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Meerut News: नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की
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पंचवटी कॉलोनी में श्रीमद्भागवत कथा में श्रीकृष्ण जन्मकथा, समुद्र मंथन का प्रसंग सुनाया
माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। आभा मानव मंदिर वरिष्ठ नागरिक सेवा सदन पंचवटी कॉलोनी में श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन आचार्य पंडित विनय शास्त्री ने श्रद्धालुओं को भगवान श्रीकृष्ण जन्मोत्सव का भावपूर्ण वर्णन सुनाया।
कथा पंडाल में भगवान श्रीकृष्ण जन्मोत्सव मनाया गया। आचार्य विनय शास्त्री ने कहा कि जब कंस के अत्याचारों से पृथ्वी त्राहिमाम करने लगी। तब सभी देवताओं ने भगवान विष्णु से प्रार्थना की। भगवान विष्णु ने आश्वासन दिया कि वे मथुरा में अवतार लेंगे। इसके उपरांत भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि, रोहिणी नक्षत्र एवं मध्यरात्रि में भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ।
इस बीच व्यासपीठ से नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल का उद्घोष हुआ। पूरा पंडाल भक्तिमय हो गया और श्रद्धालु भाव विभोर होकर झूम उठे। कथा के दौरान समुद्र मंथन प्रसंग, भगवान विष्णु के मोहिनी रूप, भगवान शिव द्वारा विषपान, भगवान वामन एवं राजा बलि की कथा का भी विस्तार से वर्णन किया गया।
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आचार्य विनय शास्त्री ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा सुनने से मनुष्य के भीतर भगवान श्रीकृष्ण के प्रति अटूट भक्ति जाग्रत होती है। कलियुग में मन की शुद्धि और आत्मिक कल्याण के लिए भागवत कथा से श्रेष्ठ कोई उपाय नहीं है। कथा को श्रद्धा एवं मनोयोग से सुनने मात्र से भगवान भक्तों के हृदय में विराजमान हो जाते हैं और उनका कल्याण करते हैं।
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माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। आभा मानव मंदिर वरिष्ठ नागरिक सेवा सदन पंचवटी कॉलोनी में श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन आचार्य पंडित विनय शास्त्री ने श्रद्धालुओं को भगवान श्रीकृष्ण जन्मोत्सव का भावपूर्ण वर्णन सुनाया।
कथा पंडाल में भगवान श्रीकृष्ण जन्मोत्सव मनाया गया। आचार्य विनय शास्त्री ने कहा कि जब कंस के अत्याचारों से पृथ्वी त्राहिमाम करने लगी। तब सभी देवताओं ने भगवान विष्णु से प्रार्थना की। भगवान विष्णु ने आश्वासन दिया कि वे मथुरा में अवतार लेंगे। इसके उपरांत भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि, रोहिणी नक्षत्र एवं मध्यरात्रि में भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ।
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इस बीच व्यासपीठ से नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल का उद्घोष हुआ। पूरा पंडाल भक्तिमय हो गया और श्रद्धालु भाव विभोर होकर झूम उठे। कथा के दौरान समुद्र मंथन प्रसंग, भगवान विष्णु के मोहिनी रूप, भगवान शिव द्वारा विषपान, भगवान वामन एवं राजा बलि की कथा का भी विस्तार से वर्णन किया गया।
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आचार्य विनय शास्त्री ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा सुनने से मनुष्य के भीतर भगवान श्रीकृष्ण के प्रति अटूट भक्ति जाग्रत होती है। कलियुग में मन की शुद्धि और आत्मिक कल्याण के लिए भागवत कथा से श्रेष्ठ कोई उपाय नहीं है। कथा को श्रद्धा एवं मनोयोग से सुनने मात्र से भगवान भक्तों के हृदय में विराजमान हो जाते हैं और उनका कल्याण करते हैं।