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Meerut News: नगर निकाय चुनाव महापौर सीट आरक्षण
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नगर निकाय चुनाव महापौर सीट आरक्षण
सपा में टिकट को लेकर होगी खींचतान, अतुल प्रधान और रफीक अंसारी करेंगे जोर आजमाइश
दोनों ने अपनी अपनी पत्नी के लिए किया हुआ है आवेदन, पूर्व विधायक योगेश वर्मा को लगा झटका
टिकट की रेस में और भी कई सपाई, खींचतान के आसार
मेरठ। मेयर के टिकट के लिए आरक्षण जारी होने के बाद मौजूदा महापौर सुनीता वर्मा और उनके पति पूर्व विधायक योगेश वर्मा को झटका लगा है। वह फिर से नगर निगम चुनाव के मैदान में उतरने की तैयारी कर रहे थे। अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए यह सीट आरक्षित होने के बाद अब सरधना से विधायक अतुल प्रधान और शहर विधायक रफीक अंसारी के बीच टिकट को लेकर जोर आजमाइश हो सकती है। अतुल प्रधान अपनी पत्नी पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष सीमा प्रधान को चुनाव लड़ाना चाहते हैं और रफीक अंसारी अपनी पत्नी खुर्शीदा को। दोनों ने इसके लिए आवेदन भी किए हुए हैं। इनके अलावा सपा से गूमी गांव के कर्मवीर गूमी हैं, जिन्होंने आवेदन किया हुआ है। इसके अलावा सपा नेता जितेंद्र गुर्जर और जिला पंचायत सदस्य सम्राट मलिक अपनी माता के लिए भी ताल ठोक रहे हैं।
इस बार निगम चुनाव में समाजवादी पार्टी की कठिन परीक्षा होगी। अभी तक सपा अपने बूते पर मेयर का चुनाव नहीं जीत सकी है। सुनीता वर्मा भी जब चुनाव जीती थीं तो वह बसपा में थीं। इसके बाद सपा में शामिल हुई थीं। साल 2006 में महापौर पद पर सपा समर्थित लीलावती की जमानत जब्त हुई थी और 10 पार्षद बने थे। नगर पंचायत लावड़ पर जीत हुई थी।
पर जीत हुई थी। साल 2012 में सपा समर्थित महापौर प्रत्याशी रफीक अंसारी हारे थे और चार पार्षद जीते थे। साल 2017 में महापौर प्रत्याशी दीपू मनोठिया हारीं और चार पार्षद जीते थे। नगर पालिका सरधना पर जीत हुई थी।
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सपा के निवर्तमान जिलाध्यक्ष राजपाल सिंह का कहना है कि सारी प्रक्रिया पहले ही पूरी हो गई थी। अब आरक्षण तय हो गया है। सपा हाईकमान टिकट तय करेगी। जल्द टिकट तय हो जाएगा।
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एससी होनी चाहिए थी सीट: योगेश वर्मा
पूर्व विधायक योगेश वर्मा का कहना है कि आरक्षण नियमानुसार नहीं हुआ है। सीट एससी या फिर सामान्य होनी चाहिए थी। सपाई हैं, जो भी लड़ेगा जसे जिताएंगे।
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टिकट की रेस में हैं, मजबूती से लड़ेंगे
विधायक अतुल प्रधान का कहना है कि टिकट की रेस में हैं। अगर पार्टी टिकट देती है तो सीमा प्रधान मजबूती से चुनाव लड़ेंगी और जीतेंगी।
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दावेदार हैं, टिकट मिला तो जीतेंगे
विधायक रफीक अंसारी का कहना है कि महापौर सीट पर चुनाव लड़ने के दावेदार हैं। पार्टी ने टिकट दिया तो चुनाव लड़ेंगे और जीतेंगे।
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रालोद के खाते में गई सीट तो धरी रह जाएंगी सपाइयों की तैयारियां
नगर निकाय चुनाव समाजवादी पार्टी और रालोद मिलकर लड़ने की तैयारी कर रहे हैं। ऐसे में मेरठ की महापौर सीट अगर रालोद के खाते में चली गई तो दावेदारी ठोक रहे सपाई हाथ मलते रह जाएंगे। ऐसा अंदेशा भी जताया जा रहा है कि है सीट रालोद के खाते में जा सकती है। सपाइयों की आपसी खींचतान भी इसकी वजह बन सकती है।
