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मेरठ में भी कम नहीं मलाला

Tue, 12 Jul 2016 02:10 AM IST
अमर उजाला ब्यूरों
अमर उजाला ब्यूरों Updated Tue, 12 Jul 2016 02:10 AM IST
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mrt me bhi malala
मलाला रजिया - फोटो : अमर उजाला

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 पाकिस्तान की मलाला यूसुफजई ने शिक्षा की खातिर जीवन की परवाह भी नहीं की। बालिका शिक्षा का रोल मॉडल बन चुकी मलाला पूरी दुनिया के लिए एक चेहरा हैं। लोग उनसे बेटियों क ो आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित हुए हैं। लेकिन हमारे शहर की बेटियों का साहस भी कम नहीं है। जिन्होंने समाज की बातों को दरकिनार किया, परंपराओं को पछाड़ा और शिक्षा की तरफ कदम बढ़ाया। आज पूरा विश्व मलाला का जन्मदिन विश्व मलाला दिवस के रूप में मनाएगा। इस खास मौके पर मलाला की तरह साहसी शहर की बेटियों से रूबरू कराती रिपोर्ट।
 
बहुत मुश्किल थी डगर शिक्षा की
जानी ब्लॉक के नंगलाकुंभा की बेटी रजिया सुल्तान। रजिया यूएन द्वारा घोषित पहले अंतरराष्ट्रीय मलाला अवार्ड से सम्मानित होने वाली बेटी है। मेरठ की रजिया को पहले मलाला अवार्ड से सम्मानित किया गया। बचपन में स्कूल की दहलीज से दूर फुटबाल बनाने के कारखाने में बाल मजदूरी करने वाली रजिया आज ग्रेजुएशन की शिक्षा ले रही है। रजिया के पिता मजदूरी करते हैं। फुटबाल के कारखाने से ग्रेजुएशन तक पहुंचने का यह सफर रजिया ने बड़ी मुश्किलों से तय किया। रजिया बताती है पढ़ना चाहती थी, लेकिन गांव में स्कूल नहीं है। मुस्लिम बेटियों को पढ़ाने का रिवाज नहीं है। मेरा हाल भी उन बच्चों की तरह था जो बाल मजदूरी में घिरे होते हैं। एक बार बचपन बचाओ आंदोलन से जुड़ने का मौका मिला, उसके सहयोग से मैं बाल मजदूरी से बाहर निकली और अपनी तरह के 84 बच्चों क ो भी मजदूरी से बाहर निकाला। मजदूरी छोड़ने के बाद परिवार के सहयोग से शिक्षा की दिशा में कदम बढ़ाया। आज गांव की दूसरी लड़कियों के परिजन उन्हें मेरी तरह आगे पढ़ने के मौके देने लगे हैं।
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गांव की पहली एमए पास बेटी
इस्माईल नेशनल पीजी कॉलेज से एमए कर चुकी जैनब अपने गांव की पहली लड़की हैं। जैनब जॉनी ब्लॉक के गांव चंदौरा की हैं। उन्होंने बताया कि गांव में चार लोग पोस्ट ग्रेजुएट हैं। इसमें तीन लड़के और चौथी मैं हूं। जै़नब के पिता ठेकेदार हैं। वह कहती हैं हमारे गांव में स्कूल नहीं है, लड़कियां आगे नहंी पढ़ सकती। मेरे साथ भी यही परेशानी थी। लेकिन मेरे पिता अब्दुल सत्तार ने मुझे पढ़ाने में साथ दिया। जैनब गांव की पहली हाईस्कूल पास लड़की है। जैनब के बाद गांव क ी दूसरी लड़कियाें को उनके परिजन स्कूल पढ़ने भेजने लगे हैं। जैनब के पिता उसे रोजाना गांव से कॉलेज लाते हैं और लेकर जाते हैं। पिछले दिनों सीएम अखिलेश यादव ने बालिका शिक्षा में जैनब की भागीदारी देखकर उसे पुरस्कृत किया। जैनब ने प्रदेश सरकार से अपने गांव में इंटर कॉलेज खोलने की मांग की थी। उसकी मांग पर सरकार ने चंदौरा गांव में इंटर कॉलेज खोलने के प्रस्ताव को स्वीकृति भी दे दी है। इंडिया प्राइड अवार्ड से सम्मानित जैनब बचपन बचाओ आंदोलन व मलाल कैम्पेन से जुड़कर गांव में बालिका शिक्षा की रोशनी जगा रही हैं।
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मैरीकॉम से मिला सम्मान
कनोहर लाल डिग्री कॉलेज में बीए की छात्रा फातिमा को शिक्षा के लिए साहस करने पर विश्व विजेता मैरीकॉम सम्मानित कर चुकी हैं। पिछले दिनों कानपुर में अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त बॉक्सर मैरीकॉम ने फातिमा को ब्रेव गर्ल अवार्ड से नवाजा है। फातिमा कहती है, बचपन से ही आगे बढ़ना और पढ़ना चाहती थी, लेकिन परिवार के हालात और गांव क ा माहौल ऐसा नहीं था कि मैं आगे पढ़ सकूं। परिवार से मैंने आगे पढ़ने की इच्छा जाहिर की तो मेरे परिवार ने इसमें सहयोग दिया। आज फातिमा कनोहर लाल कॉलेज से ग्रेजुएशन कर रही हैं। फातिमा का सपना आईएएस अधिकारी बनना है।

