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राजमार्ग के नक्शे में खामियों ने बिगाड़ दिया एनएचएआई का खेल
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राष्ट्रीय राज मार्ग पर चलता निर्माण कार्य।
- फोटो : KITHOR
खरखौदा। राष्ट्रीय राजमार्ग 235 के निर्माण में निजी कंपनी द्वारा तैयार किए गए नक्शे ने एनएचएआई का सारा खेल बिगाड़ दिया है। इसमें कई मार्गों पर न तो यूटर्न और न कट ही दिया गया। वहीं, मानचित्र के हिसाब से कई जगह पर जमीन का अधिग्रहण भी कम पड़ गया। जहां अंडरपास की आवश्यकता थी वहां नहीं दिया। उधर, खेतों को जाने वाले रास्ते पर अंडरपास दे दिया। जिस कारण आए दिन क्षेत्र के ग्रामीणों को आंदोलन करने पड़ रहे हैं।
एनएचएआई ने राष्ट्रीय राजमार्ग 235 के निर्माण से पहले एक निजी कंपनी से नक्शा बनवाया। इसमें कई गंभीर खामियां रह गईं। राजमार्ग निर्माण आगे बढ़ने के साथ लोगों को परेशानियों से जूझना पड़ रहा है। मेरठ से बुलंदशहर तक 61.19 किलोमीटर लंबे राजमार्ग स्थित फफूंडा बाईपास पर सबसे पहले एनएचएआई ने प्रधानमंत्री सड़क ग्राम योजना के तहत 16 गांवों को जोड़ती हुई सड़क पर क्षेत्र के लोगों ने अंडरपास की मांग की। जिसके लिए फफूंडा निवासी जिला पंचायत सदस्य कुसुम प्रधान ने आत्मदाह के प्रयास के साथ कई दिनों तक धरना-प्रदर्शन भी किया। वहीं, उसी बाईपास पर करीब 100 मीटर आगे जंगल को जाने वाले रास्ते पर अंडरपास दे दिया। फफूंडा बाईपास पर ऐसे कई किसानों की जमीन अधिग्रहण कर ली जिस जमीन की आवश्यकता ही नहीं थी। जिस जमीन की जरूरत थी उसका अधिग्रहण किया ही नहीं गया। वहीं, गांव लालपुर के सामने यू टर्न को लेकर लालपुर निवासी सपा नेता ओमपाल गुर्जर के नेतृत्व में ग्रामीणों ने निर्माण कंपनी प्लांट के गेट पर कब्जा करके धरना-प्रदर्शन किया। इसके बाद ही एनएचएआई ने यूटर्न दिया। इसके बाद कैली बाईपास पर गांव कबट्टा समेत कई अन्य गांवों को जाने वाले रास्ते पर क्षेत्र के लोगों ने दस तक दिन-रात धरना दिया। इसके बाद यू टर्न मिल सका। अब खरखौदा बाईपास पर मड़ैया तथा अन्य गांवों को जाने वाले रास्ते पर भी ग्रामीण यू टर्न एवं कट की मांग उठने लगी है। वहीं, हापुड़ के गांव धनौरा में न तो अंडरपास दिया और न ही सर्विस रोड बनाई गई। अब यहां के ग्रामीण भी उग्र रुख अख्तियार कर रहे हैं। उधर, गुलावठी बाईपास के लिए कम जमीन का अधिग्रहण किया गया। निर्माण के दौरान जमीन की जरूरत हुई तो किसानों ने देने से इनकार कर दिया। एनएचएआई को मजबूर होकर उन किसानों की जमीन खरीदने के लिए 2019 के सर्किल रेट की प्रक्रिया पूरी करनी पड़ी।
एनएचएआई ने नहीं कराया सर्वे
एनएचएआई ने किसी प्राइवेट कंपनी से राष्ट्रीय राजमार्ग का नक्शा तैयार कराया है। कंपनी ने नक्शा केवल राजस्व विभाग के रिकॉर्ड के आधार पर ही तैयार कर दिया। ग्रामीणों का आरोप है कि उक्त कंपनी के कर्मचारियों ने मौके पर जाकर स्थिति को जानने एवं समझने की कोशिश नहीं की। फफूंडा एवं बिजौली की सीमा आई तो मौके पर कुछ और नक्शे में कुछ अन्य मिला। वहीं, गुलावठी में भी हापुड़ एवं बुलंदशहर जिले की सीमा पर मामला बिगड़ा। वहां भी नक्शे के हिसाब से जमीन कम मिली। यदि कंपनी के कर्मचारी नक्शा मौके पर जाकर बनाते तथा भौगोलिक स्थिति की जांच करते तो अंडरपास, यूटर्न एवं सर्विस रोड के लिए आंदोलन नहीं करना पड़ता।
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28 अक्तूबर 2019 को पूरा होना था प्रोजेक्ट
यदि भौगोलिक स्थिति का परीक्षण करने के बाद नक्शा बनाया जाता तो प्रोजेक्ट 28 अक्तूबर 2019 को पूरा हो जाना चाहिए था। समय-समय पर होने वाले बदलावों एवं गुलावठी में जमीन के अधिग्रहण के कारण अभी कोई समय निश्चित नहीं है।
