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दुश्मन को खदेड़ा और लहराया था तिंरगा

Wed, 21 Sep 2016 09:30 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, मेरठ
ब्यूरो/अमर उजाला, मेरठ Updated Wed, 21 Sep 2016 09:30 PM IST
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mejar ranveer in 1965 indo pak war
19 पंजाब बटालियन 1965 भारत-पाक युद्ध की स्वर्ण जयंती मना रही है। युद्ध के शहीदों की याद में कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। शुक्रवार को रणबीर चौक पार्क में शहीद मेजर रणबीर सिंह की मूर्ति का अनावरण किया गया। सैन्य अफसरों, सैनिकों और अन्य लोगों ने शहीद को श्रद्धांजलि दी।
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21 सितंबर 1965 को मेजर रणबीर शहीद हुए थे। रणबीर चौक पार्क में शुक्रवार को मेजर रणबीर सिंह की मूर्ति का अनावरण उनकी पत्नी डॉ. सुरेंद्र कुमारी सिंह ने किया। बटालियन बैंड ने देशभक्ति की धुन प्रस्तुत की। मेजर से जुड़ी यादों की प्रदर्शनी भी लगाई गई। लोगों ने उन पर लिखी किताबों को पढ़ा। इस मौके पर पौधे भी लगाए गए। लोगों ने मेजर से जुड़ी यादों को मोबाइल में कैद किया।
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19 पंजाब बटालियन ने युद्ध में कई जगह दुश्मन को पीछे धकेलने और तिरंगा फहराया था। बटालियन की स्थापना एक अप्रैल 1964 को हुई थी। स्थापना के बाद अपनी पहली फील्ड तैनाती के दौरान बटालियन ने कार्यक्षमता और युद्ध कौशल का उत्कृष्ट उदाहरण पेश किया। ‘जय दुर्गे’ बटालियन ने उड़ी से पुंछ तक मेघदूत सैन्यबल से लिंक अप करने के लिए आठ युद्ध कार्यवाहियों में भाग लिया।
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बटालियन ने 29 अगस्त 1965 को क्षेत्र की सबसे बड़ी चोटी ‘बिडोरी’ जिसकी ऊंचाई 12330 फीट पर जीत का परचम लहराया था। इसके साथ आगे बढ़ते हुए ‘कथनार दी गली’ पर और 30 अगस्त 1965 को ‘किरन’ पर कब्जा किया। बटालियन ने अपने हमले को हाजीपीर पास पर पूरा करते हुए एक सितंबर 1965 को एक पेरा के साथ लिंक अप किया।

 पुंछ की तरफ दक्षिण दिशा से बढ़ते हुए रास्ते में दुश्मन की एक महत्वपूर्ण पोस्ट ‘जियारत’ पर 9 सितंबर 1965 को कब्जा किया। बटालियन ने ‘रिंग कंटूर’ पर कब्जा करने के पश्चात 9 सितंबर 1965 को ‘कहूटा’ पुल पर पुंछ की तरफ से अपने हमलावर सैन्य बल से मिलाप कर महत्वपूर्ण उड़ी पुछ सड़क मार्ग पर पहुंच बना ली।


 21 सितंबर को बटालियन ने ‘पीटी 8777’ और ‘गिट्टयां’ पर दिन के समय हमला किया और अपने कब्जे में ले लिया। बटालियन को युद्ध सम्मान हाजीपीर और थियेटर सम्मान -जे एंड के 1965 से नवाजा गया। बटालियन को एक महावीर चक्र, 4 वीर चक्र, 3 सेना मेडल, छह मैंशन इन डिस्पेचिस से सम्मानित किया गया है।
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