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राष्ट्रीय मध्यस्थता अभियान 2.0: शीघ्र न्याय के लिए अपील करें
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माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से राष्ट्र के लिए मध्यस्थता अभियान 2.0 का चलाया जा रहा है। यह अभियान 1 जनवरी से 30 अप्रैल तक चलेगा। मेरठ जनपद में इस अभियान को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष जिला न्यायाधीश अनुपम कुमार के मार्गदर्शन में समस्त न्यायालयों में विशेष प्रयास किए जा रहे हैं।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण मेरठ की जिला सचिव नम्रता सिंह प्रथम ने बताया जनपद के नागरिक 30 अप्रैल तक चल रहे राष्ट्र के लिए मध्यस्थता अभियान 2.0में सक्रिय रूप से भाग लें सकते है। वे अपने लंबित वादों के शीघ्र, सरल और प्रभावी न्याय के लिए संबंधित न्यायालयों, कार्यालयों अथवा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, मेरठ के कार्यालय से संपर्क कर मध्यस्थता का लाभ उठाएं।
उन्होंने बताया कि इस अभियान के तहत, विभिन्न न्यायिक मंचों पर लंबित मामलों को मध्यस्थता के माध्यम से सुलझाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। पहचाने गए अधिकांश मामले पांच मुख्य श्रेणियों में आते हैं, जिनमें भू-सन्दर्भित वाद, वैवाहिक वाद, चेक बाउंस वाद, दुर्घटना दावे और समझौता योग्य आपराधिक मामले शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, श्रम न्यायालय से संबंधित वादों को भी इस मध्यस्थता अभियान के तहत संदर्भित किया जा सकता है।
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मेरठ। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से राष्ट्र के लिए मध्यस्थता अभियान 2.0 का चलाया जा रहा है। यह अभियान 1 जनवरी से 30 अप्रैल तक चलेगा। मेरठ जनपद में इस अभियान को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष जिला न्यायाधीश अनुपम कुमार के मार्गदर्शन में समस्त न्यायालयों में विशेष प्रयास किए जा रहे हैं।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण मेरठ की जिला सचिव नम्रता सिंह प्रथम ने बताया जनपद के नागरिक 30 अप्रैल तक चल रहे राष्ट्र के लिए मध्यस्थता अभियान 2.0में सक्रिय रूप से भाग लें सकते है। वे अपने लंबित वादों के शीघ्र, सरल और प्रभावी न्याय के लिए संबंधित न्यायालयों, कार्यालयों अथवा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, मेरठ के कार्यालय से संपर्क कर मध्यस्थता का लाभ उठाएं।
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उन्होंने बताया कि इस अभियान के तहत, विभिन्न न्यायिक मंचों पर लंबित मामलों को मध्यस्थता के माध्यम से सुलझाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। पहचाने गए अधिकांश मामले पांच मुख्य श्रेणियों में आते हैं, जिनमें भू-सन्दर्भित वाद, वैवाहिक वाद, चेक बाउंस वाद, दुर्घटना दावे और समझौता योग्य आपराधिक मामले शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, श्रम न्यायालय से संबंधित वादों को भी इस मध्यस्थता अभियान के तहत संदर्भित किया जा सकता है।
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