फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Meerut News ›   more than hundred people of Meerut were sent to jail during emergency in 1975

आपातकाल में मेरठ के 147 लोगों को भेजा गया था जेल, झेली थीं यातनाएं, पैरों के नाखून तक उखाड़ दिए

Tue, 25 Jun 2019 11:10 AM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Published by: Dimple Sirohi Updated Tue, 25 Jun 2019 11:10 AM IST
विज्ञापन
more than hundred people of Meerut were sent to jail during emergency in 1975
emergency 1975 - फोटो : अमर उजाला
इतिहास में 25 जून 1975 का दिन लोकतंत्र सेनानियों के नाम है, जिन्होंने देश में लोकतंत्र को बचाए रखने के लिए आपातकाल में यातनाएं झेलीं। पुलिस ने मेरठ के 147 लोगों को जेल भेजा था। इमरजेंसी के दौरान पुलिस ने थाने के बाद जेल में भी यातनाएं दी थीं।  
विज्ञापन


घर की हो गई थी कुर्की : अरुण वशिष्ठ
मीसा बंदी अरुण वशिष्ठ ने बताया कि वह इमरजेंसी के दौरान मेरठ कॉलेज छात्र संघ में महामंत्री थे। उन पर सिविल लाइंस, लालकुर्ती सहित तीन थानों में मुकदमे दर्ज किए गए। इसके बाद भी वह सक्रिय रहे, लेकिन बाद में उन्होंने सरेंडर कर दिया। इस बीच उनके घर की कुर्की तक हो गई थी। अरुण वशिष्ठ पांच माह जेल में रहे। इसके बाद रिहा हो गए।
विज्ञापन

आरएसएस के आह्वान पर अरुण वशिष्ठ सत्याग्रह में शामिल हुए और उन पर मीसा लगाई गई। 27 जनवरी 1976 से 8 मार्च 1977 तक फिर जेल में बंद रहे। रिहाई के बाद हजारों छात्र मेरठ कॉलेज पहुंचे और शहर में जुलूस निकाला गया। अरुण वशिष्ठ ने बताया कि चुनाव की घोषणा पहले हुई और इमरजेंसी बाद में हटाई गई।  

प्रदीप कंसल को तब लोग कहते थे भगत सिंह
इमरजेंसी के दौरान 21 वर्ष के रहे शास्त्रीनगर निवासी प्रदीप कंसल को तब भगत सिंह कहा जाता था। वह एबीवीपी से जुड़े थे। मेरठ कॉलेज के इस छात्र नेता ने कपड़ों में छिपाकर रखे पटाखे फोड़कर लोगों का ध्यान अपनी तरफ आकर्षित किया था।
 

more than hundred people of Meerut were sent to jail during emergency in 1975
जब इमरजेंसी खत्म होने के बाद जेल से आए थे बाहर... अरुण वशिष्ठ, प्रदीप कंसल, रविंद्र नादर। (दाएं से), तीनों के गले में माला। - फोटो : अमर उजाला
इमरजेंसी के करीब छह माह बाद गिरफ्तार हुए प्रदीप ने बताया कि जो यातनाएं उन्हें जेल में मिलीं, वे आज तक नहीं भूल पाए हैं। पुलिस ने जब प्रदीप कंसल को गिरफ्तार किया, तब सैकड़ों छात्र एकत्रित हो गए। छात्रों ने प्रदीप को छुड़ाते हुए अहिंसात्मक नारे लगाए। हालांकि भारी पुलिस की मौजूदगी में प्रदीप को गिरफ्तार कर लिया गया।

पैरों के नाखून तक उखाड़ दिए
प्रदीप कंसल के पैरों के नाखून तक प्लास से उखाड़ दिए थे। जेल की खाली बैरक में उन्हें डाल दिया गया। 15-20 दिन तक किसी से नहीं मिलने दिया। प्रदीप ने बताया कि उस समय जेल में बंद ठाकुर नरेंद्र सिंह ने अन्य बंदियों के साथ मिलकर उन्हें बाकी बंदियों के पास पहुंचाया। इस बीच जेल तोड़ने की भी बात हुई। हालांकि बाद में प्रदीप को मीसा बंदियों के साथ ही रखा गया। इसके अलावा रविंद्र नादर भी इमरजेंसी के दौरान जेल में रहे थे।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed