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मुंबई की तर्ज पर बनेगी यूपी पुलिस
अमर उजाला ब्यूरों
Updated Sat, 20 Aug 2016 02:08 AM IST
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फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
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वेस्ट यूपी की पुलिसिंग हाईटेक होगी। करोड़ों रुपये की लागत से लखनऊ में बना कंट्रोल रूम यूपी पुलिस को कंट्रोल करेगा। कानून-व्यवस्था और बदहाल ट्रैफिक सिस्टम को लखनऊ से ही कंट्रोल करने की कवायद हो रही है। इस सिस्टम को अमलीजामा पहनाने के लिए शुक्रवार को पुलिस लाइन में जोन के सभी एसएसपी का प्रशिक्षण कार्यक्रम हुआ।
एसपी ट्रैफिक लखनऊ अभिषेक सिंह ने इस दौरान एसएसपी मेरठ जे. रविंदर गौड़, एसएसपी मुजफ्फरनगर दीपक कुमार, एसपी हापुड़ अलंकृता सिंह, एसपी बागपत पूनम, बुलंदशहर समेत जोन के पुलिस अफसरों के साथ मीटिंग की। एसपी अभिषेक सिंह ने बताया कि अमेरिकी पुलिस कंट्रोल रूम (911) की तर्ज पर उत्तर प्रदेश में पुलिसिंग की कवायद चल रही है। इसके लिए लखनऊ में कंट्रोल रूम बनाया गया है। शुरुआती चरण में वेस्ट यूपी के जिलों को सीधे लखनऊ कंट्रोल रूम से जोड़ा जा रहा है। इस सिस्टम को लागू करने के लिए जोन के कप्तानों को शुरुआती ट्रेनिंग दी जा रही है।
डिजिटल मैप कंप्यूटर में फीड होगा
योजना के तहत मेरठ जोन के कप्तान अपने-अपने जिले के 5-5 साइबर एक्सपर्ट पुलिसकर्मियों को तैयार करेंगे। ये जिले के संवेदनशील और अतिसंवेदनशील प्वाइंट को डिजिटल मैप में फीड कर लखनऊ कंट्रोल रूम को जानकारी देंगे। इसके आधार पर डिजिटल मैपिंग होगी। किसी भी वारदात पर लखनऊ में बैठा अधिकारी डिजिटल मैपिंग के जरिये घटनास्थल की सही लोकेशन पता लगाएगा, जिससे पुलिस तत्काल घटनास्थल पर पहुंच सके।
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यह आएगा मेरठ के हिस्से में
इस सिस्टम को चलाने के लिए जिले को अत्याधुनिक संसाधनों और जीपीएस से लैस इनोवा मिलेंगी। मेरठ को 50 इनोवा मिलने की संस्तुति हो गई है। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि हाईवे या फिर बड़ी घटनाओं पर इन गाड़ियों का मूवमेंट सबसे ज्यादा होगा, जिन पर लखनऊ से निगरानी होगी।
अब लखनऊ में बजेगी घंटी
यह सिस्टम शुरू होते ही 100 नंबर की घंटी स्थानीय कंट्रोल रूम के बजाय लखनऊ में बजेगी। एसएसपी जे. रविंदर गौड़ ने बताया कि लखनऊ कंट्रोल रूम सीधे एक्शन लेगा। पुलिस की लापरवाही की शिकायत भी सीधे लखनऊ में ही होगी।
दो लाख कॉल एक साथ सुनेंगे
एसएसपी मुजफ्फरनगर दीपक कुमार ने बताया कि यूपी के जिलों से एक साथ दो लाख कॉल सुनी जा सकती हैं। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि लखनऊ कंट्रोल रूम अत्याधुनिक तकनीक से लैस है। जिले में एक साथ अधिकतम सात या फिर आठ कॉल ही सुनी जा सकती हैं।
भौगोलिक स्थिति पर भी फोकस
एसपी ट्रैफिक अभिषेक सिंह ने बताया कि हर जिले के कप्तानों को अपने इलाके की भौगोलिक स्थिति के बारे में भी बताना होगा। जैसे कि पशु पैठ लगना, धार्मिक मेला या फिर कौन से दिन कहां पर ज्यादा जाम लगता है। इसका डाटा कप्तानों को पहले देना होगा। डिजिटल मैप में यह डाटा भी फीड किया जाएगा।
