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Meerut News: दर्द निवारक दवाएं और ज्यादा नमक कर रहा गुर्दे खराब
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मेरठ। बिना चिकित्सीय परामर्श से ली गईं दर्द निवारक दवाएं और खानपान में नमक का ज्यादा इस्तेमाल गुर्दे खराब कर रहा है। शुगर और उच्च रक्तचाप के मरीजों को ज्यादा सावधान रहने की जरूरत है। इससे प्रभावित लोगों की संख्या लगातार बढ़ रही है। इससे बचने के लिए एहतियात सबसे जरूरी है। इस बीमारी के प्रति लोगों में जागरूकता फैलाने के लिए हर साल मार्च के दूसरे बृहस्पतिवार को वर्ल्ड किडनी डे (विश्व गुर्दा दिवस) मनाया जाता है।
गुर्दे के मरीज बढ़ते जा रहे हैं। जिला अस्पताल में हर साल करीब 10 हजार डायलिसिस होती हैं। गुर्दा रोग विशेषज्ञ डॉ. संदीप गर्ग ने बताया कि सामान्य तौर पर किडनी की बीमारी का पता देर से चलता है। दोनों किडनी जब 50 फीसदी खराब हो जाती हैं, तब खून में क्रिएटनिन बढ़ना शुरू होता है। रक्त में पाए जाने वाले वेस्ट को ही क्रिएटनिन कहते हैं। सामान्यत: किडनी इसे छानकर शरीर से बाहर निकाल देती है, लेकिन कई बार शरीर में स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं होने के बाद किडनी इसे बाहर नहीं कर पाती। इसी कारण रक्त में क्रिएटनिन बढ़ने लगता है।
गुर्दा रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रशांत बेंद्रे ने बताया कि शुगर और उच्च रक्तचाप किडनी के दुश्मन हैं। आजकल खाने पीने में पेस्टीसाइड का ज्यादा इस्तेमाल, फास्ट फूड आदि किडनी की सेहत खराब कर रहे हैं। फास्ट फूड में नमक का ज्यादा इस्तेमाल होता है। गुर्दा रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रदीप कुमार ने बताया कि पिछले 10 सालों में किडनी के मरीजों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है। पहले अगर ओपीडी में 100 मरीज आते थे, तो अब 125 मरीज आते हैं।
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गुर्दे की बीमारी के लक्षण
- पेशाब में खून आना
- पेशाब में जलन होना और बार-बार आना
- पैरों व आखों में सूजन आना
- शीघ्र थकान महसूस होना
- ब्लड प्रेशर अनियंत्रित होना
- पेशाब की मात्रा में कमी होना
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ऐसे बचा जा सकता है किडनी की बीमारी से
- नियमित व्यायाम करें।
- रोजाना तीन से चार लीटर पानी पीएं।
- धूम्रपान, शराब के सेवन और फास्ट फूड से बचें
- खाने में नमक की मात्रा कम रखें
- दर्द की गोलियों का अनावश्यक सेवन न करें
- ब्लड प्रेशर व शुगर की नियमित जांच कराएं
- 35 साल की उम्र के बाद समय-समय पर खून व पेशाब की जांच जरूर कराएं।
- सप्ताह में पांच बार 30-30 मिनट की एक्सरसाइज करें
- वजन चेक कराते रहें, बॉडी इंडेक्स मास (बीएमआई) 25 से ज्यादा न होने दें
- धूम्रपान से दूर रहें, पेन किलर का कम से कम प्रयोग करें
- प्रतिदिन पांच ग्राम से कम नमक का इस्तेमाल करें
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गुर्दे के मरीज बढ़ते जा रहे हैं। जिला अस्पताल में हर साल करीब 10 हजार डायलिसिस होती हैं। गुर्दा रोग विशेषज्ञ डॉ. संदीप गर्ग ने बताया कि सामान्य तौर पर किडनी की बीमारी का पता देर से चलता है। दोनों किडनी जब 50 फीसदी खराब हो जाती हैं, तब खून में क्रिएटनिन बढ़ना शुरू होता है। रक्त में पाए जाने वाले वेस्ट को ही क्रिएटनिन कहते हैं। सामान्यत: किडनी इसे छानकर शरीर से बाहर निकाल देती है, लेकिन कई बार शरीर में स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं होने के बाद किडनी इसे बाहर नहीं कर पाती। इसी कारण रक्त में क्रिएटनिन बढ़ने लगता है।
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गुर्दा रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रशांत बेंद्रे ने बताया कि शुगर और उच्च रक्तचाप किडनी के दुश्मन हैं। आजकल खाने पीने में पेस्टीसाइड का ज्यादा इस्तेमाल, फास्ट फूड आदि किडनी की सेहत खराब कर रहे हैं। फास्ट फूड में नमक का ज्यादा इस्तेमाल होता है। गुर्दा रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रदीप कुमार ने बताया कि पिछले 10 सालों में किडनी के मरीजों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है। पहले अगर ओपीडी में 100 मरीज आते थे, तो अब 125 मरीज आते हैं।
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गुर्दे की बीमारी के लक्षण
- पेशाब में खून आना
- पेशाब में जलन होना और बार-बार आना
- पैरों व आखों में सूजन आना
- शीघ्र थकान महसूस होना
- ब्लड प्रेशर अनियंत्रित होना
- पेशाब की मात्रा में कमी होना
ऐसे बचा जा सकता है किडनी की बीमारी से
- नियमित व्यायाम करें।
- रोजाना तीन से चार लीटर पानी पीएं।
- धूम्रपान, शराब के सेवन और फास्ट फूड से बचें
- खाने में नमक की मात्रा कम रखें
- दर्द की गोलियों का अनावश्यक सेवन न करें
- ब्लड प्रेशर व शुगर की नियमित जांच कराएं
- 35 साल की उम्र के बाद समय-समय पर खून व पेशाब की जांच जरूर कराएं।
- सप्ताह में पांच बार 30-30 मिनट की एक्सरसाइज करें
- वजन चेक कराते रहें, बॉडी इंडेक्स मास (बीएमआई) 25 से ज्यादा न होने दें
- धूम्रपान से दूर रहें, पेन किलर का कम से कम प्रयोग करें
- प्रतिदिन पांच ग्राम से कम नमक का इस्तेमाल करें