मरीज लाचार: कैंसर के मरीजों की सिकाई, बच्चों की सर्जरी, हार्मोंस और स्त्री एवं प्रसूति रोग का नहीं इलाज
कय्यूम ऐसे अकेले नहीं हैं। पीएल शर्मा जिला अस्पताल में हर रोज करीब डेढ़ हजार मरीज ओपीडी में आते हैं। इन्हें लंबी कतारों में लगना पड़ता है। चिकित्सक जांच लिखते हैं तो पता चलता है कि यहां कई जांच और इलाज की सुविधाएं उपलब्ध ही नहीं है। नतीजतन, मायूस होकर लौटना पड़ता है और निजी अस्पताल का रुख करना पड़ता है। सुविधाओं का अभाव है और मरीज लाचार हैं।
जिला अस्पताल में इसके लिए बोर्ड भी लगाया गया है। इसमें उपलब्ध और बिना उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी दी गई है। यह हालात तब हैं जबकि केंद्र और प्रदेश सरकार स्वास्थ्य सुविधाओं पर खासा जोर दे रही हैं। इसके बावजूद इन चिकित्सीय सुविधाओं के न होने से मरीजों को खासी परेशानी हो रही है।
इन बीमारियों के विशेषज्ञ चिकित्सक और उपकरण नहीं
-मस्तिष्क से संबंधित न्यूरो सर्जरी
-कैंसर से संबंधित ऑन्कोलॉजी
-त्वचा से संबंधित प्लास्टिक सर्जरी
-गुर्दों से संबंधित नेफ्रोलॉजी
यह सुविधाएं उपलब्ध नहीं
-कैंसर से संबंधित रेडियोथैरेपी
-बच्चों की बीमारी से संबंधित पीडियाट्रिक्स सर्जरी
-हार्मोंस से संबंधित बीमारियां
-स्त्री एवं प्रसूति रोग
सुविधाएं बढ़ाने के लिए शासन से चल रहा पत्राचार
जो सुविधाएं उपलब्ध हैं और जो उपलब्ध नहीं हैं, उन सभी का बोर्ड अस्पताल में लगा है ताकि मरीजों को परेशानी न हो। बाकी सुविधाएं भी मुहैया कराने के प्रयास किए जा रहे हैं। शासन से पत्राचार चल रहा है। जो सुविधाएं यहां नहीं हैं, उनके लिए मरीजों को मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया जाता है। - डॉ. कौशलेंद्र सिंह, चिकित्सा अधीक्षक, जिला अस्पताल