भारत-पाकिस्तान युद्ध में लड़े थे रिटायर्ड लांस नायक, अब प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर जताई ये इच्छा
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मेरठ कलेक्ट्रेट परिसर में 76 वर्षीय रिटायर्ड फौजी ने डीएम कार्यालय में एक पत्र सौंपते हुए कहा कि मैं भारत पाकिस्तान के बीच हुए 1965 के युद्ध का गवाह रहा हूं। मैं जानता हूं कि दुश्मनों से कैसे लड़ा जाता है। जो जज्बा मुझमें 21 साल की उम्र में था, आज भी वैसा ही है। मुझे पाकिस्तान से लड़ने भेजा जाए। उस लड़ाई में मुझे शहीद का दर्जा नहीं मिल पाया, लेकिन अब मैं उसे पाना चाहता हूं। रिटायर्ड लांसनायक खजान सिंह के इस जज्बे को देखकर सभी हैरान रह गए।
प्रभात नगर निवासी खजान सिंह ने एक पत्र मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री को भी लिखा है। डीएम कार्यालय को भी दिया है। इसमें उन्होंने कहा कि मैं कई ऑपरेशन में शामिल रहा हूं। पाकिस्तान के इलाकों में रहा हूं। हमारी सेना ने जब 1965 का युद्ध जीतकर परचम लहराया था तो मैं भी उस टीम का हिस्सा था। दुश्मनों के सामने हमने कभी हार नहीं मानी। उस समय सरकारी की खराब नीति के कारण हमें वापस आना पड़ा था। मेरी इच्छा है कि मैं शहीद होकर तिरंगे में लिपटकर आऊंगा। आज हमारी सरकारी ने जो कदम उठाए हैं, यह गर्व की बात है।
लाहौर में रहकर मनाई थी दीपावली
उन्होंने बताया कि 1965 के युद्ध में मैं उन जवानों के साथ था, जिन्होंने पाकिस्तानी 150 जवानों को मारकर इच्छुक नहर में फेंक दिया था। यह नहर 90 फीट चौड़ी है, जो लाहौर और अटारी के बीच है। पाकिस्तान से युद्ध जीतने के बाद छह माह लाहौर में रहकर दीपावली मनाई थी। उनका कहना है कि उस समय मेरे कंपनी कमांडर आशाराम त्यागी को मैंने अपनी आंखों के सामने शहीद होते देखा था। उस पल को मैं आज भी भूला हूं। उसके बाद भी हम साहस से लड़े, जो भी दुश्मन सामने आया उसे नहीं छोड़ा। हरियाणा के उस साथी सूरज सिंह को भी दिलेर मानता हूं जिसने अपने हाथों से दस लोगों को मार दिया था। हम होली मनाकर पाकिस्तान से स्वदेश लौटे थे।
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