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छात्रा को पहले किया पास, बाद में दे दी फेल की मार्कशीट
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मेरठ। सीसीएसयू के कर्मचारियों ने बीएससी की एक छात्रा को पहले तो री-बैक में फार्म भरने की अनुमति दे दी। पास होने पर मार्कशीट भी जारी कर दी। बाद में रीबैक को अवैध बताकर उसे पास की जगह फेल की मार्कशीट दे दी। छात्रा के पिता कोर्ट जाने की बात कही है।
पल्ल्वपुरम निवासी सुरेंद्र कुमार मेडिकल कॉलेज में चीफ फार्मासिस्ट हैं। उनकी बेटी शिवानी ने सीसीएसयू से बीएससी फाइनल ईयर किया है। उन्होंने बताया कि बेटी द्वितीय वर्ष में केमेस्ट्री के कोड-207 में फेल हो गई थी। उसने इस कोड की बैक दी, लेकिन वह पास नहीं हुई। विवि के अधकारियों से अनुमति लेकर उसने री-बैक का फॉर्म भरकर परीक्षा दी तो वह पास हो गई। उसकी पास की मार्कशीट भी आ गई।
इसके बाद तृतीय वर्ष में भी छात्रा पास हो गई। जब वे उसकी मार्कशीट बनवाने गए तो विवि के कर्मचारियों ने कहा कि द्वितीय वर्ष की मार्कशीट जमा करने के बाद ही अंतिम वर्ष की मार्कशीट मिलेगी। द्वितीय वर्ष की मार्कशीट जमा करने के बाद जब वे मार्कशीट लेने गए तो कर्मचारियों ने द्वितीय वर्ष की फेल की मार्कशीट दे दी। कारण पूछे जाने पर बताया कि री-बैक देने का नियम विवि पहले ही खत्म कर चुका है, ऐसे में यह परीक्षा अवैध मानी जाएगी। ऐसे में उसकी तृतीय वर्ष की मार्कशीट रोक ली गई है। कैंपस पहुंचे सुरेंद्र कुमार ने बताया कि जब री-बैक का नियम नहीं था तो विवि ने उनसे फीस जमा कराकर परीक्षा क्यों दिलाई। पूरे मामले में उन्होंने कुलपति और रजिस्ट्रार से शिकायत की है। उनका कहना है कि मार्कशीट नहीं मिली तो वे कोर्ट जाएंगे।
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पल्ल्वपुरम निवासी सुरेंद्र कुमार मेडिकल कॉलेज में चीफ फार्मासिस्ट हैं। उनकी बेटी शिवानी ने सीसीएसयू से बीएससी फाइनल ईयर किया है। उन्होंने बताया कि बेटी द्वितीय वर्ष में केमेस्ट्री के कोड-207 में फेल हो गई थी। उसने इस कोड की बैक दी, लेकिन वह पास नहीं हुई। विवि के अधकारियों से अनुमति लेकर उसने री-बैक का फॉर्म भरकर परीक्षा दी तो वह पास हो गई। उसकी पास की मार्कशीट भी आ गई।
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इसके बाद तृतीय वर्ष में भी छात्रा पास हो गई। जब वे उसकी मार्कशीट बनवाने गए तो विवि के कर्मचारियों ने कहा कि द्वितीय वर्ष की मार्कशीट जमा करने के बाद ही अंतिम वर्ष की मार्कशीट मिलेगी। द्वितीय वर्ष की मार्कशीट जमा करने के बाद जब वे मार्कशीट लेने गए तो कर्मचारियों ने द्वितीय वर्ष की फेल की मार्कशीट दे दी। कारण पूछे जाने पर बताया कि री-बैक देने का नियम विवि पहले ही खत्म कर चुका है, ऐसे में यह परीक्षा अवैध मानी जाएगी। ऐसे में उसकी तृतीय वर्ष की मार्कशीट रोक ली गई है। कैंपस पहुंचे सुरेंद्र कुमार ने बताया कि जब री-बैक का नियम नहीं था तो विवि ने उनसे फीस जमा कराकर परीक्षा क्यों दिलाई। पूरे मामले में उन्होंने कुलपति और रजिस्ट्रार से शिकायत की है। उनका कहना है कि मार्कशीट नहीं मिली तो वे कोर्ट जाएंगे।
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