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CCSU: पदक पाकर खिले टॉपर्स के चेहरे, राज्यपाल आनंदीबेन पटेल बोलीं- आवाज नहीं उठाई तो बेटियां मरती रहेंगी

Thu, 15 Dec 2022 12:03 AM IST
कपिल kapil अमर उजाला ब्यूरो, मेरठ
अमर उजाला ब्यूरो, मेरठ Published by: कपिल kapil Updated Thu, 15 Dec 2022 12:03 AM IST
सार

CCSU Update : राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने गुरुवार दोपहर सीसीएसयू में छात्र-छात्राओं को स्वर्ण पदक के साथ डिग्रियां भी सौंपीं। वहीं स्क्रीन पर विवि का इतिहास भी दिखाया गया।

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Meerut: Students will give degrees with gold medals by Governor Anandiben Patel in CCSU
मेरठ पहुंचीं राज्यपाल आनंदीबेन पटेल। - फोटो : amar ujala

विस्तार

राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय (CCSU) के 34वें दीक्षांत समारोह के लिए कैंपस भी पूरी तरह से सज चुका है। टॉपर्स स्वर्ण पदक पाने के लिए उत्साहित दिखे। गुरुवार दोपहर को नेताजी सुभाष चंद्र बोस प्रेक्षागृह में आयोजित भव्य समारोह में कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल छात्र-छात्राओं को स्वर्ण पदक दिए। समारोह में मुख्य अतिथि आईसीएसएसआर नई दिल्ली के अध्यक्ष पदमश्री डॉ. जेके बजाज रहे।  

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30 फीसदी मेडल पाने वाले बेटों को विशेष बधाई: राज्यपाल
दीक्षांत समारोह में लड़कियों को 70 फीसदी से ज्यादा मेडल मिलने पर कुलाधिपति आनंदी बेन पटेल ने कहा कि ये बहुत खुशी की बात है लेकिन जिन 30 फीसदी छात्रों ने पदक पाए हैं, उन्हें विशेष बधाई। उन्होंने कहा कि ये अवाॅर्ड इन्होंने नहीं लिए होते तो सारे मेडल ही बेटियां ले जातीं। उन्होनें कहा कि मैं अपेक्षा करती हूं कि अगली साल ये संख्या 50-50 रहे। उन्होंने कहा कि लेकिन कहीं ऐसा न हो जाए कि अगले साल लड़की 90 फीसदी और 10 फीसदी लड़के रह जाएं। 
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आनंदी बेन पटेल ने कहा कि एक समय था जब मैंने कॉलेज में एडमिशन लिया तो एक हजार छात्रों के बीच में मैं अकेली लड़की थी। आज लड़कियां बहुत आगे बढ़ गई हैं। महात्मा गांधी जी कहते थे कि एक लड़की पढ़ती है तो सात पीढ़ी पढ़ती हैं। वे इसलिए कहते थे क्योंकि माँ ही बच्चों को पढ़ाती है। अगर हमें परंपरा को बचाना है, संस्कृति को बचाना है, बच्चों में संस्कार रोपित करने हैं, भारत को विश्व गुरु बनना है तो बेटियों को पढ़ाना होगा। कोई भी संस्था आगे तब बढ़ती है, जब सबको साथ लेकर चला जाता है। उन्होंने कहा कि यूनिवर्सिटी 10 साल का अपना रोड मैप तैयार करें, आज विश्व मे हर यूनिवर्सिटी अपनी रैंकिंग पर ध्यान दे रहे हैं।
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आवाज नहीं उठाई तो बेटियां मरती रहेंगी - राज्यपाल 
राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने कहा कि आज  भी दहेज के कारण हजारों लड़कियां आत्महत्या कर रहीं हैं। उन्होंने कहा कि इतनी होनहार बेटियां हमारे यहां हैं लेकिन एक सच ये है कि 2017 से 2021 तक 35 हजार नौ सौ महिलाओं ने दहेज के लिए आत्महत्या की। इसमें सबसे ज्यादा यूपी में 11 हजार आठ लड़कियों ने दहेज के कारण आत्महत्या की। इसे रोकने के जनप्रतिनिधि आगे आएं। बाल विवाह रुकवाए। पुलिस आगे आए, ये न कहें कि हम पर एप्लीकेशन नहीं आई है। इसे रोकने के लिए विवि-कॉलेज के शिक्षक गांव-गांव जाकर लोगों को जागरूक करें। 

जल भरो कार्यक्रम को लेकर कहा कि हर किसी को पानी का महत्व समझना चाहिए, आज कई ऐसे राज्य हैं जहां पानी की कमी हैं। ऐसे में जल संचय पर ध्यान दें। विवि भी इस पर ध्यान दे। कस्तूरबा गांधी विद्यालय की बच्चियों को लेकर उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यक्रमों में आने से इनमें गोल्ड मेडल पाने का भाव आएगा। कहा कि हमने राजभवन में सभी विवि के कार्य परिषद और विद्वत परिषद के सदस्यों को बुलाया था, हमने उनसे सुझाव मांगे थे, जो सही लगे उनको जल्दी सभी विवि में भेज दिया जाएगा।