प्रत्येक गांव में कट, यूटर्न व अंडरपास की मांग तो लोग करते ही हैं। नियमानुसार दो किलोमीटर से पहले राजमार्ग पर कट नहीं होता। भौगोलिक स्थिति देखकर ही कट दिया जा सकता है। वहीं, कपंनी ने जो ड्राइंग तैयार की थी उसके हिसाब से मौके पर कई हकीकत उलट मिली। इससे मामला बिगड़ा है।-डीके चतुर्वेदी, परियोजना निदेशक, एनएचएआई।
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एनएचएआई ने राष्ट्रीय राजमार्ग 235 के निर्माण से पहले एक निजी कंपनी से नक्शा बनवाया। इसमें कई गंभीर खामियां रह गईं। राजमार्ग निर्माण आगे बढ़ने के साथ लोगों को परेशानियों से जूझना पड़ रहा है। मेरठ से बुलंदशहर तक 61.19 किलोमीटर लंबे राजमार्ग स्थित फफूंडा बाईपास पर सबसे पहले एनएचएआई ने प्रधानमंत्री सड़क ग्राम योजना के तहत 16 गांवों को जोड़ती हुई सड़क पर क्षेत्र के लोगों ने अंडरपास की मांग की। जिसके लिए फफूंडा निवासी जिला पंचायत सदस्य कुसुम प्रधान ने आत्मदाह के प्रयास के साथ कई दिनों तक धरना-प्रदर्शन भी किया। वहीं, उसी बाईपास पर करीब 100 मीटर आगे जंगल को जाने वाले रास्ते पर अंडरपास दे दिया। फफूंडा बाईपास पर ऐसे कई किसानों की जमीन अधिग्रहण कर ली जिस जमीन की आवश्यकता ही नहीं थी। जिस जमीन की जरूरत थी उसका अधिग्रहण किया ही नहीं गया। वहीं, गांव लालपुर के सामने यू टर्न को लेकर लालपुर निवासी सपा नेता ओमपाल गुर्जर के नेतृत्व में ग्रामीणों ने निर्माण कंपनी प्लांट के गेट पर कब्जा करके धरना-प्रदर्शन किया। इसके बाद ही एनएचएआई ने यूटर्न दिया। इसके बाद कैली बाईपास पर गांव कबट्टा समेत कई अन्य गांवों को जाने वाले रास्ते पर क्षेत्र के लोगों ने दस तक दिन-रात धरना दिया। इसके बाद यू टर्न मिल सका। अब खरखौदा बाईपास पर मड़ैया तथा अन्य गांवों को जाने वाले रास्ते पर भी ग्रामीण यू टर्न एवं कट की मांग उठने लगी है। वहीं, हापुड़ के गांव धनौरा में न तो अंडरपास दिया और न ही सर्विस रोड बनाई गई। अब यहां के ग्रामीण भी उग्र रुख अख्तियार कर रहे हैं। उधर, गुलावठी बाईपास के लिए कम जमीन का अधिग्रहण किया गया। निर्माण के दौरान जमीन की जरूरत हुई तो किसानों ने देने से इनकार कर दिया। एनएचएआई को मजबूर होकर उन किसानों की जमीन खरीदने के लिए 2019 के सर्किल रेट की प्रक्रिया पूरी करनी पड़ी।
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एनएचएआई ने नहीं कराया सर्वे
एनएचएआई ने किसी प्राइवेट कंपनी से राष्ट्रीय राजमार्ग का नक्शा तैयार कराया है। कंपनी ने नक्शा केवल राजस्व विभाग के रिकॉर्ड के आधार पर ही तैयार कर दिया। ग्रामीणों का आरोप है कि उक्त कंपनी के कर्मचारियों ने मौके पर जाकर स्थिति को जानने एवं समझने की कोशिश नहीं की। फफूंडा एवं बिजौली की सीमा आई तो मौके पर कुछ और नक्शे में कुछ अन्य मिला। वहीं, गुलावठी में भी हापुड़ एवं बुलंदशहर जिले की सीमा पर मामला बिगड़ा। वहां भी नक्शे के हिसाब से जमीन कम मिली। यदि कंपनी के कर्मचारी नक्शा मौके पर जाकर बनाते तथा भौगोलिक स्थिति की जांच करते तो अंडरपास, यूटर्न एवं सर्विस रोड के लिए आंदोलन नहीं करना पड़ता।
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28 अक्तूबर 2019 को पूरा होना था प्रोजेक्ट
यदि भौगोलिक स्थिति का परीक्षण करने के बाद नक्शा बनाया जाता तो प्रोजेक्ट 28 अक्तूबर 2019 को पूरा हो जाना चाहिए था। समय-समय पर होने वाले बदलावों एवं गुलावठी में जमीन के अधिग्रहण के कारण अभी कोई समय निश्चित नहीं है।
प्रत्येक गांव में कट, यूटर्न व अंडरपास की मांग तो लोग करते ही हैं। नियमानुसार दो किलोमीटर से पहले राजमार्ग पर कट नहीं होता। भौगोलिक स्थिति देखकर ही कट दिया जा सकता है। वहीं, कपंनी ने जो ड्राइंग तैयार की थी उसके हिसाब से मौके पर कई हकीकत उलट मिली। इससे मामला बिगड़ा है।-डीके चतुर्वेदी, परियोजना निदेशक, एनएचएआई।