मेरी डॉल्फिन मेरी सूंस अभियान की हुई शुरुआत, 30 कछुओं को मिली गंगा की गोद, अठखेलियां करती दिखीं डॉल्फिन
- मेरी डॉल्फिन मेरी सूंस अभियान की हुई शुरुआत, दो टीमें करेंगी 11 अक्टूबर तक गणना
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
मेरठ से सटे हस्तिनापुर में गंगा में अठखेलियां करती डॉल्फिन की गणना सोमवार से शुरू हो गई है। पहले दिन ही डॉल्फिन नजर आ गई है। डब्लूडब्लूएफ की टीम पूरा डाटा दोनों नावों से गणना किए जाने के बाद 11 अक्टूबर को जारी करेगी।
वहीं, सोमवार को 30 कछुओं को भी मां गंगा की गोद मिल गई है। डॉल्फिन की गणना के साथ-साथ वन विभाग और डब्लूडब्लूूएफ की टीमें गंगा किनारे के गांवों में डॉल्फिन को लेकर जागरूकता अभियान भी चलाएंगे ताकि ग्रामीण भी मेरी डॉल्फिन मेरी सूंस अभियान का हिस्सा बन सकें।
सोमवार को इस अभियान की शुरुआत राष्ट्रीय स्वच्छता गंगा मिशन अभियान के निदेशक जनरल राजीव रंजन मिश्रा के नेतृत्व में हैदपुर बैराज से डॉल्फिन गणना की शुरुआत की गई। इस मौके पर गंगा में संकटग्रस्त प्रजाति के 30 कछुओं को छोड़ा गया।
विश्व प्रकृति निधि और वन विभाग के नेतृत्व में अभियान के कोऑर्डिनेटर शाहनवाज खान ने बताया कि पहले दिन बिजनौर बैराज से सिरजोपुर गांव तक गणना की गई। मंगलवार से यहां से आगे गणना होगी।
वरिष्ठ परियोजना अधिकारी संजीव यादव ने बताया कि दो वोट से जीपीएस लोकेशन देखते हुए गणना की जा ही है। ऐसे में 11 अक्टूबर को ही सही संख्या पता चल पाएगी।
सुबह आठ बजे से 11 और शाम को साढ़े तीन बजे से होती है गणना
शोध के मुताबिक डॉल्फिन का सबसे ज्यादा मूवमेंट सुबह आठ बजे से सुबह 11 बजे और दोपहर साढ़े तीन बजे से शाम साढ़े पांच बजे तक होता है। ऐसे में वह खाने की तलाश में घूमती है। डॉल्फिन हर तीन मिनट में पानी से छलांग लगाती है। ऐसे में इसी समय टीम इसकी गणना करती है, जिससे कि उसकी संख्या का पता चलता है।
ये है पिछले वर्षों की गणना
2015 - बिजनौर बैराज से नरोरा बैराज तक - 22
2016- बिजनौर बैराज से नरोरा बैराज तक - 30
2017- बिजनौर बैराज से नरोरा बैराज तक - 32
2018 - बिजनौर बैराज से नरोरा बैराज तक- 33
2019 - बिजनौर बैराज से नरोरा बैराज तक - 35