सीसीएसयू में बंद हुई 22 विषयों में एमफिल की पढ़ाई, 51 साल पहले शुरू हुआ था कोर्स
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चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय कैंपस में 51 साल पहले शुरू हुआ एमफिल कोर्स बंद कर दिया गया है। जिन छात्र-छात्राओं ने इस वर्ष एमफिल के लिए आवेदन किया था, उनका रजिस्ट्रेशन शुल्क वापस लौटा दिया जाएगा। नई शिक्षा नीति में एमफिल कोर्स खत्म किए जाने के चलते मंगलवार को विवि में हुई बैठक में यह फैसला लिया गया है। कुलपति ने नई शिक्षा नीति लागू करने के लिए तैयारी करने को कहा है। वहीं सीसीएसयू कैंपस में इस बार एमएससी उद्यान विज्ञान कोर्स शुरू किया गया है। इसमें एडमिशन के लिए विवि की वेबसाइट पर रजिस्ट्रेशन किया जा सकता है।
नई शिक्षा नीति लागू होने से पहले ही विवि एमफिल में प्रवेश परीक्षा के लिए आवेदन मांग चुका था। 22 विषयों में 1262 छात्र-छात्राओं ने आवेदन किया। लेकिन शिक्षा नीति लागू होने के बाद कोर्स की प्रमाणकिता पर सवाल खड़े हो गए थे।
कुलपति प्रो. एनके तनेजा की अध्यक्षता में हुई विभागाध्यक्षों-डीन की ऑनलाइन बैठक में एमफिल की पढ़ाई बंद करने का फैसला लिया गया। जिन छात्रों ने आवेदन किए हैं उनका आवेदन शुल्क लौटा दिया जाएगा। इस दौरान सभी विभागों से जल्द इनटर्नल परीक्षा कराने को कहा गया। मास्टर डिग्री में स्लेब्स को अपग्रेड करने के निर्देश दिए गए हैं। ऑनर्स कोर्स में दूसरे फैक्ल्टी के प्रोग्राम का भी छात्रों को विकल्प देने को कहा गया है। कुलपति ने सभी को नैक के लिए तैयारी शुरू करने को कहा है। कुलपति ने कहा कि नई शिक्षा नीति को जल्द लागू करने के लिए तैयार रहें। कैंपस में रिसर्च को बढ़ावा दें। रिसर्च की क्वालिटी में और सुधार करें।
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देश में सबसे पहले एमफिल शुरू करने वाला विवि बना था
सीसीएसयू की स्थापना सन 1965 में हुई थी। चार साल बाद ही 1969 में सीसीएसयू ने सबसे पहले एमफिल की शुरुआत की थी। एमफिल करने के बाद आजकल छात्र-छात्राओं को पीएचडी में रजिस्ट्रेशन का मौका मिल रहा था। जो छात्र-छात्राएं इस साल एमफिल कर रहे हैं, उनका भी पूरा रिजल्ट कुलपति ने नवंबर तक जारी करने को कहा है।
ये रहे शामिल
इस दौरान प्रति कुलपति प्रो. वाई विमला, कुलसचिव धीरेंद्र कुमार वर्मा, चीफ प्रॉक्टर प्रो. वीरपाल सिंह, छात्र कल्याण अधिष्ठाता प्रो. भूपेंद्र सिंह, प्रो. हरे कृष्णा, प्रो. नवीन चंद्र लोहानी, प्रो. दिनेश चंद्र, प्रो. एवी कौर, प्रो. मृदुल गुप्ता, प्रो. एसएस गौरव, प्रो. जितेंद्र ढाका, प्रो. योगेंद्र सिंह, प्रो. असलम जमशेदपुरी, प्रो. नीलू जैन, डॉ. राजीव सिजेरिया, प्रो. शैलेंद्र शर्मा, डॉ. मनोज कुमार श्रीवास्तव, डॉ. विवेक त्यागी, डॉ. श्रद्धापाल और प्रेस प्रवक्ता मितेंद्र कुमार गुप्ता मौजूद रहे।
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