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मेट्रो की राह में परिवहन निगम का अड़ंगा
अमर उजाला ब्यूरों
Updated Tue, 06 Sep 2016 02:43 AM IST
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फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
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एयरपोर्ट छिन गया। आउटर रिंग रोड पर एमडीए ने हाथ खड़े कर दिए। इनर रिंग रोड और एक्सप्रेसवे पर जमीन अधिग्रहण के अड़ंगे हैं। रैपिड ट्रेन अभी ट्रैक पर नहीं आ पाई है। इन गतिरोधों के बीच ट्रैक पर आती मेट्रो की राह में भी बड़ा अड़ंगा खड़ा हो गया है। मेट्रो स्टेशन के लिए जिस भैसाली बस अड्डे को शहर से बाहर का रास्ता दिखाना था, वहां परिवहन निगम ने री-कंस्ट्रक्शन की तैयारी कर ली है। इसके लिए 5.50 करोड़ रुपये मंजूर भी हो चुके हैं। ये सभी प्रस्ताव शहर की सूरत बदल सकते हैं।
लेकिन, अफसरों के अड़ियल रवैये के बीच मेरठ के साथ एक बार फिर धोखे की पटकथा तैयार कर दी गई है।दरअसल, बढ़ती आबादी और वाहनों की संख्या के चलते भैसाली और सोहराब गेट बस अड्डों को लंबे समय से शहर से बाहर करने की कवायद चल रही है। एमडीए की महायोजना में भी बस अड्डों को शिफ्ट करने की बात कही गई है। चूंकि भैसाली बस अड्डा शहर के बीचों बीच है तो इसे बाहर करने के लिए कई बार कवायद हो चुकी है। इस बाबत एमडीए ने दिल्ली रोड पर संजय वन के पास जगह भी तय की है। इसके अलावा अन्य विकल्प भी रखे हैं।
मेट्रो का अहम स्टेशन है
प्रदेश सरकार के ड्रीम प्रोजेक्ट मेट्रो ट्रेन पर शहर में काम हो रहा है। इसकी डीपीआर यहां से मंजूर होकर शासन में भेजी जा चुकी है। वहां मुख्य सचिव भी इसे हरी झंडी देकर कैबिनेट के पास भेज चुके हैं। भैसाली मेट्रो ट्रेन का महत्वपूर्ण स्टेशन है। इसके लिए जगह चाहिए तो राइट्स कंपनी ने डीपीआर में यही प्रस्तावित किया है कि भैसाली बस अड्डे की जगह का इस्तेमाल मेट्रो के लिए किया जाएगा।
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कुल 1730 वर्ग मीटर जमीन की आवश्यकता यहां दिखाते हुए इतनी ही जमीन को भैसाली बस अड्डे से लेने की बात डीपीआर में कही गई है। यहां मेट्रो का अंडरग्राउंड एलाइनमेंट है। स्टेशन अंडरग्राउंड बनेगा। लेकिन पार्किंग, एंट्री, एग्जिट के लिए जगह चाहिए और यह सब बस अड्डे से मिलेगा। यहां चूंकि अब अड्डों को बाहर करने की प्रक्रिया चल रही है तो डीपीआर में इसका उल्लेख है। मंडलायुक्त इस प्रकरण में कमेटी गठित कर चुके हैं। बार-बार कह चुके हैं कि बस अड्डे को शहर से बाहर ले जाया जाए।
परिवहन अफसरों को नहीं कोई सरोकार
मेट्रो चले न चले, इससे यूपी परिवहन निगम को कोई सरोकार नहीं है। अलबत्ता निगम ने भैसाली अड्डे को दोबारा से बनाने की तैयारी शुरू कर दी है। 5.50 करोड़ के एस्टीमेट को हरी झंडी मिल चुकी है। बस अड्डे की जर्जर बिल्डिंग तोड़कर उस पर नया निर्माण होना है, इसी माह टेंडर की तैयारी है। बिल्डिंग में चल रहे एआरएम मेरठ के आफिस को अस्थायी रूप से सेंट्रल वर्कशॉप में शिफ्ट करने की तैयारी है।
यह नहीं देखा जा रहा है कि यहां मेट्रो स्टेशन का प्रस्ताव है। आला अधिकारियों की बात को भी ठेंगा दिखाया जा रहा है। न ही शहर की ट्रैफिक व्यवस्था को सुदृढ करने की कोई कवायद की जा रही है। अगर जर्जर बिल्डिंग तोड़कर नई बिल्डिंग बना दी गई और मेट्रो स्टेशन के लिए अड्डे को फिर शहर से बाहर जाना पड़ा तो इस पर किया गया भारी भरकम खर्च व्यर्थ ही जाएगा।
