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भ्रष्टाचार के आरोपी पर नहीं हुई कार्रवाई
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भ्रष्टाचार के आरोपी कंप्यूटर ऑपरेटर पर नहीं दर्ज हुआ केस
मेरठ। निरस्त यूनिट का राशन बांटने के मामले में आरोपी कंप्यूटर ऑपरेटर के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के लिए आपूर्ति विभाग को मशक्कत करनी पड़ रही है। करीब एक महीने पहले सिविल लाइन थाने को तहरीर दी गई थी जिस पर अभी तक केस दर्ज नहीं हुआ है।
जनपद में मई, 2018 से जुलाई, 2018 तक कुछ राशन डीलरों ने राशनकार्डों की यूनिट निरस्त होने के बाद भी उन यूनिटों का राशन बाजार में बेच दिया था। मामले की जांच खाद्य एवं रसद विभाग को सौंपी गई, जिसमें करीब 63 राशन डीलर आरोपी साबित हुए। यही नहीं विभाग के कुछ कर्मचारियों की संलिप्तता भी मिली। इन्हीं में कंप्यूटर ऑपरेटर शाहनवाज भी शामिल था। करीब एक महीने पूर्व जिला पूर्ति विभाग ने शाहनवाज के विरुद्ध सिविल लाइन थाने में तहरीर दी। जबकि विभाग के अन्य कर्मचारियों तत्कालीन पूर्ति निरीक्षकों के खिलाफ विभागीय जांच बैठा दी गई। 8 तारीख में डीएसओ को विधानसभा की एक कमेटी के समक्ष जवाब देना है लेकिन अभी तक भी शाहनवाज के विरुद्ध रिपोर्ट दर्ज न होने से अफसर परेशान हैं। डीएसओ नीरज सिंह का कहना है कि पुलिस अफसरों से बात की गई है, जिन्होंने जल्द रिपोर्ट दर्ज करने का भरोसा दिलाया है। वहीं, इंस्पेक्टर सिविल लाइन ने बताया कि ऐसे मामलों में अफसरों के अनुमोदन के बाद ही रिपोर्ट दर्ज करने का प्रावधान है।
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मेरठ। निरस्त यूनिट का राशन बांटने के मामले में आरोपी कंप्यूटर ऑपरेटर के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के लिए आपूर्ति विभाग को मशक्कत करनी पड़ रही है। करीब एक महीने पहले सिविल लाइन थाने को तहरीर दी गई थी जिस पर अभी तक केस दर्ज नहीं हुआ है।
जनपद में मई, 2018 से जुलाई, 2018 तक कुछ राशन डीलरों ने राशनकार्डों की यूनिट निरस्त होने के बाद भी उन यूनिटों का राशन बाजार में बेच दिया था। मामले की जांच खाद्य एवं रसद विभाग को सौंपी गई, जिसमें करीब 63 राशन डीलर आरोपी साबित हुए। यही नहीं विभाग के कुछ कर्मचारियों की संलिप्तता भी मिली। इन्हीं में कंप्यूटर ऑपरेटर शाहनवाज भी शामिल था। करीब एक महीने पूर्व जिला पूर्ति विभाग ने शाहनवाज के विरुद्ध सिविल लाइन थाने में तहरीर दी। जबकि विभाग के अन्य कर्मचारियों तत्कालीन पूर्ति निरीक्षकों के खिलाफ विभागीय जांच बैठा दी गई। 8 तारीख में डीएसओ को विधानसभा की एक कमेटी के समक्ष जवाब देना है लेकिन अभी तक भी शाहनवाज के विरुद्ध रिपोर्ट दर्ज न होने से अफसर परेशान हैं। डीएसओ नीरज सिंह का कहना है कि पुलिस अफसरों से बात की गई है, जिन्होंने जल्द रिपोर्ट दर्ज करने का भरोसा दिलाया है। वहीं, इंस्पेक्टर सिविल लाइन ने बताया कि ऐसे मामलों में अफसरों के अनुमोदन के बाद ही रिपोर्ट दर्ज करने का प्रावधान है।
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