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अधर में लटका ऐतिहासिक मेला बूढ़ा बाबू का आयोजन
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सरधना। नगर में लगने वाले ऐतिहासिक मेला बूढ़ा बाबू के आयोजन को लेकर तैयारियां अधर में लटकी हैं। जबकि पालिका की बोर्ड बैठक में भी मेले के बजट प्रस्ताव पर मुहर नहीं लगी है। एसडीएम व पालिका प्रशासन मेले में होने वाले कार्यक्रम को प्रायोजक के द्वारा कराना चाहती है। लेकिन सभासदों इस आयोजन प्रक्रिया के विरोध में खड़े हैं। जबकि मेले का आयोजन 4 जून से प्रस्तावित था। विवाद के चलते मेले का आयोजन अधर में लटका है।
नगर में रामलीला मैदान में प्रति वर्ष ऐतिहासिक मेला बूढ़ा बाबू का आयोजन किया जाता है। मेले के आयोजन की जिम्मेदारी नगर पालिका प्रशासन की होती है। इस बार मेले के शुभारंभ के लिए 4 जून का दिन प्रस्तावित था। मेले के आयोजन के लिए एसडीएम ने तहसील सभागार में सभासद व प्रायोजकों के साथ बैठक बुलाई थी। जिसमें पालिका द्वारा कम बजट होने की बात कहकर मेले में होने वाले कार्यक्रमों को प्रायोजकों द्वारा कराने का प्रस्ताव दिया था। इसके कुछ दिन बाद ही पालिका में बोर्ड बैठक बुलाई गई थी।
बैठक में कार्यक्रम के आयोजन को लेकर मेले का बजट पास नहीं हो सका था। जबकि पालिका प्रशासन का कहना था कि मेला हर साल घाटे में जाता है। इसलिए मेले का बजट कम करना जरूरी है। इसी के साथ कार्यक्रमों के आयोजन के लिए प्रायोजकों की तलाश की जा रही है, जिसका सभासद विरोध कर रहे हैं। प्रायोजकों का विरोध होने पर मेले का आयोजन अधर में लटक गया है।
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चेयरपर्सन सबीला बेगम का कहना है कि मेले में होने वाले कार्यक्रमों के बजट को कम करने पर विचार किया गया था। हाल में औपचारिक बैठक की गई थी। जिसमें आगामी 12 जून से मेले का आयोजन करना प्रस्तावित है। इसकी जल्द तैयारी की जाएगी।
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नगर में रामलीला मैदान में प्रति वर्ष ऐतिहासिक मेला बूढ़ा बाबू का आयोजन किया जाता है। मेले के आयोजन की जिम्मेदारी नगर पालिका प्रशासन की होती है। इस बार मेले के शुभारंभ के लिए 4 जून का दिन प्रस्तावित था। मेले के आयोजन के लिए एसडीएम ने तहसील सभागार में सभासद व प्रायोजकों के साथ बैठक बुलाई थी। जिसमें पालिका द्वारा कम बजट होने की बात कहकर मेले में होने वाले कार्यक्रमों को प्रायोजकों द्वारा कराने का प्रस्ताव दिया था। इसके कुछ दिन बाद ही पालिका में बोर्ड बैठक बुलाई गई थी।
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बैठक में कार्यक्रम के आयोजन को लेकर मेले का बजट पास नहीं हो सका था। जबकि पालिका प्रशासन का कहना था कि मेला हर साल घाटे में जाता है। इसलिए मेले का बजट कम करना जरूरी है। इसी के साथ कार्यक्रमों के आयोजन के लिए प्रायोजकों की तलाश की जा रही है, जिसका सभासद विरोध कर रहे हैं। प्रायोजकों का विरोध होने पर मेले का आयोजन अधर में लटक गया है।
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चेयरपर्सन सबीला बेगम का कहना है कि मेले में होने वाले कार्यक्रमों के बजट को कम करने पर विचार किया गया था। हाल में औपचारिक बैठक की गई थी। जिसमें आगामी 12 जून से मेले का आयोजन करना प्रस्तावित है। इसकी जल्द तैयारी की जाएगी।