बेटियों ने चुना अपना नेता
बचपन में पढ़ाई छूट जाने के  कारण हुमा परवीन सदमे में चली गई थी। खेल-खेल में बच्चों ने उसे अपना नेता चुन लिया था। तभी से हुमा ने पढ़ाई की ओर कदम बढ़ा दिए थे। जॉनी कला की हुमा गांव के सरकारी इंटर कॉलेज से 9वीं की शिक्षा ले रही है। हुमा कहती है हमारे यहां लड़कियों के पढ़ने का रिवाज नहीं है। मेरे पढ़ाई भी पांचवीं कक्षा के बाद रुक गई। तब ऐसा लगा मुझसे जीने का मकसद ही छीन लिया है। फिर मुझे बचपन बचाओ आंदोलन से जुड़ने का मौका मिला और मैं आगे की पढ़ाई शुरू कर पाई। हुमा अब तक 20 से अधिक मुस्लिम बेटियों को स्कूल की राह तक ले आई है।

गांव से मिटाना है अशिक्षा का अंधकार
सिसौला कला निवासी समरीन का सपना है कि अपने गांव से अशिक्षा का अंधकार जड़ से मिटाना है। समरीन सातवीं कक्षा की छात्रा है और गांव में उसे मलाला लीडर चुना गया है। ‘ही नेम्ड मी मलाला कैम्पेन’ से जुड़ी समरीन गांव में कई मुस्लिम बालिकाओं को स्कूल पहुंचा चुकी है। समरीन कहती हैं गांवों में आज भी लड़कियों को तवज्जो नहीं दिया जाता। उन्हें पढ़ने से रोका जाता है, लेकिन मैं लोगों के इस भ्रम को तोड़ना चाहती हूं।

 
मलाला को भेजा बधाई संदेश

‘ही नेम्ड मी मलाला कैम्पेन’ में जुड़ी मेरठ की बेटियों ने अपने हाथों से चार्ट कार्ड बनाकर मलाला को जन्मदिन की बधाई भेजी है। जॉनी ब्लॉक की इन बेटियों का सपना है कि देश की हर बेटी पढ़े और आगे बढ़े।

 2013 में घोषित हुआ मलाला दिवस
12 जुलाई 2013 को मलाला दिवस की शुरुआत हुई थी। यूएन ने मलाला यूसुफजई के साहस को देखते हुए इस दिन को मलाला दिवस के रूप में मनाना तय किया था।
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