{"_id":"6872c2813b88304ded04f817","slug":"mps-celebrated-foundation-day-with-chanting-and-havan-meerut-news-c-72-1-mct1005-136899-2025-07-13","type":"story","status":"publish","title_hn":"एमपीएस ने मंत्रोच्चारण व हवन के साथ स्थापना दिवस मनाया","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
एमपीएस ने मंत्रोच्चारण व हवन के साथ स्थापना दिवस मनाया
विज्ञापन
मेरठ पब्लिक स्कूल के स्थापना दिवस पर हुआ हवन का आयोजन
मेरठ। मेरठ पब्लिक स्कूल (मेन विंग) ने शनिवार को 44वां स्थापना दिवस मनाया। इस दिन सभी ने विद्यालय की नींव रखने वाले एवं समाजसेवी ताराचंद शास्त्री को नमन किया। कार्यक्रम का शुभारंभ समर्पण सत्र से हुआ। विद्यालय की प्रबंध समिति के सभी सदस्यों का पुष्प व पटका पहनाकर स्वागत किया गया। विद्यालय की आधारशिला के प्रस्तर का वैदिक मंत्रोच्चार के साथ विधिवत पूजन किया गया।
वंदन सत्र में ताराचंद शास्त्री को श्रद्धा-सुमन अर्पित किए गए। वक्ताओं ने उनकी दृढ़ता, साहस, संस्कारों में आस्था और शिक्षा के प्रति समर्पण को याद करते हुए कहा कि शास्त्री केवल शरीर नहीं विचार थे। वे केवल संस्थापक नहीं, हमारे संस्कारों की आत्मा थे। पुष्पांजलि सत्र में श्रीमद्भगवद्गीता के श्लोकों का पाठ किया गया। स्मरण यात्रा सत्र में विद्यालय की 44 वर्षों की यात्रा को याद किया गया।
वक्ताओं ने कहा कि ताराचंद शास्त्री ने सभी को सिखाया था कि शिक्षा केवल ज्ञान नहीं, बल्कि आत्मा और आचरण की श्रेष्ठता है। उन्होंने संदेश दिया कि अनुशासन, सेवा और धैर्य से कोई भी सपना साकार किया जा सकता है। अंतिम सत्र में विद्यालय की प्रधानाचार्य डॉ. अलका श्रीवास्तव गौड़ ने संकल्प संदेश प्रस्तुत करते हुए कहा कि शास्त्री की विचारधारा ही हमारी मार्गदर्शिका है। यह विद्यालय भविष्य में भी संस्कृति, सेवा और मूल्य आधारित शिक्षा का आलोक स्तंभ बना रहेगा। कार्यक्रम का समापन प्रसाद वितरण के साथ हुआ।
विज्ञापन
विज्ञापन
वंदन सत्र में ताराचंद शास्त्री को श्रद्धा-सुमन अर्पित किए गए। वक्ताओं ने उनकी दृढ़ता, साहस, संस्कारों में आस्था और शिक्षा के प्रति समर्पण को याद करते हुए कहा कि शास्त्री केवल शरीर नहीं विचार थे। वे केवल संस्थापक नहीं, हमारे संस्कारों की आत्मा थे। पुष्पांजलि सत्र में श्रीमद्भगवद्गीता के श्लोकों का पाठ किया गया। स्मरण यात्रा सत्र में विद्यालय की 44 वर्षों की यात्रा को याद किया गया।
विज्ञापन
वक्ताओं ने कहा कि ताराचंद शास्त्री ने सभी को सिखाया था कि शिक्षा केवल ज्ञान नहीं, बल्कि आत्मा और आचरण की श्रेष्ठता है। उन्होंने संदेश दिया कि अनुशासन, सेवा और धैर्य से कोई भी सपना साकार किया जा सकता है। अंतिम सत्र में विद्यालय की प्रधानाचार्य डॉ. अलका श्रीवास्तव गौड़ ने संकल्प संदेश प्रस्तुत करते हुए कहा कि शास्त्री की विचारधारा ही हमारी मार्गदर्शिका है। यह विद्यालय भविष्य में भी संस्कृति, सेवा और मूल्य आधारित शिक्षा का आलोक स्तंभ बना रहेगा। कार्यक्रम का समापन प्रसाद वितरण के साथ हुआ।
विज्ञापन