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सपा में टिकट को लेकर होगी खींचतान, अतुल प्रधान और रफीक अंसारी करेंगे जोर आजमाइश
दोनों ने अपनी अपनी पत्नी के लिए किया हुआ है आवेदन, पूर्व विधायक योगेश वर्मा को लगा झटका
टिकट की रेस में और भी कई सपाई, खींचतान के आसार
मेरठ। मेयर के टिकट के लिए आरक्षण जारी होने के बाद मौजूदा महापौर सुनीता वर्मा और उनके पति पूर्व विधायक योगेश वर्मा को झटका लगा है। वह फिर से नगर निगम चुनाव के मैदान में उतरने की तैयारी कर रहे थे। अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए यह सीट आरक्षित होने के बाद अब सरधना से विधायक अतुल प्रधान और शहर विधायक रफीक अंसारी के बीच टिकट को लेकर जोर आजमाइश हो सकती है। अतुल प्रधान अपनी पत्नी पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष सीमा प्रधान को चुनाव लड़ाना चाहते हैं और रफीक अंसारी अपनी पत्नी खुर्शीदा को। दोनों ने इसके लिए आवेदन भी किए हुए हैं। इनके अलावा सपा से गूमी गांव के कर्मवीर गूमी हैं, जिन्होंने आवेदन किया हुआ है। इसके अलावा सपा नेता जितेंद्र गुर्जर और जिला पंचायत सदस्य सम्राट मलिक अपनी माता के लिए भी ताल ठोक रहे हैं।
इस बार निगम चुनाव में समाजवादी पार्टी की कठिन परीक्षा होगी। अभी तक सपा अपने बूते पर मेयर का चुनाव नहीं जीत सकी है। सुनीता वर्मा भी जब चुनाव जीती थीं तो वह बसपा में थीं। इसके बाद सपा में शामिल हुई थीं। साल 2006 में महापौर पद पर सपा समर्थित लीलावती की जमानत जब्त हुई थी और 10 पार्षद बने थे। नगर पंचायत लावड़ पर जीत हुई थी।
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पर जीत हुई थी। साल 2012 में सपा समर्थित महापौर प्रत्याशी रफीक अंसारी हारे थे और चार पार्षद जीते थे। साल 2017 में महापौर प्रत्याशी दीपू मनोठिया हारीं और चार पार्षद जीते थे। नगर पालिका सरधना पर जीत हुई थी।
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सपा के निवर्तमान जिलाध्यक्ष राजपाल सिंह का कहना है कि सारी प्रक्रिया पहले ही पूरी हो गई थी। अब आरक्षण तय हो गया है। सपा हाईकमान टिकट तय करेगी। जल्द टिकट तय हो जाएगा।
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एससी होनी चाहिए थी सीट: योगेश वर्मा
पूर्व विधायक योगेश वर्मा का कहना है कि आरक्षण नियमानुसार नहीं हुआ है। सीट एससी या फिर सामान्य होनी चाहिए थी। सपाई हैं, जो भी लड़ेगा जसे जिताएंगे।
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टिकट की रेस में हैं, मजबूती से लड़ेंगे
विधायक अतुल प्रधान का कहना है कि टिकट की रेस में हैं। अगर पार्टी टिकट देती है तो सीमा प्रधान मजबूती से चुनाव लड़ेंगी और जीतेंगी।
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दावेदार हैं, टिकट मिला तो जीतेंगे
विधायक रफीक अंसारी का कहना है कि महापौर सीट पर चुनाव लड़ने के दावेदार हैं। पार्टी ने टिकट दिया तो चुनाव लड़ेंगे और जीतेंगे।
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रालोद के खाते में गई सीट तो धरी रह जाएंगी सपाइयों की तैयारियां
नगर निकाय चुनाव समाजवादी पार्टी और रालोद मिलकर लड़ने की तैयारी कर रहे हैं। ऐसे में मेरठ की महापौर सीट अगर रालोद के खाते में चली गई तो दावेदारी ठोक रहे सपाई हाथ मलते रह जाएंगे। ऐसा अंदेशा भी जताया जा रहा है कि है सीट रालोद के खाते में जा सकती है। सपाइयों की आपसी खींचतान भी इसकी वजह बन सकती है।