मुजफ्फरनगर: बैनामा नीरा के नाम, खतौनी में चढ़ा दिया मीरा का नाम, 53 साल बाद फिर उलझा मामला
इसकी शिकायत होने पर एक एसडीएम ने रिकाॅर्ड दुरुस्त किया। अब दूसरे पक्ष की शिकायत पर मौजूदा एसडीएम ने सुनवाई शुरू कर दी। 53 साल बाद यह मामला फिर से उलझ गया है। इसकी शिकायत होने पर डीएम ने रिकाॅर्ड तलब किया है।
तहसील सदर के गांव निराना में 16 अगस्त 1965 को कंबल वाला बाग की नीरास्वरूप ने रतीराम एवं पलटू से जमीन का बैनामा कराया था। इस 1.5470 हेक्टेयर जमीन के बैनामे का अमल दरामद 28 मार्च 1966 को हो गया। राजस्व अभिलेखों में भी जमीन नीरा के नाम दर्ज कर दिया गया। खतौनी कंप्यूटरीकृत हुई तो इसमें खेल हो गया। नीरा के जगह मीरा का नाम अंकित कर दिया गया।
मामला सामने आया तो पीड़ित ने छह सितंबर 2019 को उपजिलाधिकारी सदर के यहां प्रार्थनापत्र दिया कि खाता संख्या 279 एवं 342 पर मीरा के स्थान पर नीरा पुत्री गोपाल राज स्वरूप किया जाए। उपजिलाधिकारी सदर ने तहसीलदार को इस मामले की जांच सौंपी। जांच में पाया गया कि जमीन का बैनामा नीरा के नाम है।
इस बीच मृतक मीरा के पुत्र विवेक गुप्ता और अमित गुप्ता ने चार मार्च 2020 को एसडीएम सदर के यहां एक प्रार्थनापत्र दिया कि उनका पक्ष नहीं सुना गया। एसडीएम सदर दीपक कुमार ने तत्कालीन एसडीएम विजय कुमार के आदेश को निरस्त कर दिया। सुनवाई के लिए 11 दिसंबर की तिथि लगा दी है।
इस प्रकरण को लेकर नीरा स्वरूप के भाई कंबलवाला बाग के प्रभात कुमार स्वरूप ने डीएम को प्रार्थना पत्र दिया है। इस प्रार्थना पत्र के साथ बैनामे की कॉपी, तहसीलदार की जांच रिपोर्ट, दोनों एसडीएम के आदेश की प्रति लगाई गई है।
प्रभात का कहना है कि नीरा और मीरा दोनों उनकी बहन है, लेकिन बैनामा नीरा के ही नाम है। मीरा के बेटे अफसरों से मिलकर इस प्रकरण में भ्रम पैदा कर रहे हैं। सब कुछ स्पष्ट है बैनामा केवल नीरा के ही नाम है।
एसडीएम बन चुके हैं तहसीलदार
जमीन के मामले में ही जिले की बुढ़ाना तहसील के एसडीएम कुमार भूपेंद्र के खिलाफ मवाना तहसील के मामले में सीएम योगी आदित्यनाथ कार्रवाई कर चुके हैं, उन्हें तहसीलदार पद पर पदानवत कर दिया गया है।
-मेरे सामने एक पक्ष ने शिकायत की थी कि उन्हें सुना नहीं गया। इसलिए मैने इससे पहले हुए एसडीएम के आदेश को निरस्त कर दिया है। अब इस मामले में फिर से सुनवाई होगी।
- दीपक कुमार, एसडीएम सदर
तहसीलदार ने जांच की है और बैनामे के आधार पर एसडीएम ने दुरुस्तीकरण किया है, तो सही प्रक्रिया है। ऐसे में एसडीएम के अपने समकक्ष का आदेश निरस्त करने के मामले की जांच कराई जाएगी। इस पूरे मामले की फाइल तलब की जा रही है, जो भी दोषी होगा उस पर कार्रवाई होगी। - सेल्वा कुमारी जे, डीएम