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मुखबिर करेंगे अल्ट्रासाउंड सेंटर की निगरानी  

Fri, 19 May 2017 02:39 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Updated Fri, 19 May 2017 02:39 AM IST
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mukhbir will keep eye on ultrasound centre
फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
 स्वास्थ्य विभाग अब पुलिसिया अंदाज में बेटियां बचाने की कोशिश करेगा। भ्रूण लिंग जांच और भ्रूण हत्या के धंधे पर लगाम लगाने के लिए विभाग हर जिले में मुखबिर बनाएगा, जो अल्ट्रा साउंड सेंटरों पर नजर रखेंगे। सूचना देने वाले मुखबिरों को प्रोत्साहन केरूप में इनाम भी दिया जाएगा।
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शासनादेश के तहत राज्य में पीसीपीएनडीटी एक्ट (गर्भ धारण एवं प्रसव पूर्व निदान तकनीक-विनियमन तथा दुरुपयोग अधिनियम) को सख्ती से लागू करने की तैयारी है। एक जनवरी 1996 से देश भर में लागू इस एक्ट के तहत जांच कराने वाले केंद्रों, प्रयोगशालाओं व अल्ट्रा साउंड केंद्रों को पंजीकरण कराना अनिवार्य है। अधिनियम के तहत किसी भी प्रकार से भ्रूण लिंग की जांच कर उसका परिणाम बताना गैर कानूनी है। नियम विरुद्ध काम करने पर संबंधित व्यक्ति पर मुकदमा किया जा सकता है। दोष सिद्ध होने पर तीन से पांच साल तक कैद तथा 50 हजार से एक लाख रुपये तक जुर्माना हो सकता है। कानून के तहत भ्रूण लिंग की जांच करने वाले डॉक्टर तथा जांच कराने वाले व्यक्ति दोनों को समान कैद एवं जुर्माना हो सकता है।
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इसी केतहत यह कवायद की जा रही है। शासन का मानना है कि राज्य में पीसीपीएनडीटी अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए जिलों में मुखबिर योजना लागू करने से तेजी आएगी। जन सामान्य को तत्काल इसका लाभ मिलेगा। योजना में सूचना देने वाले का नाम गुप्ता रखा जाने के साथ ही उसे प्रोत्साहन राशि भी शासन और जिला स्तर पर उपलब्ध कराई जाएगी। हालांकि राशि का खुलासा नहीं किया गया है। इस संबंध में सीएमओ वीपी सिंह ने बताया कि शासन केआदेशों का सख्ती से अनुपालन कराया जाएगा। बता दें कि मेरठ में 60 से ज्यादा अल्ट्रा साउंड सेंटर हैं। यहां लिंगानुपात प्रति एक हजार लड़कों पर 886 लड़कियां हैं।
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हरियाणा की टीम ने मारा था छापा
मेरठ। शहर में हरियाणा स्वास्थ्य विभाग की टीम ने छापामारी कर दो जगह भ्रूण लिंग परीक्षण के मामले पकड़े थे। हालांकि मेरठ की टीमें अभी तक ऐसा कोई मामला नहीं पकड़ पाई हैं। इससे साफ है कि यहां भी इस तरह की गतिविधियां संचालित होती रही हैं। भ्रूण लिंग परीक्षण और भ्रूण हत्या पर शासन गंभीर है। यह योजना कितनी कारगर होगी, यह आने वाला समय ही बताएगा। 
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