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Meerut News: मेडिकल कॉलेज में 11.75 किलो का ट्यूमर निकाला, कैंसर मुक्त हुआ मरीज
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माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। मेडिकल कॉलेज मेरठ के शल्य चिकित्सा विभाग ने बड़ी उपलब्धि हासिल की है। विभाग ने 50 वर्षीय धीर सिंह के शरीर से 11.75 किलोग्राम का विशाल रेट्रोपेरिटोनियल सारकोमा (ट्यूमर) सफलतापूर्वक हटा दिया है। इस जटिल सर्जरी के बाद मरीज को कैंसर-मुक्त स्थिति में घर भेज दिया गया है।
यह जटिल शल्य प्रक्रिया डॉ. संजीव कुमार के नेतृत्व में सहायक आचार्य डॉ. शुभम यादव, सीनियर रेजिडेंट डॉक्टर आकांक्षा सिंह, डॉ. सिद्धार्थ, डॉ. नौशाद, डॉ. आयुष, डॉ. मीनाक्षी और संज्ञाहरण टीम के संयुक्त प्रयासों से सफल हुई। सर्जरी की मुख्य उपलब्धि ट्यूमर को 'एन ब्लॉक' विधि से पूरी तरह हटाना था। इस प्रक्रिया के दौरान ट्यूमर ने दाएं गुर्दे को घेर लिया था। इसे सावधानीपूर्वक संरक्षित किया गया ताकि रोगी के गुर्दे का कार्य बना रहे। टीम ने समय से ऑपरेशन, संज्ञाहरण, गहन चिकित्सा इकाई और ऑपरेशन-पश्चात प्रबंधन से सुरक्षित उपचार सुनिश्चित किया।
डॉ. संजीव कुमार ने बताया कि रेट्रोपेरिटोनियल सारकोमा एक दुर्लभ सॉफ्ट टिश्यू कैंसर है। यह पेट के गहरे हिस्से में उत्पन्न होता है। यह अक्सर बिना स्पष्ट लक्षणों के बढ़ता रहता है और बड़े होने पर पेट में सूजन या दर्द जैसे लक्षण दिखाता है। प्राचार्य आरसी गुप्ता ने सफल सर्जरी के लिए शल्य चिकित्सा विभाग को शुभकामनाएं दीं। निजी अस्पतालों में इस तरह की सर्जरी पर लगभग 2.5 लाख से 5.0 लाख रुपये का खर्च आता है, जबकि मेडिकल कॉलेज मेरठ में यह सरकारी दरों पर की गई।
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मेरठ। मेडिकल कॉलेज मेरठ के शल्य चिकित्सा विभाग ने बड़ी उपलब्धि हासिल की है। विभाग ने 50 वर्षीय धीर सिंह के शरीर से 11.75 किलोग्राम का विशाल रेट्रोपेरिटोनियल सारकोमा (ट्यूमर) सफलतापूर्वक हटा दिया है। इस जटिल सर्जरी के बाद मरीज को कैंसर-मुक्त स्थिति में घर भेज दिया गया है।
यह जटिल शल्य प्रक्रिया डॉ. संजीव कुमार के नेतृत्व में सहायक आचार्य डॉ. शुभम यादव, सीनियर रेजिडेंट डॉक्टर आकांक्षा सिंह, डॉ. सिद्धार्थ, डॉ. नौशाद, डॉ. आयुष, डॉ. मीनाक्षी और संज्ञाहरण टीम के संयुक्त प्रयासों से सफल हुई। सर्जरी की मुख्य उपलब्धि ट्यूमर को 'एन ब्लॉक' विधि से पूरी तरह हटाना था। इस प्रक्रिया के दौरान ट्यूमर ने दाएं गुर्दे को घेर लिया था। इसे सावधानीपूर्वक संरक्षित किया गया ताकि रोगी के गुर्दे का कार्य बना रहे। टीम ने समय से ऑपरेशन, संज्ञाहरण, गहन चिकित्सा इकाई और ऑपरेशन-पश्चात प्रबंधन से सुरक्षित उपचार सुनिश्चित किया।
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डॉ. संजीव कुमार ने बताया कि रेट्रोपेरिटोनियल सारकोमा एक दुर्लभ सॉफ्ट टिश्यू कैंसर है। यह पेट के गहरे हिस्से में उत्पन्न होता है। यह अक्सर बिना स्पष्ट लक्षणों के बढ़ता रहता है और बड़े होने पर पेट में सूजन या दर्द जैसे लक्षण दिखाता है। प्राचार्य आरसी गुप्ता ने सफल सर्जरी के लिए शल्य चिकित्सा विभाग को शुभकामनाएं दीं। निजी अस्पतालों में इस तरह की सर्जरी पर लगभग 2.5 लाख से 5.0 लाख रुपये का खर्च आता है, जबकि मेडिकल कॉलेज मेरठ में यह सरकारी दरों पर की गई।
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