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अब शहरी क्षेत्र में भी होगी जन्मजात दोष से पीड़ित बच्चों की स्क्रीनिंग
Sun, 20 Apr 2025 12:13 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, मेरठ
संवाद न्यूज एजेंसी, मेरठ
Updated Sun, 20 Apr 2025 12:13 AM IST
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सहारनपुर। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) की टीम शहरी क्षेत्र में भी जन्मजात दोष से पीड़ित बच्चों की स्क्रीनिंग करेंगी। कार्यक्रम को गति देने के लिए टीम को सक्रिय किया है। अभी तक आरबीएसके की टीम ग्रामीण क्षेत्रों में स्क्रीनिंग करती थी।
राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम की टीमें आंगनबाड़ी, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, प्राथमिक विद्यालयों और मदरसों में जाकर बच्चों में 44 प्रकार की बीमारियों का परीक्षण करती हैं। बीमारी से ग्रसित पाए जाने पर बच्चे को रेफर कार्ड देकर इलाज के लिए जिला अस्पताल भेजा जाता है। अप्रैल 2024 से अब तक 3.84 लाख से अधिक बच्चों की जांच की गई हैं, जिनमें से करीब 10 हजार रेफर किए गए।
जिन बच्चों में दिल के छेद की बीमारी होती है। उनका निशुल्क ऑपरेशन कराया जाता है। अब आरबीएसके की टीम शहरी क्षेत्र में भी सक्रिय रहेगी। सरकारी स्कूल और आंगनबाड़ी केंद्रों पर बच्चों की स्क्रीनिंग करेंगी। जन्मजात दोष में कटे होंठ, तालू, क्लब फुट, दिल में छेद, सुनने, बोलने में दिक्कत, कुपोषित, रेटिनोपैथी, एनीमिया, डीफनेस, विटामिन ए की कमी, लेप्रोसी आदि शामिल हैं।
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राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम की टीमें आंगनबाड़ी, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, प्राथमिक विद्यालयों और मदरसों में जाकर बच्चों में 44 प्रकार की बीमारियों का परीक्षण करती हैं। बीमारी से ग्रसित पाए जाने पर बच्चे को रेफर कार्ड देकर इलाज के लिए जिला अस्पताल भेजा जाता है। अप्रैल 2024 से अब तक 3.84 लाख से अधिक बच्चों की जांच की गई हैं, जिनमें से करीब 10 हजार रेफर किए गए।
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जिन बच्चों में दिल के छेद की बीमारी होती है। उनका निशुल्क ऑपरेशन कराया जाता है। अब आरबीएसके की टीम शहरी क्षेत्र में भी सक्रिय रहेगी। सरकारी स्कूल और आंगनबाड़ी केंद्रों पर बच्चों की स्क्रीनिंग करेंगी। जन्मजात दोष में कटे होंठ, तालू, क्लब फुट, दिल में छेद, सुनने, बोलने में दिक्कत, कुपोषित, रेटिनोपैथी, एनीमिया, डीफनेस, विटामिन ए की कमी, लेप्रोसी आदि शामिल हैं।
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