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गरीबों के आवास से ‘अमीर’ हो गए अफसर, जानिए कैसे

Mon, 07 Aug 2017 12:44 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ मेरठ
अमर उजाला ब्यूरो/ मेरठ Updated Mon, 07 Aug 2017 12:44 PM IST
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Officers who got 'rich' from the poor
फाइल फोटो। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो

डूडा की आवासीय योजना बीएसयूपी के तहत गरीबों के लिए बनाए गए आवास में कार्यदायी संस्था उत्तर प्रदेश निर्माण निगम ने जमकर खेल किया। शासन ने योजना में खुले दिल से पैसा दिया तो विभागीय अधिकारियों ने भी ठेकेदारों से साठगांठ कर दोनों हाथों से पैसे बटोरे। मेरठ में बनाए गए 3087 आवासों में हर स्तर पर जमकर खेल हुआ। 

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ये थी सरकार की योजना 
गरीबों को आवास उपलब्ध कराने के लिए सपा सरकार ने बीएसयूपी योजना लागू की थी। जिसमें लाभार्थी के पास जमीन अपनी होनी चाहिए और उसके बाद आवास निर्माण सरकारी अनुदान से होना था। इस योजना को डूडा द्वारा संचालित किया गया और निर्माण का कार्य उत्तर प्रदेश राज्य निर्माण निगम को दिया गया। डूडा द्वारा लाभार्थी चयन कर सूची उत्तर प्रदेश राज्य निर्माण निगम को सौंपी गई, जिसके आधार पर निर्माण निगम ने अपने चयनित ठेकेदारों को क्षेत्रवार आवास निर्माण करने का काम सौंप दिया। इस योजना के तहत कुल 12 फेस में 3087 आवास बने। 
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बजट किया था संशोधित
इस आवास निर्माण में लाभार्थी को निश्चित माप के दो कमरे, एक शौचालय, स्नानघर, रसोई और बरामदा निर्माण के साथ छत के ऊपर पानी का टैंक, घर में पानी और बिजली की लाइन की फीटिंग के साथ गेट और खिड़कियों पर दरवाजे भी लगाकर देने थे। योजना के तहत एक आवास निर्माण को 1.93 लाख रुपये का बजट स्वीकृत हुआ था। लेकिन 2015-16 में आवास निर्माण में लागत बढ़ने से बजट संशोधित हुआ और तब इसका बजट बढ़ाकर प्रत्येक आवास 3.03 लाख रुपये कर दिया गया। राज्य निर्माण निगम द्वारा मेरठ से करीब 2587 आवासों के बजट संशोधन का प्रस्ताव भेजा जो स्वीकृत हो गया। 
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बढ़े बजट में हुई जमकर बंदरबांट
योजना के तहत कुल 3087 आवास तैयार होने थे, जिसमें 2015-16 तक आधे से ज्यादा आवास बन चुके थे, लेकिन बजट संशोधन में उन्हें भी शामिल कर दिया गया। इसके बाद जब बजट तो स्वीकृत होकर आया, लेकिन  ठेकेदार को पुरानी दर पर ही भुगतान किया गया। जिन ठेकेदारों ने नई दर पर भुगतान की मांग की, उनका भुगतान आज तक फंसा हुआ है। विभागीय ठेकेदारों की मानें तो आवास निर्माण की संशोधित दर में लगभग 28.50 करोड़ रुपये का घोटाला निर्माण निगम के अधिकारियों ने किया। 

अधूरे निर्माण का भी किया भुगतान 
गरीब आवास योजना में अधिकारियों और ठेकेदारों की साठगांठ इस कदर चली कि आवास निर्माण में मानक तो दूर किए ही नहीं गए, अधूरे निर्माण पर भी ठेकेदारों को पूरा भुगतान कर दिया गया। फतेहउल्लापुर में करीब 300 आवास बने, लेकिन इनमें अधिकांश आवास अधूरे रहे तो कई हवा में ही बन गए। लिसाड़ी, दायमपुर, डाबका, जाकिर कॉलोनी, अहमदनगर आदि में सबसे ज्यादा आवास बनना दर्शाया गया। 

लाभार्थी चयन में भी हुआ खेल 
योजना के तहत लाभार्थी चयन में भी जमकर खेल हुआ। जिन लोगों के पास जमीन नहीं थी, उन्होंने दस रुपये के स्टांप पेपर पर किसी से जमीन का अपने हक में विक्रय पत्र लिखवा लिया और डूडा अधिकारियों ने साठगांठ कर उसे लाभार्थी सूची में शामिल कर दिया। लेकिन मकान अमीरों के तैयार हो गये। कुछ ऐसे भी रहे, जिनके मकान सिर्फ कागजों में बने और सरकारी पैसे की आपस में ही बंदरबांट कर दी। 


साहब रखते हैं फोन बंद
उत्तर प्रदेश राज्य निर्माण निगम के प्रोजेक्ट मैनेजर सतीश उपाध्याय को उनका पक्ष जानने के लिए कई बार फोन किया गया। लेकिन मुख्यमंत्री के आदेशाें को दरकिनार करते हुए वह अवकाश में फोन बंद रखते हैं। इस मामले में विभागीय सूत्रों का कहना है कि शाम पांच बजे के बाद भी अक्सर उनका फोन बंद हो जाता है।

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