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शोध पत्र लेखन में नैतिकता की जरूरत : डॉ. अनिरुद्ध
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सुभारती में शोध लेखन पर हुई कार्यशाला
मेरठ। सुभारती विवि के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग में शोध पत्र लेखन विषय पर कार्यशाला का आयोजन किया गया। इसमें विश्वविद्यालय के प्रकाशन प्रकोष्ठ प्रभारी डॉ. अनिरुद्ध श्रीवास्तव विषय विशेषज्ञ के में उपस्थित रहे। उन्होंने शोध पत्र लेखन में नैतिकता को जरूरी बताया।
कार्यक्रम में प्रो. सुधीर त्यागी ने कहा कि प्रधानमंत्री का विज़न देश को 2047 तक विकसित एवं समृद्ध भारत बनाने का है। ऐसे में शिक्षा के क्षेत्र से जुड़े हुए लोगों एवं युवाओं का कर्तव्य बनता है कि हम नवीन एवं सार्थक खोजों से इस विजन को साकार करने में योगदान दें। उन्होंने कहा कि आज के युवाओं को शोध की ओर अधिक ध्यान देना होगा। उन्होंने आयोजन के लिए विभागाध्यक्ष डॉ. प्रीति सिंह एवं उनकी टीम को सराहा।
विषय विशेषज्ञ डॉ. अनिरुद्ध श्रीवास्तव ने कहा कि शोधार्थियों द्वारा शीघ्रता से शोध पत्र पूरा करने के फेर में कई बार कुछ कमियां रह जाती हैं। इससे उनका शोध पत्र उच्चस्तर के जर्नल्स में प्रकाशन से वंचित रह जाता है। उन्होंने कहा कि आज के समय में शोध-पत्रों में मौलिकता व नैतिकता की कमी है। शोधपत्र लेखन के विभिन्न आयामों पर डॉ. श्रीवास्तव ने सभी के प्रश्नों का उत्तर दिया।
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उन्होंने कहा कि युवाओं को पाठ्यक्रम के प्रथम वर्ष से ही शोध से संबंधित जानकारी दी जाए ताकि वे अपनी स्नातक शिक्षा पूरी करने के साथ उच्च स्तरीय शोध पत्रों को प्रकाशित करा सकें। विभागाध्यक्ष डॉ. प्रीति सिंह ने कहा कि इस से युवाओं को काफी लाभ होगा। इस दौरान सहायक आचार्य शैली शर्मा, तरुण जैन और अन्य विभागों से डॉ. राज रानी, डॉ. अमृता चौधरी, डॉ. सीमा मलिक, डॉ. कुसुम, डॉ. रुबी, डॉ. लवली, डॉ. मोहिनी मित्तल, कपिल कुमार, जूली, डॉ. पूजा, गोल्डी सहित अन्य मौजूद रहे।
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कार्यक्रम में प्रो. सुधीर त्यागी ने कहा कि प्रधानमंत्री का विज़न देश को 2047 तक विकसित एवं समृद्ध भारत बनाने का है। ऐसे में शिक्षा के क्षेत्र से जुड़े हुए लोगों एवं युवाओं का कर्तव्य बनता है कि हम नवीन एवं सार्थक खोजों से इस विजन को साकार करने में योगदान दें। उन्होंने कहा कि आज के युवाओं को शोध की ओर अधिक ध्यान देना होगा। उन्होंने आयोजन के लिए विभागाध्यक्ष डॉ. प्रीति सिंह एवं उनकी टीम को सराहा।
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विषय विशेषज्ञ डॉ. अनिरुद्ध श्रीवास्तव ने कहा कि शोधार्थियों द्वारा शीघ्रता से शोध पत्र पूरा करने के फेर में कई बार कुछ कमियां रह जाती हैं। इससे उनका शोध पत्र उच्चस्तर के जर्नल्स में प्रकाशन से वंचित रह जाता है। उन्होंने कहा कि आज के समय में शोध-पत्रों में मौलिकता व नैतिकता की कमी है। शोधपत्र लेखन के विभिन्न आयामों पर डॉ. श्रीवास्तव ने सभी के प्रश्नों का उत्तर दिया।
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उन्होंने कहा कि युवाओं को पाठ्यक्रम के प्रथम वर्ष से ही शोध से संबंधित जानकारी दी जाए ताकि वे अपनी स्नातक शिक्षा पूरी करने के साथ उच्च स्तरीय शोध पत्रों को प्रकाशित करा सकें। विभागाध्यक्ष डॉ. प्रीति सिंह ने कहा कि इस से युवाओं को काफी लाभ होगा। इस दौरान सहायक आचार्य शैली शर्मा, तरुण जैन और अन्य विभागों से डॉ. राज रानी, डॉ. अमृता चौधरी, डॉ. सीमा मलिक, डॉ. कुसुम, डॉ. रुबी, डॉ. लवली, डॉ. मोहिनी मित्तल, कपिल कुमार, जूली, डॉ. पूजा, गोल्डी सहित अन्य मौजूद रहे।