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मेरा अनिल तो नहीं आ सकता...पर आज दिल को कुछ तसल्ली हुई

Fri, 05 Mar 2021 02:40 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Fri, 05 Mar 2021 02:40 AM IST
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My Anil can't come ... but today my heart was comforted
मेरा अनिल तो नहीं आ सकता...पर आज दिल को कुछ तसल्ली हुई
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मेरठ। इकलौते बेटे की अर्थी को कंधा देने वाले पिता का दर्द कोई नहीं समझ सकता। 78 वर्षीय राजेंद्र सिंह त्यागी सात साल से अपने इसी गम को दिल में छुपाकर पत्नी, बहू, पोतों को ढाढ़स बंधाते रहे। लेकिन बृहस्पतिवार को प्रयागराज में हुए एनकाउंटर में दो बदमाशों वकील पांडेय और अमजद के मरने की खबर सुनी तो धुंधली आंखें भी चमक उठीं। टीवी पर खबर देखकर पत्नी से बोले, संतोष-आज तेेरे अनिल के हत्यारे खत्म हो गए हैं। आंखेे नम हो गईं। बस यही शब्द निकले कि मेरा अनिल तो नहीं आ सकता लेकिन इतना तो सुकून मिला कि उसके हत्यारों को सबक मिल गया। योगी सरकार को धन्यवाद। एसटीएफ और पुलिस टीम को धन्यवाद।
वर्ष 2013 में वाराणसी में डिप्टी जेलर अनिल त्यागी की बदमाशों ने गोली बरसाकर हत्या कर दी थी। वाराणसी जेल में उनकी सख्ती से परेशान होकर इस घटना को अंजाम दिलाया गया था। तब से परिवार के सदस्य इंसाफ के इंतजार में थे। यहां गढ़ रोड नेहरू नगर गली नंबर एक निवासी राजेंद्र सिंह त्यागी खाद एवं रसद विभाग में मार्केटिंग इंस्पेक्टर रहे हैैं। बेटे के हत्यारों के मरने की सूचना उनके दोस्त ने फोन पर राजेंद्र सिंह को बताई तो उन्होंने तुरंत टीवी ऑन कर दिया। फिर उन्होंने पत्नी संतोष, बहू और दो पोतों को यह खुशखबरी सुनाई। बोले, दोनों हत्यारे मारे गए तो कुछ तसल्ली मिली है।
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ईमानदार अफसर की मौत पर हुई घोषणा साबित हुई कागजी
- डिप्टी जेलर अनिल त्यागी की ईमानदार अफसरों में गिनती होती थी। उनकी हत्या के बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने परिवार को 20 लाख रुपये आर्थिक मदद की घोषणा की थी। 24 नवंबर 2013 को कैबिनेट मंत्री शिवपाल सिंह यादव ने घर आकर सहायता राशि देने की घोषणा की। इसके बाद भी दावे किए जाते रहे। मगर घोषणाएं कागजी रहीं। अनिल त्यागी के बड़े बेटे अनंत देव सिंह अब 12वीं और छोटे बेटे रुद्रांस देव सिंह आठवीं कक्षा में हैं। पिता राजेंद्र सिंह बस इतना ही कहते हैं कि मुख्यमंत्री की घोषणा भी आज तक पूरी नहीं हुई। मेरा बेटा तो फर्ज के लिए कुरबान हो गया। ऐसे ईमानदार बेटों की शहादत पर भी राजनीति और झूठी घोषणाएं न हों।
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