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अवैध मीट कटान मामले में पुलिस और शासन के पाले में डाली गेंद

Sun, 03 Jan 2021 01:26 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sun, 03 Jan 2021 01:26 AM IST
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Municipal Corporation replied on the IGRS portal
मेरठ। मीट विक्रेताओं, भगत सिंह मार्केट और हस्तिनापुर में बूढी गंगा मामले में चार जनवरी को हाईकोर्ट में सुनवाई होनी है। इससे पहले ही सभी मामलों में संबंधित विभाग एक दूसरे के पाले में गेंद डालने की तैयारी कर चुके हैं। मीट विक्रेताओं की याचिका पर नगर निगम ने गेंद पुलिस-प्रशासन के पाले में डालने की तैयारी की है, तो भगत सिंह मार्केट में भी अतिक्रमण को लेकर पूर्व में की गई कार्रवाई को आधार बनाते हुए जवाब दाखिल करने की तैयारी है। हालांकि वहां अतिक्रमण जस का तस है।
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शहर के मीट विक्रेताओं ने नगर निगम की तरफ से संचालित होने वाले कमेले का चार साल से संचालन न होने और इसकी आड़ में अवैध कटान को लेकर हाईकोर्ट में याचिका डाल रखी है। मीट विक्रेताओं का आरोप है कि एक मीट फैक्टरी के मालिक के दबाव में नगर निगम कमेला नहीं चला रहा है। मीट फैक्टरी संचालक महंगे दाम पर मीट देता है। इसका फायदा उठाकर अवैध कटाने करने वाले सक्रिय हो गए हैं।
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मामले में नगर निगम का जवाब है कि अवैध कटान रोकने का काम पुलिस का है। पुलिस ने इसके जवाब में अवैध कटान और पशु तस्करी को लेकर की गई कार्रवाई का ब्यौरा तैयार कर लिया है। वहीं कमेला संचालन को लेकर नगर निगम का कहना है कि चार साल पहले डा. संदीप पहल ने कमेला संचालन को लेकर आपत्ति जताई थी। पूरा मामला शासन को भेज दिया गया था। जिसका आज तक निस्तारण नहीं हो पाया है। वहीं जिला प्रशासन को बूढ़ी गंगा के अस्तित्व के लगभग समाप्त होने पर भी जवाब देना है। इस मामले में प्रियंक भारती ने याचिका दायर की हुई है। इस पर भी सोमवार को सुनवाई होनी है।
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मीट विक्रेताओं की याचिका पर नगर निगम घेरे में
नगर निगम एक्ट में मीट उपलब्ध कराने के लिए कमेला संचालन की जिम्मेदारी तय है। इसके बावजूद चार साल से घोसीपुर में कमेला संचालन पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। वहीं शहर में धड़ल्ले से मीट बिक रहा है। ऐसे में खुद ही इस आरोप की पुष्टि हो जाती है कि शहर ही नहीं बल्कि जनपद में भी अवैध कटान हो रहा है। ऐसे में सवाल ये है कि चार साल से शासन में पत्रावली लंबित है, लेकिन नगर निगम ने इसकी पैरवी क्यों नहीं की। जिस मीट फैक्टरी संचालक के साथ साठगांठ के आरोप लग रहे हैं, वह कहीं न कहीं इसकी पुष्टि करते नजर आते हैं।
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