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नवंबर से दिसंबर तक करें जौ की बुवाई, अधिक लाभ कमाने के लिए इन बातों का ध्यान रखें किसान

Tue, 26 Nov 2019 10:32 AM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Published by: Dimple Sirohi Updated Tue, 26 Nov 2019 10:32 AM IST
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November to December is the suitable time for sowing barley
Barley Farming - फोटो : अमर उजाला

जौ की खेती किसानों के लिए लाभप्रद है और इससे किसान अच्छा लाभ कमा सकते हैं। कृषि विवि के प्रोफेसर/रजिस्टार डा. बीआर सिंह के मुताबिक नवंबर से दिसंबर माह तक जौ की बुवाई की जाती है। इसके लिए किसानों को कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी हैं, ताकि वह अच्छा लाभ कमा सके।

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बुवाई की विधि
बीज हल के पीछे कूंडों में 23 सेमी की दूरी पर 5-6 सेमी गहराई में बुवाई करें। असिंचित दशा में बुआई 6-8 सेमी गहराई में करें, जिससे जमाव के लिए पर्याप्त नमी मिल सके। उर्वरकों का प्रयोग मृदा परीक्षण के आधार पर करना ही उचित है। असिंचित क्षेत्र में प्रति हेक्टेयर 40 किग्रा नाइट्रोजन, 20 किग्रा फास्फेट और 20 किग्रा पोटाश को बुवाई के समय कूंडों में बीज के नीचे डाले।
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सिंचित समय से बुवाई की दशा में प्रति हेक्टेयर 30 किग्रा नाइट्रोजन, 30 किग्रा फास्फेट व 20 किग्रा पोटाश बुवाई के समय कूंडों में बीज के नीचे डाले। बाद में 30 किलोग्राम नाइट्रोजन पहली सिंचाई पर टाप ड्रेसिंग करें। हल्की भूमि में 20-30 किग्रा/हेक्टेयर की दर से गंधक का प्रयोग करना चाहिए।

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अच्छी उपज के लिए 40 क्विंटल प्रति हेक्टेयर की दर से सड़ी हुई गोबर की खाद का प्रयोग करना चाहिए। माल्ट प्रजातियों के लिए  25 प्रतिशत अतिरिक्त नाइट्रोजन का प्रयोग करें। कटाई का कार्य सुबह या शाम के समय में करें। बालियों के पक जाने पर फसल को तुरंत काट लें और मड़ाई करके भंडार करें।

कीट की पहचान एवं रोकथाम
दीपम के नियंत्रण के लिए 2.5 लीटर क्लोरोपाइरीफास 20 ईसी/ हेक्टेयर की दर से सिंचाई जल के साथ प्रयोग करें।

November to December is the suitable time for sowing barley
कृषि विवि के प्रोफेसर/रजिस्टार डा. बीआर सिंह - फोटो : अमर उजाला

ऐसे करें सिंचाई
पहली सिंचाई कल्ले फूटते समय बुवाई के 30-35 दिनों बाद व दूसरी दुग्धावस्था में करें। यदि एक ही सिंचाई उपलब्ध हो तो कल्ले फूटते समय करें। माल्ट के लिए जौ की खेती में एक अतिरिक्त सिंचाई की आवश्यकता पड़ती है। ऊसर भूमि में तीन सिंचाई, पहली कल्ले निकलते समय, दूसरी गांठ बनते समय और तीसरी दाना पड़ते समय करें।

खरपतवार नियंत्रण
जौ की फसल में बथुआ, हिरनखुरी, प्याजी, कृष्णनील आादि चौड़ी पत्ती वाले खरपतवार की रोकथाम के लिए 2-4 डी सोडियम साल्ट 80 प्रतिशत डब्ल्यू.पी/ हेक्टेयर 625 ग्राम बुवाई के 25-30 दिन बाद छिड़काव करें। गेहूंसा एवं जंगली जई के लिए आइसोप्रोट्यूरान 75 प्रतिशत मात्रा एक किग्रा प्रति हेक्टेयर की दर से 500-600 लीटर पानी में घोलकर फ्लैट फैन नाजिल से छिड़काव करें।

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