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युवाओं ने संजोयी मुगलकालीन विरासत, एक क्लिक में पढ़ें पूरी खबर

Mon, 26 Mar 2018 05:17 PM IST
यूपी डेस्क, अमर उजाला, विपुल सैनी, मेरठ
यूपी डेस्क, अमर उजाला, विपुल सैनी, मेरठ Updated Mon, 26 Mar 2018 05:17 PM IST
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Mughal heritage is still, read the full news in one click
पुरानी करेंसी के साथ सोमपाल प्रजापति - फोटो : अमर उजाला

सदियों पुराने सिक्कों को देखते ही भारत के राजघराने और उनकी हुकूमतें आंखों के सामने आ जाती हैं। गुलाम और स्वतंत्र भारत में शासन करने वालों ने जिस करेंसी को चलाया, उसका अनूठा संग्रह चांदी व अन्य धातु के सिक्कों के साथ-साथ 50 से अधिक देशों की करेंसी व सिक्के मेरठ के गौरव पंवार के संग्रहालय में मौजूद हैं।

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कंकरखेड़ा श्रद्धापुरी निवासी गौरव बताते हैं कि करीब 16 साल पहले उन्हें उनकी दादी के बक्से में कुछ मुगल कालीन सिक्के मिले थे। उन्हें देखने के बाद उनके मन में पुराने सिक्के और करेंसी को संग्रह करने का विचार आया। मुगलकालीन सिक्कों के लिए उन्होंने कई लंबी यात्राएं कीं। कई सिक्कों को महंगे दामों पर खरीदा तो कुछ सिक्के आग्रह करने से ही लोगों ने दे दिए। 
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गौरव के मुताबिक, इस वक्त उनके पास करीब 17 सौ, 12 सौ साल पुराने सिक्के हैं। कई सिक्के मुगलकाल के शुरुआती दौर के हैं। वहीं अंग्रेजों द्वारा भारत में शासन के समय के जारी किए सिक्के भी गौरव के पास हैं। चाहे वह रानी विक्टोरिया का समय रहा हो या फिर एडवर्ड चतुर्थ किंग के समय का। सभी के कार्यकाल के प्रति वर्ष के सिक्के गौरव के पास हैं।

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इन चीजों का किया संग्रह

Mughal heritage is still, read the full news in one click
अष्टधातु के सिक्के और मुहर दिखाता गौरव - फोटो : अमर उजाला

गौरव पंवार डिजाइनिंग डोर का बिजनेस करते हैं। पिता आर्मी बेस वर्कशॉप में कार्यरत हैं। गौरव के संग्रह में मुगलकाल की शुरूआती दौर के अष्टधातु से बने सिक्के, मोहर, एक टका, संवत, 1835 ई. में बना क्वार्टर आना, छेद वाला आने का सिक्का, 12 ग्राम का एक रुपये का सिक्का, राजा एडवर्ड के समय चलाए गए चांदी के सिक्के, 1862 से 1942 तक अंग्रेजी हुकूमत के प्रत्येक वर्ष के सिक्के, आजादी के बाद का 10 रुपये का फावड़ा नोट, 100 रुपये का स्ट्रिप नोट, 500 रुपये का सन् 1992 का कोरा नोट, 20 रुपये का पुराना व पांच रुपये का हिरन वाला नोट है। वहीं 55 तरह के कोमोरेटिव क्वाइंस (एक ही कीमत के एक साइड से अलग-अलग) हैं। गौरव के संग्रह में बादशाह अकबर, शाहजहां, ब्रिटिश शासन स्वतंत्रता के बाद के सिक्के हैं। एक हजार से अधिक अलग-अलग कंपनियों, अनेक राज्यों की माचिसों को एकत्र किया है, जो काफी रोचक हैं। वहीं ऑस्ट्रेलिया, इराक, भूटान, सेंट मरीनो, क्यूबा, यमन, अंगोला, जैरे, उरुगवे, नीदरलैंड के डाक टिकटों का संग्रह किया है।

ये भी हैं पुरानी चीजों के शौकीन
कसेरूखेड़ा आजादनगर निवासी सोमपाल प्रजापति पेशे से स्पोर्ट्स व्यापारी हैं। पुराने करेंसी हो या सिक्के या फिर कोई वस्तु सभी का संग्रह करने का शौक रखते हैं। उनके पास 1835 के रानी विक्टोरिया से लेकर वर्तमान के तक के सारे सिक्के मौजूद हैं। इसमें तांबे के एक पैसा से लेकर 20 पैसे तक की पूरी सीरीज है। 1/12 आना का सिक्का, एक नया पैसा, आधा आना, दस रुपये का वह नोट जिसमें गांधी जी पुस्तक पढ़ते हुए मुद्रित हैं, पांच रुपये के हिरन वाले नोट, दो के नोट आदि का संग्रह है। वहीं पुरानी वस्तुओं में पेजर, टाइप मशीन, ट्रांजिस्टर सेट, स्कूटर, 1962 की फेमिना पत्रिका आदि हैं। सोमपाल के मुताबिक उन्होंने कई जगहों पर महंगी बोली लगाकर सिक्कों को खरीदा।

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