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मिड-डे मील के किचन में घोटाला
अमर उजाला ब्यूरो/मेरठ
Updated Sat, 30 Apr 2016 02:09 AM IST
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mid day meal
- फोटो : amar ujala
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चार साल पहले बेसिक शिक्षा विभाग
भोजन प्राधिकरण लखनऊ को एक प्रस्ताव बनाकर भेजा, जिसमें 12 सहायता प्राप्त विद्यालयों के अंदर किचन बनाने की डिमांड की गई। प्राधिकरण ने प्रस्ताव को स्वीकृत करते हुए प्रत्येक विद्यालय को 78,500 रुपये के हिसाब से कुल 9.42 लाख रुपये की धनराशि जारी कर दी गई।
इसके बाद बीएसए कार्यालय ने सभी विद्यालयों को चेक के माध्यम से पैसा जारी कर दिया। स्कूलों ने एकाउंट से पैसे निकाल भी लिए, लेकिन अभी तक किचन का अता-पता नहीं है।
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पत्रों के जवाब तक नहीं दिए
पैसा 2011-12 बजट से जारी किया गया
21 सितंबर 2012 को तत्कालीन एडी बेसिक डॉ. अशोक कुमार सिंह ने बीएसए को पत्र लिखकर धनराशि और खर्च का ब्योरा मांगा। लेकिन जवाब नहीं दिया गया। 2 नवंबर 2012 को संतोष कुमार अपर निदेशक मध्यान्ह भोजन प्राधिकरण ने बीएसए को पत्र लिखा और कहा कि एक सप्ताह के अंदर अपना स्पष्टीकरण दें, लेकिन उसके बाद भी मामले को दबा लिया गया। प्राधिकरण के सख्त होने पर एडी डॉ. अशोक कुमार सिंह ने 16 व 19 मार्च 2013 को फिर से बीएसए को रिमाइंड दिया।
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लेकिन जवाब नहीं दिया गया। 12 जून 2015 को तत्कालीन एडी विनय कुमार गिल ने बीएसए को पत्र लिखकर पूरी जानकारी मांगी। उसके बाद तत्कालीन बीएसए जीवेंद्र सिंह ऐरी ने जिला समन्वयक करन माथुर और जिला समन्वयक निर्माण हरेंद्र शर्मा को पत्र लिखकर ब्योरा देने को कहा।
इसकी कॉपी डीएम, सीडीओ से लेकर एडी बेसिक तक को भेजी गई, लेकिन आज तक पैसे की जानकारी नहीं है।