हॉरर फिल्म का सेट नहीं, ये है ड्रग वेयरहाउस, यहां दिन में भी लगता है डर
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मेरठ में स्वास्थ्य विभाग का ड्रग वेयरहाउस (दवा गोदाम) खंडहर हो गया है। ऐसा लगता है जैसे किसी हॉरर फिल्म की शूटिंग के लिए कोई सेट तैयार किया गया हो। रात की छोड़ें, यहां तो दिन में जाने से भी डर लगता है। प्रदेश सरकार ने इसे छह जिलों की दवाओं के रखरखाव के लिए बनाया था। लेकिन सुध नहीं ली गई। नतीजा यह कि यह इमारत अब बदहाल हो चुकी है।
यह बिल्डिंग मेरठ-दिल्ली रोड से करीब एक किलोमीटर अंदर राजकीय कुष्ठ आश्रम के सामने है, जो करीब एक बीघा में है। इसमें एक बड़े गोदाम के अलावा दवा काउंटर, चौकीदार रूम और एक ऑफिस बना है। इन पर लगे ताले जंग खा चुके हैं। ऊंची-ऊंची झाड़ियों से सब घिरा हुआ है। लाखों रुपये खर्च कर यूपी सरकार ने वर्ष 2001-02 में इसे तैयार कराया था।
होना तो यह था यहां
इस भवन में अपर निदेशक कार्यालय के अंतर्गत आने वाली स्वास्थ्य विभाग की दवाओं का रखरखाव किया जाना था। फिर यहां से इन्हें मेरठ के अलावा गौतमबुद्ध नगर (नोएडा), गाजियाबाद, बुलंदशहर, हापुड़ और बागपत के स्वास्थ्य केंद्रों के लिए सप्लाई किया जाना था। शुरू में कई साल तो यह चला। लेकिन अब भवन लंबे समय से बंद पड़ा है। इसके बारे में अपर निदेशक कार्यालय के अधिकारियों और कर्मचारियों को भी ज्यादा जानकारी नहीं है। उनका कहना है कि यह भवन शासन ने बनवाया था। यह फिलहाल बंद है।
जीर्णोद्धार हो तो आ सकता है काम
अगर इस भवन का जीर्णोद्धार हो जाए तो यह दवा के रखरखाव के काम आ सकता है। फिलहाल मेडिकल कॉलेज परिसर में बने अपर निदेशक स्वास्थ्य के कार्यालय में दवाएं आती हैं और वहीं से इन्हें मेरठ समेत बाकी जिलों को सप्लाई किया जाता है। दूसरी तरफ सवाल यह भी उठता है कि अगर सिर्फ सड़क बनाया जाना ही मसला है तो जब इस बिल्डिंग को बनाया जा रहा था, तब जिम्मेदारों ने इस ओर ध्यान क्यों नहीं दिया।
यह अकेली ऐसी बिल्डिंग नहीं
मेडिकल कॉलेज में 50 वार्डों की प्राइवेट रूम की बिल्डिंग 27 वर्षों से बंद है। अब इसकी सुध ली गई है और इसके 20 वार्ड शुरू कराए जा रहे हैं। बाकी के 30 वार्ड बाद में शुरू कराए जाएंगे। इसी तरह जिला अस्पताल में बने 10 प्राइवेट वार्डों की बिल्डिंग खंडहर होने के कगार पर है। लेकिन इसकी सुध लेने वाला कोई नहीं है।
सड़क बने तो बात बने
इस ड्रग वेयरहाउस को मुख्य मार्ग से कनेक्ट करने वाली सड़क की हालत बहुत खराब है, जिसे इस वेयर हाउस के बंद होने का प्रमुख कारण माना जाता है। इस सड़क को बनवाने के लिए करीब चार लाख रुपये की डिमांड शासन को भेजी गई थी। लेकिन इसे मंजूरी नहीं मिली। इसके लिए कई बार रिमाइंडर भी भेजे जा चुके हैं। सड़क बनाए जाने के बाद ही इसे फिर से शुरू कराया जा सकता है। क्योंकि बिना सड़क बने यहां दवाओं के ट्रक आने-जाने में दिक्कत होगी। -मंजू शर्मा, अपर निदेशक स्वास्थ्य
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