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मरीज को बुलंदशहर से बुलाकर नहीं किया भर्ती
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अस्पताल के बाहर तड़पता रहा बुलंदशहर का मरीज
मेरठ। संतोष अस्पताल में शनिवार रात बुलंदशहर के एक मरीज को अस्पताल में भर्ती होने का वादा करने के बाद देर रात भर्ती करने से इनकार कर दिया गया। रातभर मरीज अस्पताल के बाहर इलाज के लिए तड़पता रहा। अंत में परिजनों को मजबूरन उसे बुलंदशहर ही ले जाना पड़ा।
बुलंदशहर निवासी गुलशन वर्मा गंभीर रूप से संक्रमित हैं और बुलंदशहर के मेरठ लाइफ लाइन अस्पताल में पिछले चार दिन से भर्ती थे। उन्हें ऑक्सीजन लगी थी। लगातार इलाज के बाद भी मरीज का ऑक्सीजन स्तर ठीक नहीं हुआ। यह देखकर तीमारदारों ने मेरठ में रिश्तेदारों के माध्यम से यहां संतोष अस्पताल में बात की। स्टाफ ने मरीज की पत्नी को आश्वासन दिया कि बुलंदशहर से मरीज को रात में ही मेरठ ले आइए, भर्ती कर लेंगे।
परिजनों ने किसी तरह मरीज को यहां तक लाए, लेकिन अस्पताल प्रबंधन ने भर्ती करने से इंकार कर दिया। मरीज रातभर अस्पताल के बाहर एंबुलेंस में तड़पता रहा। अस्पताल ने कभी बेड तो कभी ऑक्सीजन की कमी बताकर उसे भर्ती नहीं किया। फिर अन्य अस्पतालों में भी संपर्क किया, मगर कहीं बेड नहीं मिला। बाद में परिजन मजबूरी में मरीज को बुलंदशहर ले गए।
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मेरठ। संतोष अस्पताल में शनिवार रात बुलंदशहर के एक मरीज को अस्पताल में भर्ती होने का वादा करने के बाद देर रात भर्ती करने से इनकार कर दिया गया। रातभर मरीज अस्पताल के बाहर इलाज के लिए तड़पता रहा। अंत में परिजनों को मजबूरन उसे बुलंदशहर ही ले जाना पड़ा।
बुलंदशहर निवासी गुलशन वर्मा गंभीर रूप से संक्रमित हैं और बुलंदशहर के मेरठ लाइफ लाइन अस्पताल में पिछले चार दिन से भर्ती थे। उन्हें ऑक्सीजन लगी थी। लगातार इलाज के बाद भी मरीज का ऑक्सीजन स्तर ठीक नहीं हुआ। यह देखकर तीमारदारों ने मेरठ में रिश्तेदारों के माध्यम से यहां संतोष अस्पताल में बात की। स्टाफ ने मरीज की पत्नी को आश्वासन दिया कि बुलंदशहर से मरीज को रात में ही मेरठ ले आइए, भर्ती कर लेंगे।
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परिजनों ने किसी तरह मरीज को यहां तक लाए, लेकिन अस्पताल प्रबंधन ने भर्ती करने से इंकार कर दिया। मरीज रातभर अस्पताल के बाहर एंबुलेंस में तड़पता रहा। अस्पताल ने कभी बेड तो कभी ऑक्सीजन की कमी बताकर उसे भर्ती नहीं किया। फिर अन्य अस्पतालों में भी संपर्क किया, मगर कहीं बेड नहीं मिला। बाद में परिजन मजबूरी में मरीज को बुलंदशहर ले गए।
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