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26 से नौचंदी मेला, मैदान बना तबेला
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 09 Mar 2017 02:08 AM IST
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फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
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नौचंदी मेले की तैयारी को लेकर अधिकारी गंभीर नहीं दिख रहे। ठेका छोड़ने के लिए चुनाव आयोग की अनुमति का इंतजार है। वहीं मेला परिसर की सफाई में जिला पंचायत लापरवाह बना हुआ है। ऐसे में 26 मार्च को होने वाले मेला उद्घाटन की तैयारी प्रभावित होती नजर आ रही हैं।
मेला आयोजन में मात्र 18 दिन शेष हैं, लेकिन मेला परिसर अभी भी भैंसों का तबेला बना हुआ है। परिसर में बनी पक्की दुकानों में जहां भैंसें बंधी हुई हैं, वहीं मैदान में गोबर और कूड़े के ढेर लगे हुए हैं। इसके अलावा पूरा मैदान उबड़ खाबड़ होने के साथ कई जगह कीचड़ भी जमा है। इस बार मेला आयोजन जिला पंचायत को करना है, लेकिन अभी तक कोई तैयारी नहीं की गई है। अभी तक मेला आयोजन के लिए तहबाजारी, विज्ञापन और लाइट व साउंड का ठेका नहीं छोड़ा गया है।
दूसरे जनपदों से भी आते थे लोग
नौचंदी मेला कभी पश्चिमी उत्तर प्रदेश का सबसे बड़ा ऐतिहासिक मेला हुआ करता था। यह मेला होली के बाद आने वाले दूसरे रविवार से शुरू होता है। इसमें मेरठ जनपद के ही नहीं बल्कि आसपास के जनपदों के लोग भी मेला देखने आते थे। लेकिन संचार क्रांति के बढ़ने के साथ ही मेलों की तरफ जहां जनता का रुझान कम होने लगा वहीं नौचंदी मेला भी राजनीति और उदासीनता की भेंट चढ़ता गया। मेला आयोजन को लेकर जिला पंचायत और नगर निगम में विवाद हुआ। इस विवाद में तय हुआ कि एक साल जिला पंचायत और दूसरे साल नगर निगम मेला आयोजन करेगा।
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यह होती है व्यवस्था
मेला उद्घाटन से पहले मेला परिसर की पूरी तरह सफाई के साथ पक्की दुकानों की रंगाई पुताई होती है। परिसर के रास्ते तैयार होते हैं किनारों पर फुलवारी लगाई जाती है। इसे तैयार होने में 15 दिन लग जाते हैं। लेकिन इस बार लग रहा है कि उद्घाटन के मौके पर मेला परिसर पूरी तरह सुसज्जित नहीं हो सकेगा
आयोग ने नहीं दी अनुमति
जिला पंचायत के एएमए शिशुपाल शर्मा का कहना है कि हमने मेला आयोजन के टेंडर छोड़ने के लिए निर्वाचन आयोग से अनुमति मांगी थी, लेकिन वहां से कोई जवाब नहीं आया। इस कारण टेंडर नहीं छोड़े जा सके हैं। वहीं मतगणना के बाद मेला परिसर की सफाई शुरू करा दी जाएगी।
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मेला आयोजन में मात्र 18 दिन शेष हैं, लेकिन मेला परिसर अभी भी भैंसों का तबेला बना हुआ है। परिसर में बनी पक्की दुकानों में जहां भैंसें बंधी हुई हैं, वहीं मैदान में गोबर और कूड़े के ढेर लगे हुए हैं। इसके अलावा पूरा मैदान उबड़ खाबड़ होने के साथ कई जगह कीचड़ भी जमा है। इस बार मेला आयोजन जिला पंचायत को करना है, लेकिन अभी तक कोई तैयारी नहीं की गई है। अभी तक मेला आयोजन के लिए तहबाजारी, विज्ञापन और लाइट व साउंड का ठेका नहीं छोड़ा गया है।
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दूसरे जनपदों से भी आते थे लोग
नौचंदी मेला कभी पश्चिमी उत्तर प्रदेश का सबसे बड़ा ऐतिहासिक मेला हुआ करता था। यह मेला होली के बाद आने वाले दूसरे रविवार से शुरू होता है। इसमें मेरठ जनपद के ही नहीं बल्कि आसपास के जनपदों के लोग भी मेला देखने आते थे। लेकिन संचार क्रांति के बढ़ने के साथ ही मेलों की तरफ जहां जनता का रुझान कम होने लगा वहीं नौचंदी मेला भी राजनीति और उदासीनता की भेंट चढ़ता गया। मेला आयोजन को लेकर जिला पंचायत और नगर निगम में विवाद हुआ। इस विवाद में तय हुआ कि एक साल जिला पंचायत और दूसरे साल नगर निगम मेला आयोजन करेगा।
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यह होती है व्यवस्था
मेला उद्घाटन से पहले मेला परिसर की पूरी तरह सफाई के साथ पक्की दुकानों की रंगाई पुताई होती है। परिसर के रास्ते तैयार होते हैं किनारों पर फुलवारी लगाई जाती है। इसे तैयार होने में 15 दिन लग जाते हैं। लेकिन इस बार लग रहा है कि उद्घाटन के मौके पर मेला परिसर पूरी तरह सुसज्जित नहीं हो सकेगा
आयोग ने नहीं दी अनुमति
जिला पंचायत के एएमए शिशुपाल शर्मा का कहना है कि हमने मेला आयोजन के टेंडर छोड़ने के लिए निर्वाचन आयोग से अनुमति मांगी थी, लेकिन वहां से कोई जवाब नहीं आया। इस कारण टेंडर नहीं छोड़े जा सके हैं। वहीं मतगणना के बाद मेला परिसर की सफाई शुरू करा दी जाएगी।