गांधी जयंती पर व्यवस्था लागू
अफसरों के अनुसार दो अक्तूबर को गांधी जयंती पर यह व्यवस्था लागू की जाएगी। जिले के कप्तान अपने जिले में पांच एक्सपर्ट्स को ट्रेनिंग देंगे। जो प्रत्येक थानेदार, सीओ को इसके बारे में जानकारी देंगे।
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एसपी ट्रैफिक लखनऊ अभिषेक सिंह ने इस दौरान एसएसपी मेरठ जे. रविंदर गौड़, एसएसपी मुजफ्फरनगर दीपक कुमार, एसपी हापुड़ अलंकृता सिंह, एसपी बागपत पूनम, बुलंदशहर समेत जोन के पुलिस अफसरों के साथ मीटिंग की। एसपी अभिषेक सिंह ने बताया कि अमेरिकी पुलिस कंट्रोल रूम (911) की तर्ज पर उत्तर प्रदेश में पुलिसिंग की कवायद चल रही है। इसके लिए लखनऊ में कंट्रोल रूम बनाया गया है। शुरुआती चरण में वेस्ट यूपी के जिलों को सीधे लखनऊ कंट्रोल रूम से जोड़ा जा रहा है। इस सिस्टम को लागू करने के लिए जोन के कप्तानों को शुरुआती ट्रेनिंग दी जा रही है।
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डिजिटल मैप कंप्यूटर में फीड होगा
योजना के तहत मेरठ जोन के कप्तान अपने-अपने जिले के 5-5 साइबर एक्सपर्ट पुलिसकर्मियों को तैयार करेंगे। ये जिले के संवेदनशील और अतिसंवेदनशील प्वाइंट को डिजिटल मैप में फीड कर लखनऊ कंट्रोल रूम को जानकारी देंगे। इसके आधार पर डिजिटल मैपिंग होगी। किसी भी वारदात पर लखनऊ में बैठा अधिकारी डिजिटल मैपिंग के जरिये घटनास्थल की सही लोकेशन पता लगाएगा, जिससे पुलिस तत्काल घटनास्थल पर पहुंच सके।
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यह आएगा मेरठ के हिस्से में
इस सिस्टम को चलाने के लिए जिले को अत्याधुनिक संसाधनों और जीपीएस से लैस इनोवा मिलेंगी। मेरठ को 50 इनोवा मिलने की संस्तुति हो गई है। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि हाईवे या फिर बड़ी घटनाओं पर इन गाड़ियों का मूवमेंट सबसे ज्यादा होगा, जिन पर लखनऊ से निगरानी होगी।
अब लखनऊ में बजेगी घंटी
यह सिस्टम शुरू होते ही 100 नंबर की घंटी स्थानीय कंट्रोल रूम के बजाय लखनऊ में बजेगी। एसएसपी जे. रविंदर गौड़ ने बताया कि लखनऊ कंट्रोल रूम सीधे एक्शन लेगा। पुलिस की लापरवाही की शिकायत भी सीधे लखनऊ में ही होगी।
दो लाख कॉल एक साथ सुनेंगे
एसएसपी मुजफ्फरनगर दीपक कुमार ने बताया कि यूपी के जिलों से एक साथ दो लाख कॉल सुनी जा सकती हैं। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि लखनऊ कंट्रोल रूम अत्याधुनिक तकनीक से लैस है। जिले में एक साथ अधिकतम सात या फिर आठ कॉल ही सुनी जा सकती हैं।
भौगोलिक स्थिति पर भी फोकस
एसपी ट्रैफिक अभिषेक सिंह ने बताया कि हर जिले के कप्तानों को अपने इलाके की भौगोलिक स्थिति के बारे में भी बताना होगा। जैसे कि पशु पैठ लगना, धार्मिक मेला या फिर कौन से दिन कहां पर ज्यादा जाम लगता है। इसका डाटा कप्तानों को पहले देना होगा। डिजिटल मैप में यह डाटा भी फीड किया जाएगा।
गांधी जयंती पर व्यवस्था लागू
अफसरों के अनुसार दो अक्तूबर को गांधी जयंती पर यह व्यवस्था लागू की जाएगी। जिले के कप्तान अपने जिले में पांच एक्सपर्ट्स को ट्रेनिंग देंगे। जो प्रत्येक थानेदार, सीओ को इसके बारे में जानकारी देंगे।