नीचे बस अड्डा, ऊपर बनेगा आफिस
रोडवेज अफसरों के अनुसार भैसाली बस अड्डे पर बनने वाली नई बिल्डिंग बस अड्डों के आधुनिक मानकों पर आधारित होगी। बिल्डिंग को पिलर पर बनाया जाएगा। ग्राउंड फ्लोर से बसें संचालित होंगी और पहली व दूसरी मंजिल पर मेरठ व भैसाली डिपो के ऑफिस होंगे।
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लेकिन, अफसरों के अड़ियल रवैये के बीच मेरठ के साथ एक बार फिर धोखे की पटकथा तैयार कर दी गई है।दरअसल, बढ़ती आबादी और वाहनों की संख्या के चलते भैसाली और सोहराब गेट बस अड्डों को लंबे समय से शहर से बाहर करने की कवायद चल रही है। एमडीए की महायोजना में भी बस अड्डों को शिफ्ट करने की बात कही गई है। चूंकि भैसाली बस अड्डा शहर के बीचों बीच है तो इसे बाहर करने के लिए कई बार कवायद हो चुकी है। इस बाबत एमडीए ने दिल्ली रोड पर संजय वन के पास जगह भी तय की है। इसके अलावा अन्य विकल्प भी रखे हैं।
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मेट्रो का अहम स्टेशन है
प्रदेश सरकार के ड्रीम प्रोजेक्ट मेट्रो ट्रेन पर शहर में काम हो रहा है। इसकी डीपीआर यहां से मंजूर होकर शासन में भेजी जा चुकी है। वहां मुख्य सचिव भी इसे हरी झंडी देकर कैबिनेट के पास भेज चुके हैं। भैसाली मेट्रो ट्रेन का महत्वपूर्ण स्टेशन है। इसके लिए जगह चाहिए तो राइट्स कंपनी ने डीपीआर में यही प्रस्तावित किया है कि भैसाली बस अड्डे की जगह का इस्तेमाल मेट्रो के लिए किया जाएगा।
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कुल 1730 वर्ग मीटर जमीन की आवश्यकता यहां दिखाते हुए इतनी ही जमीन को भैसाली बस अड्डे से लेने की बात डीपीआर में कही गई है। यहां मेट्रो का अंडरग्राउंड एलाइनमेंट है। स्टेशन अंडरग्राउंड बनेगा। लेकिन पार्किंग, एंट्री, एग्जिट के लिए जगह चाहिए और यह सब बस अड्डे से मिलेगा। यहां चूंकि अब अड्डों को बाहर करने की प्रक्रिया चल रही है तो डीपीआर में इसका उल्लेख है। मंडलायुक्त इस प्रकरण में कमेटी गठित कर चुके हैं। बार-बार कह चुके हैं कि बस अड्डे को शहर से बाहर ले जाया जाए।
परिवहन अफसरों को नहीं कोई सरोकार
मेट्रो चले न चले, इससे यूपी परिवहन निगम को कोई सरोकार नहीं है। अलबत्ता निगम ने भैसाली अड्डे को दोबारा से बनाने की तैयारी शुरू कर दी है। 5.50 करोड़ के एस्टीमेट को हरी झंडी मिल चुकी है। बस अड्डे की जर्जर बिल्डिंग तोड़कर उस पर नया निर्माण होना है, इसी माह टेंडर की तैयारी है। बिल्डिंग में चल रहे एआरएम मेरठ के आफिस को अस्थायी रूप से सेंट्रल वर्कशॉप में शिफ्ट करने की तैयारी है।
यह नहीं देखा जा रहा है कि यहां मेट्रो स्टेशन का प्रस्ताव है। आला अधिकारियों की बात को भी ठेंगा दिखाया जा रहा है। न ही शहर की ट्रैफिक व्यवस्था को सुदृढ करने की कोई कवायद की जा रही है। अगर जर्जर बिल्डिंग तोड़कर नई बिल्डिंग बना दी गई और मेट्रो स्टेशन के लिए अड्डे को फिर शहर से बाहर जाना पड़ा तो इस पर किया गया भारी भरकम खर्च व्यर्थ ही जाएगा।
नीचे बस अड्डा, ऊपर बनेगा आफिस
रोडवेज अफसरों के अनुसार भैसाली बस अड्डे पर बनने वाली नई बिल्डिंग बस अड्डों के आधुनिक मानकों पर आधारित होगी। बिल्डिंग को पिलर पर बनाया जाएगा। ग्राउंड फ्लोर से बसें संचालित होंगी और पहली व दूसरी मंजिल पर मेरठ व भैसाली डिपो के ऑफिस होंगे।