फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Meerut News ›   No need to be afraid of the Dragon

ड्रैगन से डरने की जरूरत नहीं, गीदड़ भभकी देना उसका स्वभाव, जानिए दोनों की ताकत...

Mon, 21 Aug 2017 09:36 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, मेरठ, विपिन धनकड़
अमर उजाला ब्यूरो, मेरठ, विपिन धनकड़ Updated Mon, 21 Aug 2017 09:36 PM IST
सार

सेना के मिलिट्री इंटेलीजेंस के पूर्व महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल आरएन सिंह का कहना,  21वीं सदी में बदल चुके हैं हालात, जंग हुई तो अंतरराष्ट्रीय रुख भारत के पक्ष में होगा 

विज्ञापन
No need to be afraid of the Dragon
फाइल फोटो

विस्तार

ड्रैगन से डरने की जरूरत नहीं है। गीदड़ भभकी देना और दबंगई दिखाना उसका स्वभाव है। 21वीं सदी में भारत और चीन के बीच जंग न होने के कई कारण हैं। चीन अपने आर्थिक साम्राज्य को बढ़ाकर आसपास के देशों में नियंत्रण बढ़ा रहा है। सैनिक दम पर ऐसा करने के काफी नुकसान है। वर्तमान में सिक्किम के डोकालाम में जो हालात बने हैं, उसमें भूटान के साथ खड़े होकर भारत ने दो टूक संदेश दिया है। अंतरराष्ट्रीय दबाव पड़ने पर ही चीन अपने कदम पीछे खींचेगा। तब तक स्थिति में सुधार की संभावना नहीं है।

विज्ञापन


यह कहना है पूर्व महानिदेशक मिलिट्री इंटेलीजेंस (रिटायर लेफ्टिनेंट जनरल) आरएन सिंह का। वह मंगलवार को मेरठ कॉलेज के डिफेंस स्टडी विभाग में आए थे। सीसीएसयू में पीएचडी थीसिस जमा की। उन्होंने डॉ. संजय कुमार के निर्देशन में ‘इंडिया-चाइना रिलेशंस रिसेंट ट्रेंडस एंड आउटलुक फोर द फ्यूचर’ टॉपिक पर पीएचडी की है। अहम बात यह है कि सीमा पर चीन के खिलाफ पहली इंफेंट्री 56 इंफ्रेंट्री लेफ्टिनेंट जनरल आरएन सिंह के नेतृत्व में स्थापित की गई।

विज्ञापन

भारतीय सीमा पर खतरनाक हालात

No need to be afraid of the Dragon
आरएन सिंह

आरएन सिंह का मानना है कि दुनिया में इराक, अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बाद भारत की सीमा पर सबसे ज्यादा खतरनाक हालात हैं। डोकालाम में भारत का विरोध एकदम जायज है। रास्ता बनाकर चीन सिलिगुडी कॉरिडोर पर काबिज हो जाएगा। भारत के आठ राज्यों को जब चाहे, वह नियंत्रित कर सकेगा। चीन की रोजाना धमकी से माहौल बिगड़ा है। 

जंग की आशंका कम
आरएन सिंह के अनुसार चीन के 14 पड़ोसी देश हैं। इनमें से दो देश उसके वश में नहीं हैं। यह दोनों देश भारत और भूटान हैं। भारत ने भूटान की सीमा की सुरक्षा का जिम्मा लिया है तो उसे निभा रहा है। यह हमारे राष्ट्रीय हित से जुड़ा मामला है। चीन की ग्रोथ रेट गिरी है। युद्ध से वह और कम होगी।

ऊंचाई पर जीत के लिए चाहिए नौ गुना फौज 

No need to be afraid of the Dragon
फाइल फोटो

लेफ्टिनेंट आरएन सिंह ने कहा कि चीन के पास हमसे ज्यादा सेना है। भारत के पास 12 लाख और चीन के पास 23 लाख है। पहाड़ पर जंग जीतने के लिए नौ गुना सैनिक चाहिए। यहां स्थिति करीब दो गुना ही है। चीन से ज्यादातर सीमा पहाड़ी इलाके से जुड़ी है। भारत ने गलतियों से सबक लिया है।

एक साल में बनाए 200 बंकर 
2009 में चीन की सीमा पर 56 इंफ्रेंट्री स्थापित की गई। लेफ्टिनेंट आरएन सिंह ने बताया कि आजादी के बाद से 2009 तक चीन की सीमा पर केवल 199 बंकर थे। 56 इंफ्रेंट्री बनते ही एक साल के अंदर 200 नए बंकर तैयार किए गए। एक बंकर को बनाने में 63 टन मैटीरियल लगा। यह मैटीरियल जवान अपनी पीठ पर लादकर दुर्गम परिस्थिति में लेकर गए। एक बंकर में तीन जवान रहकर लड़ सकते हैं।

विज्ञापन

भारत-चीन की ताकत 

No need to be afraid of the Dragon
फाइल फोटो

- चीन के पास 3000 एयरक्राफ्ट हैं। इनमें लड़ाकू विमान और हेलीकॉप्टर आदि शामिल हैं
- भारत के पास 2100 एयरक्राफ्ट हैं। चीन की तुलना में यह कम हैं। लेकिन कैपेसिटी इनकी अधिक है। 
 
- चीन के पास 714 नेवी जहाज हैं। साउथ चाइना सी में चीन ने पूरी ताकत लगा रखी है। अटलांटिक और पेसिफिक सागर में भी वह अलर्ट रहता है।
- भारत के पास 295 नेवी जहाज हैं। चीन की तुलना में यह कम हैं। लेकिन उसकी समुद्र सीमा भी भारत से बढ़ी है।

- चीन के पास 270 न्यूक्लियर हथियार हैं। 
- भारत के पास 130 न्यूक्लियर हथियार हैं। आठ हजार किमी दूरी तक हमला कर सकते हैं। 

शहर से लेकर देश तक की ताजा खबरें व वीडियो देखने लिए हमारे इस फेसबुक पेज को लाइक करें

https://www.facebook.com/AuNewsMeerut/

सेना के मिलिट्री इंटेलीजेंस के पूर्व महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल आरएन सिंह का कहना,  21वीं सदी में बदल चुके हैं हालात, जंग हुई तो अंतरराष्ट्रीय रुख भारत के पक्ष में होगा 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed