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कोरोना पीड़ितों के अंतिम संस्कार में अवैध वसूली मार
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कोरोना पीड़ितों के अंतिम संस्कार में अवैध वसूली की मार
मेरठ। शहर में एक तरफ कोरोना संक्रमण लगातार बढ़ रहा है वहीं महामारी की चपेट से मरने वालों के प्रति संवेदना और सहानुभूति के बजाय उनके अंतिम संस्कार में अवैध वसूली शुरू हो गई है। सूरजकुंड स्थित श्मशान पर मानवता को तार-तार कर मनमानी वसूली यहां के आचार्य कर रहे हैं।
विश्व एंक्लेव निवासी एक व्यक्ति और उनके दोनों बच्चे संक्रमित हैं। बुधवार को उनकी पत्नी का निधन हो गया। विपरीत परिस्थितियों में स्थानीय लोग शव के अंतिम संस्कार के लिए सूरजकुंड ले गए। यहां के आचार्यों ने अंतिम क्रिया कराने के लिए सीधे तौर पर 15 हजार रुपये की मांगे। इसे ज्यादा बताने पर आचार्य उखड़ गए। जैसे-तैसे 12 हजार रुपये लेने के बाद ही उन्होंने अंतिम संस्कार कराया। यह तो सिर्फ एक उदाहरण है। आचार्यों की ज्यादती के ऐसे मामले रोजाना सामने आ रहे हैं। जिम्मेदारों से इसकी शिकायत भी की जा रही है लेकिन लोगों को राहत नहीं मिल पा रही है।
श्मशान में प्रतिदिन 10 से 15 शव अंतिम संस्कार के लिए आते हैं। जानकारों के मुताबिक अंतिम संस्कार में अमूमन चार क्विंटल लकड़ी, चादर, चंदन की लकड़ी सहित अन्य सामान मिलाकर करीब चार हजार रुपये का खर्च आता है। बावजूद इसके आचार्य मुंहमांगे पैसे ले रहे हैं। कोरोना के कारण मृत्यु होने के बाद अस्पताल से श्मशान एक या दो रिश्तेदार ही पहुंचते हैं। पिछले कुछ दिन से हालात इतने खराब हो गए हैं कि मनमाने पैसे देने में असमर्थता जताने पर अंतिम संस्कार से इनकार तक किया जा रहा है। बुधवार को सूरजकुंड पहुंचे देवेंद्र कुमार और अंकित ने बताया कि एक आचार्य ने अंतिम संस्कार कराने के लिए सात हजार रुपये की मांग की। पैसा न देने पर संस्कार करने से इनकार कर दिया गया।
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एक हजार रुपये से ज्यादा नहीं लेने चाहिए
इस बाबत कैंट विधायक सत्य प्रकाश अग्रवाल सहित प्रशासन के अधिकारियों को अवगत कराया गया है। आचार्यों को क्रिया पूर्ण करने के लिए 500 से हजार रुपये तक लेने चाहिए।
- दिनेश जैन, महामंत्री, गंगा मोटर कमेटी
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आज डीएम से मिलकर करेंगे शिकायत
सूरजकुंड में आचार्यों की मनमानी वसूली के खिलाफ जिला प्रशासन से शिकायत की गई है। बृहस्पतिवार को जिलाधिकारी से मिलकर उन्हें समस्या से अवगत कराया जाएगा।
- दुष्यंत रोहटा, समाजसेवी
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मेरठ। शहर में एक तरफ कोरोना संक्रमण लगातार बढ़ रहा है वहीं महामारी की चपेट से मरने वालों के प्रति संवेदना और सहानुभूति के बजाय उनके अंतिम संस्कार में अवैध वसूली शुरू हो गई है। सूरजकुंड स्थित श्मशान पर मानवता को तार-तार कर मनमानी वसूली यहां के आचार्य कर रहे हैं।
विश्व एंक्लेव निवासी एक व्यक्ति और उनके दोनों बच्चे संक्रमित हैं। बुधवार को उनकी पत्नी का निधन हो गया। विपरीत परिस्थितियों में स्थानीय लोग शव के अंतिम संस्कार के लिए सूरजकुंड ले गए। यहां के आचार्यों ने अंतिम क्रिया कराने के लिए सीधे तौर पर 15 हजार रुपये की मांगे। इसे ज्यादा बताने पर आचार्य उखड़ गए। जैसे-तैसे 12 हजार रुपये लेने के बाद ही उन्होंने अंतिम संस्कार कराया। यह तो सिर्फ एक उदाहरण है। आचार्यों की ज्यादती के ऐसे मामले रोजाना सामने आ रहे हैं। जिम्मेदारों से इसकी शिकायत भी की जा रही है लेकिन लोगों को राहत नहीं मिल पा रही है।
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श्मशान में प्रतिदिन 10 से 15 शव अंतिम संस्कार के लिए आते हैं। जानकारों के मुताबिक अंतिम संस्कार में अमूमन चार क्विंटल लकड़ी, चादर, चंदन की लकड़ी सहित अन्य सामान मिलाकर करीब चार हजार रुपये का खर्च आता है। बावजूद इसके आचार्य मुंहमांगे पैसे ले रहे हैं। कोरोना के कारण मृत्यु होने के बाद अस्पताल से श्मशान एक या दो रिश्तेदार ही पहुंचते हैं। पिछले कुछ दिन से हालात इतने खराब हो गए हैं कि मनमाने पैसे देने में असमर्थता जताने पर अंतिम संस्कार से इनकार तक किया जा रहा है। बुधवार को सूरजकुंड पहुंचे देवेंद्र कुमार और अंकित ने बताया कि एक आचार्य ने अंतिम संस्कार कराने के लिए सात हजार रुपये की मांग की। पैसा न देने पर संस्कार करने से इनकार कर दिया गया।
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एक हजार रुपये से ज्यादा नहीं लेने चाहिए
इस बाबत कैंट विधायक सत्य प्रकाश अग्रवाल सहित प्रशासन के अधिकारियों को अवगत कराया गया है। आचार्यों को क्रिया पूर्ण करने के लिए 500 से हजार रुपये तक लेने चाहिए।
- दिनेश जैन, महामंत्री, गंगा मोटर कमेटी
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आज डीएम से मिलकर करेंगे शिकायत
सूरजकुंड में आचार्यों की मनमानी वसूली के खिलाफ जिला प्रशासन से शिकायत की गई है। बृहस्पतिवार को जिलाधिकारी से मिलकर उन्हें समस्या से अवगत कराया जाएगा।
- दुष्यंत रोहटा, समाजसेवी