राज्यपाल ने कहा कि जिन लोगों के पास आवास नहीं थे, उस परिवार को प्रधानमंत्री आवास मिलने से क्या लाभ हुआ, क्या इसका किसी ने आकलन किया। 
कुपोषित बच्चों को लेकर क्या किसी ने स्टडी की। स्वच्छ जल घर घर जाने से क्या हुआ, बीमारी घटी क्या। इन सब पर प्रोजेक्ट तैयार करें। चाहरदीवारी कर अंदर बैठे नहीं रहे। उन्होंने कहा कि पश्चिम हर क्षेत्र में समृद्ध है। ऐसे में यहां के विद्यार्थी कुछ अलग करें। किसी प्राइमरी स्कूल को गोद लें। इस यूनिवर्सिटी को इन सभी प्रॉजेक्ट पर कार्य कटेंगे तो यूनिवर्सिटी के लिए मिशाल बनेगी। कहा की यूपी में सबसे ज्यादा आबादी है तो सबसे ज्यादा जिम्मेदारी भी यूपी की है। आज जो गोल्ड मेडल मिला है, उसको लेकर मां-पिता से जरूर बात करेगा। आज जब कुछ लड़कों ने हमारे पैर छुए तो हब यही कहा कि घर जाकर माता-पिता के पैर जरूर छूना।

131193 छात्र-छात्राओं को मिलीं डिग्री
दीक्षांत समारोह में 195 छात्र-छात्राओं को 228 स्वर्ण पदक-विशिष्ट योग्यता प्रमाण पत्र मिले। यूजी-पीजी के 131193 छात्र-छात्राओं को उपाधियां मिलेंगी। इनमें लड़कों की संख्या 43534 (33 फीसदी) और लड़कियों की संख्या 87659 (68.82 फीसदी) है। 234 छात्र-छात्राओं को पीएचडी की उपाधि मिली। एक कुलाधिपति स्वर्ण पदक, एक राष्ट्रपति शंकर दयाल शर्मा स्वर्ण पदक, दो चौधरी चरण सिंह स्मृति प्रतिभा पुरस्कार, 59 प्रायोजित स्वर्ण पदक, 165 कुलपति स्वर्ण पदक दिए गए। इनके अलावा वर्ष 2021 के प्रायोजित मेडल भी दिए गए। 44 छात्र-छात्राओं की पीएचडी उपाधि पर भी मुहर लगी।

स्क्रीन पर दिखाया गया विवि का इतिहास
दीक्षांत समारोह को इस बार और भव्य बनाया गया। सीसीएसयू के इतिहास को डॉक्यूमेंट्री के जरिए स्क्रीन पर दिखाया गया। इसमें विवि के सफर को बयां किया गया। प्रेक्षागृह के प्रवेश द्वार पर इस बार फोटो गैलरी लगाई गई। पानी का महत्व बताते हुए इस बार जल भरो कार्यक्रम का भी आयोजन किया गया। कार्यक्रम में कस्तूरबा गांधी विद्यालय के 25 बच्चों को कुलाधिपति किट दी।

स्क्रीन लगाकर किया गया लाइव प्रसारण
स्क्रीन लगाकर दीक्षांत समारोह का लाइव प्रसारण सीसीएसयू के यूट्यूब चैनल पर किया गया। 

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समारोह में मुख्य अतिथि आईसीएसएसआर नई दिल्ली के अध्यक्ष पदमश्री डॉ. जेके बजाज ने छात्र छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा किभारतीय परंपरा में और भारतीय सभ्यता के मूलभूत साहित्य में दीक्षांत को बहुत महत्त्व दिया गया है। यह वह संधिवेला है। जब आप जीवन की एक अवस्था को पूर्ण कर दूसरी में प्रवेश करते हैं। ब्रह्मचर्याश्रम से गृहस्थाश्रम की ओर बढ़ते हैं। अब तक आप विद्यार्थी थे। अपने भरण एवं संरक्षण के लिये परिवार-समाज एवं राष्ट्र पर निर्भर थे। दीक्षांत के पश्चात् आप स्वयं जीविकोपार्जन करेंगे, अर्थोपार्जन करेंगे न केवल अपने अपितु परिवार समाज एवं राष्ट्र के भरण-पोषण में भी समर्थ बनेगे। अब तक आप अन्यों पर निर्भर थे। अब अन्य आप पर निर्भर होंगे। 

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प्रो. संगीता शुक्ला ने कहा कि जो छात्र-छात्राएं उपाधि लेकर जा रहे हैं वह अपने विश्वविद्यालय के लिए भविष्य में कुछ न कुछ जरूर करें। विवि को अपना घर समझकर किसी न किसी रूप में अपना योगदान दें। वे यहां पढ़ाने भी आ सकते हैं। रिसर्च में योगदान दे सकते हैं। एक बार स्वर्ण पदक लेकर चले गए ऐसा न करें, यहां अक्सर आते रहें। यह सभी विवि परिवार का हिस्सा हैं। वे विवि को आगे बढ़ाने के लिए अपने सुझाव भी दें। 

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