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कैदियों का भविष्य संवारेगी जैविक खेती, बंदी संभालेंगे कंपोस्टिंग प्लांट

Tue, 06 Nov 2018 11:57 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Updated Tue, 06 Nov 2018 11:57 AM IST
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organic farming will secure the Future of prisoners in meerut jail

मेरठ के चौधरी चरण सिंह जिला कारागार के बंदियों का भविष्य अब जैविक खेती से संवरेगा। जेल की कृषि भूमि पर जैविक खेती होगी। इसके लिए कंपोस्ट यूनिट लगाई जा रही है। सब ठीक रहा तो बंदी जल्द जैविक खाद से खेती करते दिखाई देंगे। खास बात यह है कि जिस जैविक खाद का प्रयोग कृषि में होगा वह भी बंदी खुद जेल के कूड़े से तैयार करेंगे।

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जिला कारागार में लगभग 50 एकड़ कृषि भूमि है। कभी इस भूमि पर बंदी केवल गेहूं की फसल तैयार करते थे। बाद में कृषि भूमि पर बंदी सब्जी उगाने लगे। इस सफलता के बाद कारागार मुख्यालय ने फसल की लागत का निर्धारण किया और यूपी एग्रो से खाद और कीटनाशक की सहायता मिलने लगी। तभी से जेल की कृषि भूमि पर बंदी रसायनिक खाद से खेती करते आ रहे हैं।
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देशभर में जैविक खेती को लेकर बढ़ रहे रुझान को देखते हुए अब जेल में भी जैविक खेती को बढ़ावा दिए जाने का निर्णय लिया गया है। केंद्र सरकार के स्वच्छता सर्वेक्षण को इसका आधार बनाया गया है। इसके माध्यम से जेल में कंपोस्टिंग प्लांट लगाया जाएगा।

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आलू का उत्पादन सबसे अधिक

चौधरी चरण सिंह जिला कारागार में प्रत्येक वर्ष करीब तीन हजार क्विंटल आलू का उत्पादन होता है। एक हजार क्विंटल आलू जेल में खप जाता है, जबकि चार क्विंटल आलू को बीज के रूप में सुरक्षित रखते हुए शेष आलू की सप्लाई सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, गाजियाबाद, देवबंद की जेलों के लिए की जाती है।

कंपोस्टिंग प्लांट संभालेंगे बंदी
जेल में बंदियों की संख्या लगभग 2500 है। बंदी की रुचि को देखते हुए जेल में उसे काम सौंपा जाता है। कंपोस्टिंग प्लांट लगने के बाद इन बंदियों को खाद तैयार करने की ट्रेनिंग मिलेगी। बाद में वही जेल के कूड़े से जैविक खाद तैयार करेंगे। जेल सूत्रों की मानें तो प्रतिदिन जेल से करीब 70 से 80 किलो कूड़ा निकलता है। ऐसे में जैविक खाद का यह प्रयोग सफल साबित हो सकता है।

कीटनाशक भी तैयार करने का प्रयास
जैविक खाद से तैयार होने वाली फसल लाभदायक होगी। कंपोस्टिंग प्लांट लगने के बाद जैविक खाद के अलावा फसलों पर छिड़का जाने वाला कीटनाशक भी यहीं तैयार करने का प्रयास होगा। इसका प्रभाव कैदियों की सेहत पर भी पड़ेगा। -डॉ. बीडी पांडेय, वरिष्ठ जेल अधीक्षक

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