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मेरठ : मेडिकल काॅलेज में बदतर हालात, एनआईसीयू में एक बेड पर हो रहा दो दो बच्चों को उपचार
Thu, 17 Jun 2021 06:07 PM IST
Dimple Sirohi
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
Published by: Dimple Sirohi
Updated Thu, 17 Jun 2021 06:07 PM IST
सार
तीसरी लहर में बच्चों पर कोरोना का ज्यादा असर होगा, ऐसी आशंका जताई गई है। सरकार इसे गंभीरता से ले रही है और इसीलिए पीआईसीयू बनाने के निर्देश दिए गए हैं।
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meerut medical
- फोटो : amar ujala
विस्तार
मेरठ मेडिकल कॉलेज के नियोनेटल इंटेंसिव केयर यूनिट (एनआईसीयू) में बेड फुल हो गए हैं। 10 बेड की नवजात गहन चिकित्सा इकाई में इस समय 20 बच्चे भर्ती हैं। हालात यह हैं कि एक-एक बेड पर दो-दो बच्चों का उपचार किया जा रहा है।
एनआईसीयू में 28 दिन के बीमार शिशु भर्ती हैं। सात माह में पैदा हुए, पैदा होते समय नहीं रोने वाले, कम वजन, पीलिया और अन्य बीमारी से पीड़ित शिशुओं का यहां इलाज किया जा रहा है।
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. नवरतन ने बताया कि भर्ती नवजात को परेशानी न हो, इसका ध्यान रखा जाता है। विशेषज्ञों की टीम बच्चों को बेहतर इलाज देने की पूरी कोशिश कर रही है। कभी-कभी मरीजों की संख्या बढ़ने पर समस्या हो जाती है। इसलिए एक बेड पर दो बच्चों का भी उपचार करना पड़ता है।
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कोरोना की तीसरी लहर के आशंका के मद्देनजर मेडिकल कॉलेज में 100 बेड की पीडियाट्रिक इंटेंसिव केयर यूनिट (पीआईसीयू) बनाने की तैयारी भी चल रही है। पीआईसीयू में 50 बेड का आइसोलेशन वार्ड, 25-25 बेड का का आईसीयू व जनरल वार्ड होगा। 25 वेंटिलेटर रहेंगे।
अभी तक जिले में पीआईसीयू) नहीं थी। तीसरी लहर में बच्चों पर कोरोना का ज्यादा असर होगा, ऐसी आशंका जताई गई है। सरकार इसे गंभीरता से ले रही है और इसीलिए पीआईसीयू बनाने के निर्देश दिए गए हैं।
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एनआईसीयू में 28 दिन के बीमार शिशु भर्ती हैं। सात माह में पैदा हुए, पैदा होते समय नहीं रोने वाले, कम वजन, पीलिया और अन्य बीमारी से पीड़ित शिशुओं का यहां इलाज किया जा रहा है।
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बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. नवरतन ने बताया कि भर्ती नवजात को परेशानी न हो, इसका ध्यान रखा जाता है। विशेषज्ञों की टीम बच्चों को बेहतर इलाज देने की पूरी कोशिश कर रही है। कभी-कभी मरीजों की संख्या बढ़ने पर समस्या हो जाती है। इसलिए एक बेड पर दो बच्चों का भी उपचार करना पड़ता है।
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कोरोना की तीसरी लहर के आशंका के मद्देनजर मेडिकल कॉलेज में 100 बेड की पीडियाट्रिक इंटेंसिव केयर यूनिट (पीआईसीयू) बनाने की तैयारी भी चल रही है। पीआईसीयू में 50 बेड का आइसोलेशन वार्ड, 25-25 बेड का का आईसीयू व जनरल वार्ड होगा। 25 वेंटिलेटर रहेंगे।
अभी तक जिले में पीआईसीयू) नहीं थी। तीसरी लहर में बच्चों पर कोरोना का ज्यादा असर होगा, ऐसी आशंका जताई गई है। सरकार इसे गंभीरता से ले रही है और इसीलिए पीआईसीयू बनाने के निर्देश दिए गए हैं।