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नगर निगम में की तालाबंदी

Sun, 23 Oct 2016 03:24 AM IST
अमर उजाला ब्यूरों
अमर उजाला ब्यूरों Updated Sun, 23 Oct 2016 03:24 AM IST
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nagar nigam me taala
फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
अलकरीम होटल और आबूनाल पटरी की फाइल गायब होने के आरोप में निलंबित किए गए किराया लिपिक के मामले ने तूल पकड़ लिया है। शनिवार को लिपिक की बहाली की मांग को लेकर नगर निगम में कर्मचारियों ने धरना देकर तालाबंदी कर दी। कर्मचारी नेताओं ने सोमवार को भी तालाबंदी करने की चेतावनी दी है।
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शहर घंटाघर स्थित अलकरीम होटल और आबूनाला पटरी पर दुकानों का मामला हाईकोर्ट में चल रहा है। जिसमें हाईकोर्ट ने जिलाधिकारी, नगरायुक्त और एमडीए वीसी को तलब करने का आदेश जारी किया है। हाईकोर्ट के आदेश की समय से सूचना न मिलने और अलकरीम होटल व आबूनाला पटरी से संबंधित फाइलें गायब होने पर  नगरायुक्त ने शुक्रवार को किराया लिपिक लोकेश शर्मा को निलंबित कर दिया था। इसके विरोध में शनिवार को निगम कर्मचारियों ने जहां कार्य का बहिष्कार किया वहीं तालाबंदी करते हुए दिनभर धरना दिया। कर्मचारी नेता अनीस अहमद का कहना है कि नगरायुक्त द्वारा की गई कार्रवाई उत्पीड़नात्मक है। बाबूराम सैनी ने कहा कि फाइल गायब होने से लेकर न्यायालय में निगम अधिकारियों के तलब होने तक की कार्रवाई में किराया प्रभारी दिनेश यादव जिम्मेदार हैं। श्रीपाल ने कहा कि धरना स्थल पर कम उपस्थित से साफ जाहिर हो रहा है कि ढाई साल में कर्मचारियों के हित की लड़ाई नहीं लड़ी गई। अगर यूनियन मजबूत होती तो आज ये दिन देखने को नहीं मिलते। प्रदीप जोशी और नवल सिंह ने कहा कि नगरायुक्त कर्मचारियों का उत्पीड़न कर रहे हैं। महक सिंह, लोकेश शर्मा, प्रदीप जैन आदि ने भी कर्मचारियों की एकजुटता पर बल दिया।
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कर्मचारी नेताओं की खंगाली जाएगी कुंडली
अलकरीम होटल और आबूनाला पटरी की फाइल के अलावा दो दर्जन से अधिक महत्वपूर्ण फाइलें गायब बताई जा रही हैं। नगरायुक्त देवेंद्र कुमार कुशवाहा की मानें तो अब पाल होटल, पालिका बाजार, निगम की अन्य दुकान एवं संपत्तियों की फाइलें भी देखी जाएंगी। इतना ही नहीं कर्मचारी नेताओं के पटल का पूरा लेखाजोखा खंगाला जाएगा। नगरायुक्त का कहना है कि सोमवार से धरने पर बैठने वाले कर्मचारियों की वीडियोग्राफी कराई जाएगी। वह किसी कर्मचारी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं करना चाहते हैं, केवल कर्मचारी नेताओं के खिलाफ कार्रवाई करेंगे। क्योंकि कुछ कर्मचारियों ने शिकायत की है कि कर्मचारी नेता उन्हें जबरदस्ती धरने पर बैठने का दबाव बना रहे हैं।  
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न्यायालय को गुमराह करते रहे हैं दिनेश यादव
नगरायुक्त ने बताया कि अलकरीम होटल का मामला हो या फिर आबूनाला पटरी का मामला। सभी में दिनेश यादव ने न्यायालय को गलत सूचना दी है। अलकरीम होटल की फाइल में एक तरफ जहां एक रिपोर्ट में दिनेश यादव ने तत्कालीन नगरायुक्त को गुमराह करके अलकरीम होटल का मुख्य आवंटी फिरोज इलाही को दर्शाया है। वहीं दूसरी रिपोर्ट में होटल का मुख्य आवंटी जनक राज पुत्र नानक चंद को दर्शा दिया। जिसका संज्ञान न्यायालय में लिया गया है। इतना ही नहीं किराया प्रभारी अपने एक पत्र में कह चुके हैं कि फाइलें गायब हैं। किराया प्रभारी और लिपिक द्वारा जो फाइल दी गई है। वह मूल फाइल नहीं है। बल्कि पत्र व्यवहार की फाइल है। जो कर्मचारी कार्य का बहिष्कार करके धरने पर बैठे हैं उनके  वेतन काटने की कार्रवाई की जाएगी। किराया प्रभारी को निर्देश दिए गए हैं कि वह संबंधित लिपिक के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराएं। साथ ही स्पष्टीकरण भी मांगा है।


कर्मचारी नेता दिखे दो फाड़
शनिवार को धरना स्थल पर कर्मचारी नेता दो फाड़ दिखाई दिए। जहां कुछ कर्मचारी नेताओं ने फाइल गायब के लिए किराया प्रभारी को जिम्मेदार ठहराया। वहीं कुछ ने नगरायुक्त द्वारा की गई कार्रवाई का विरोध किया। शाम को कर्मचारी नेता सूरजकुंड कैंप कार्यालय पर महापौर से भी मिले। वहीं नगर निगम एक तरफ जहां धरना चल रहा था तो वहीं दूसरी तरफ टैक्स इंस्पेक्टर कुसुम शर्मा अपने कार्यालय में बैठकर काम कर रही थीं। इतना ही नहीं टैक्स जमा करने वाला काउंटर भी खुला रहा। जहां पर दिन भर शहर की जनता ने अपने हाउस टैक्स और पानी के बिल जमा कराए।


 
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