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मुजफ्फरनगर हादसाः रेल राज्यमंत्री को किया गुमराह, नहीं दिखाया टूटा ट्रैक

Mon, 21 Aug 2017 09:28 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, मेरठ
अमर उजाला ब्यूरो, मेरठ Updated Mon, 21 Aug 2017 09:28 PM IST
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MoS railway manoj sinha misinformed in muzzafarnagar train accident meerut
मनोज सिन्हा, रेल राज्यमंत्री
खतौली में ट्रेन हादसे के बाद जहां रात में मौके पर पहुंचे रेल राज्यमंत्री मनोज सिन्हा ने हादसे की उच्चस्तरीय जांच के निर्देश दिए। वहीं, रेलवे के अफसर पूरे मामले को दबाने में लगे रहे। यहां तक कि रेल राज्यमंत्री और अन्य नेताओं को भी अफसरों ने गुमराह किया। उस टूटी हुई पटरी को नहीं दिखाया, जिसका कारण इस बड़े और गंभीर हादसे को माना जा रहा है।
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उत्कल ट्रेन हादसे के बाद डीजी रेलवे सुधीर कुमार (प्रभारी डीजी एनएसजी), एडीजी मेरठ जोन प्रशांत कुमार, मंडलायुक्त मेरठ डॉ. प्रभात कुमार, आईजी रेलवे विनोद कुमार, डीआईजी सहारनपुर, डीएम मुजफ्फरनगर, एसएसपी मुजफ्फरनगर और एसपी रेलवे केशव कुमार मौके पर पहुंचे। रेल राज्यमंत्री मनोज सिन्हा और केंद्रीय राज्यमंत्री संजीव बालियान ने मौके पर पहुंचकर रेलवे, पुलिस और प्रशासनिक अफसरों से इस हादसे के बारे में जानकारी ली।
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लेकिन तमाम अफसर पूरे मामले में चुप्पी साधे रहे। मौके पर करीब तीन-चार हजार लोगों की भीड़ जमा थी। ऐसे में पुलिस फोर्स भीड़ को हटाकर नेताओं की सुरक्षा में लगी रही। रेल राज्यमंत्री ने इस दौरान मीडिया से कहा कि पूरे मामले में उच्चस्तरीय जांच के निर्देश दे दिए गए हैं, जो भी दोषी होगा उसे बख्शा नहीं जाएगा।
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सर, यह लापरवाही तो अपनी ही है।

मंत्री ने पूछा तो चुप्पी साध गए अफसर

MoS railway manoj sinha misinformed in muzzafarnagar train accident meerut
टूटा हुआ ट्रैक

रेल राज्यमंत्री के जाने के बाद फिर से पुलिस, प्रशासनिक और रेलवे के अधिकारी आपस में गुपचुप बात करने लगे। रेलवे के एक अधिकारी ने पुलिस और प्रशासन के अफसरों से कहा कि जांच तो चल रही है। लेकिन यह लापरवाही तो अपनी ही है। जिस स्थान पर पटरी टूटी थी, वहां हमारे कर्मचारी उसका टुकड़ा जोड़ रहे थे। तभी अचानक तेज रफ्तार से ट्रेन आ गई। टूटी हुई पटरी के कारण तेज रफ्तार ट्रेन के बाद ही हादसा हुआ है। यदि ट्रेन की स्पीड कम होती तो यह हादसा नहीं होता। तमाम अधिकारी आपस में अपनी ही कमियों को छुपाते रहे।

रेल राज्यमंत्री मनोज सिन्हा को अफसरों ने इस कदर गुमराह किया कि केवल क्षतिग्रस्त ट्रेन की बोगी ही दिखाई। मनोज सिन्हा ने सभी अफसरों से मुखातिब होकर पूछा कि क्या ट्रैक पर मरम्मत का काम चल रहा था? तो अफसर चुप्पी साध गए।

दरअसल रेल राज्यमंत्री खुद ही घटनास्थल का बारीकी से मुआयना करने की तैयारी से आए थे। इस दौरान वे टूटे हुए ट्रैक की तरफ जाने लगे तो अफसरों ने बहाना बनाते हुए कहा कि साहब, यहां भीड़ ज्यादा है। लाइन के पास दलदल है। जिसके बाद अपने विभाग के राज्यमंत्री को गुमराह करते हुए रेलवे अधिकारियों ने टूटे हुए ट्रैक वाले प्वाइंट पर नहीं जाने दिया, जहां पटरी जोड़ने के औजार भी रखे हुए थे।

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