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NRHM में बाबुओं का करोड़ों का ‘योरसेल्फ’ गेम, ऐसे खुला राज

Thu, 16 Mar 2017 08:10 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ मेरठ
अमर उजाला ब्यूरो/ मेरठ Updated Thu, 16 Mar 2017 08:10 PM IST
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NRHM crores of crores' 'Yourself' game, such open full secrets
बाबुओं का करोड़ों का ‘योरसेल्फ’ गेम

राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन (एनआरएचएम) 2008-09 का रिकार्ड चौंकाने वाला है, जो केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की पहुंच से दूर रहा। क्योंकि उसमें बाबुओं ने योरसेल्फ (स्वयं) का खेल खुलकर खेला। सरकारी धन ठिकाने लगाने के लिए पहले आरसीएच मेला, सास-बहू सम्मेलन के नाम पर चुनिंदा बाबुओं की जेब से खर्च दिखाकर उनके नाम के  व्यक्तिगत चेक काटे गए। उसके बाद पैसा बचा तो कंपनियों के नाम पर सरकारी धन ठिकाने लगाया गया। रिकॉर्ड में 30 और 31 मार्च 2009 को दर्ज चेक संख्या और रकम से साफ हो जाता है कि काम हुए बिना ही खर्च दिखाकर चेक काटे गए। 

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यह हुआ योरसेल्फ का खेल 
30 मार्च 2009 को स्वास्थ्य विभाग ने एनआरएचएम के एसबीआई एकाउंट से 1770832 का भुगतान चेक के माध्यम से किया। इस तिथि को कुल नौ चेक के जरिये सारा भुगतान किया गया, जिसमें से सिर्फ एक चेक सीधे कंपनी के नाम पर काटा गया। जबकि बाकी आठ चेक काटते समय योरसेल्फ के साथ ही कंपनी का नाम भी दर्ज किया गया। इसी तरह से 31 मार्च 2009 को योरसेल्फ के दो चेक काटे गए जबकि इस तिथि को तीन चेक काटे गए। यह सब इसलिए किया गया ताकि बाबू ये चेक खुद भी भुना सकें। यह डाटा इस रजिस्टर में दर्ज 284 से लेकर 293 तक दर्ज है। 
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कंपनियों ने नहीं किया काम
यहां यह बात भी सामने आई कि कंपनी के नाम से पहले योरसेल्फ इसलिए लिखा गया क्योंकि उस वक्त तक कंपनियों ने काम ही नहीं किया था। लेकिन कंपनियों को पहले ही बता दिया गया था कि आपको चालू वित्त वर्ष की तिथि (30 मार्च 2009) से पहले के बिल देने होंगे, जिसका भुगतान बाद में कर दिया जाएगा। क्योंकि उसका भुगतान वित्तीय वर्ष 2008-09 में खर्च दिखाकर योरसेल्फ में ले लिया गया। 
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सवाल यह भी खड़ा
सवाल इसलिए भी खड़ा होता है, क्योंकि 30 मार्च से पहले कोई भुगतान योरसेल्फ के नाम पर नहीं लिया गया। इससे साफ है कि उस समय के डीलिंग बाबू ने एनआरएचएम की धनराशि को ठिकाने लगाने के लिए योरसेल्फ का फार्मूला अपनाया।

साइन तो बड़े अफसरों के 
हैरत की बात यह है कि उस वक्त के एसीएमओ और सीएमओ की सरपरस्ती में जमकर खेल हुआ। क्योंकि भुगतान के सामने दोनों अफसरों के हस्ताक्षर हैं। जिससे साफ हो जाता है कि योरसेल्फ भुगतान को उनकी पूरी स्वीकृति थी। 


हर स्तर पर पैसे की लूट 
‘अमर उजाला’ के हाथ लगा रिकॉर्ड बता रहा है कि सास-बहू मेला ही नहीं बल्कि लूट के लिए जहां पर भी मौका मिला वहां पर खेल बदस्तूर जारी रहा। दिलचस्प बात यह रही कि सीबीआई जांच के दौरान यह अहम रिकॉर्ड ही गायब कर दिया गया।

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