराम की बाल लीलाएं, श्रीराम विवाह, वन गमन, सीता हरण, जटायु प्रसंग एवं रावण वध का भावपूर्ण वर्णन किया गया। इसके साथ ही भगवान श्रीकृष्ण जन्मोत्सव का भी चित्रण किया गया। कथा में अशोक गोयल नितिश, आलोक सिसोदिया, राधा, प्रीति, आभा गोयल सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे।
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माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। नई सड़क स्थित भोलेश्वर महादेव मंदिर में श्रीमद्भागवत महापुराण कथा के चौथे दिन कथा व्यास डॉ. राम प्रकाश शास्त्री ने कहा कि मृत्यु हमारे जीवन का इतिहास लिखती है। मनुष्य को ऐसा जीवन जीना चाहिए जिससे आने वाली पीढ़ियां गर्व महसूस करें। इसके लिए अधिक से अधिक शुभ कर्म करो। इससे अपने साथ ही हम औरों के कल्याण में भी सहयोगी होंगे। कथा में श्रीराम के जीवन से जुड़े प्रसंग भी सुनाए गए।
डॉ. शास्त्री ने कहा कि भागवत कथा का उद्देश्य मानव को शुभ कर्मों की प्रेरणा देना है। हमारे जीवन की पोथी का कोई भी पृष्ठ ऐसा नहीं होना चाहिए जिससे समाज या परिवार का सिर झुक जाए। हमारे कर्म प्रेरणा का स्रोत बनें। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार भगवान श्रीराम और श्रीकृष्ण के चरित्र का गुणगान किया जाता है। उसी प्रकार मनुष्य के कर्म भी इतिहास बन जाते हैं।
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उन्होंने कहा कि व्यक्ति के पास चाहे कितनी भी धन-संपत्ति क्यों न हो, यदि उसके भीतर दान, परोपकार, सरलता, सहजता और संवेदनशीलता का अभाव है तो वह स्वयं एक बड़ा शून्य है। कथा के दौरान प्रभु श्रीराम की बाल लीलाएं, श्रीराम विवाह, वन गमन, सीता हरण, जटायु प्रसंग एवं रावण वध का भावपूर्ण वर्णन किया गया। इसके साथ ही भगवान श्रीकृष्ण जन्मोत्सव का भी चित्रण किया गया। कथा में अशोक गोयल नितिश, आलोक सिसोदिया, राधा, प्रीति, आभा गोयल सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे।
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