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Meerut: रघुनंदन ज्वेलर्स और भगवान बुक डिपो आयकर के रडार पर, एक करोड़ रुपये कहां से आए, कहां गए; होगी जांच
Fri, 20 Feb 2026 08:52 PM IST
मोहम्मद मुस्तकीम
अमर उजाला नेटवर्क, मेरठ
अमर उजाला नेटवर्क, मेरठ
Published by: मोहम्मद मुस्तकीम
Updated Fri, 20 Feb 2026 08:52 PM IST
सार
रघुनंदन ज्वेलर्स पर बुधवार को हंगामा हो गया था। भगवान बुक डिपो वालों ने कहा कि उन्होंने एक करोड़ रुपये कैश दिया है, जबकि ज्वैलर्स का कहना था कि उसके बदले जेवरात दिए गए हैं।
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रघुनंदन ज्वैलर्स पर होता हंगामा।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
एक करोड़ रुपये का नगद लेनदेन करने के मामले में शहर के बड़े सराफा कारोबारी रघुनंदन ज्वेलर्स और भगवान बुक डिपो के संचालक आयकर के रडार पर आ गए हैं। आयकर विभाग इन दोनों कारोबारियों को पूछताछ के लिए नोटिस जारी करेगा। आयकर विभाग के अधिकारी इस मामले में पुलिस से भी जानकारी जुटाएंगे, ताकि मामले की तह तक पहुंचा जा सके। आयकर अधिनियम के अनुसार दो लाख रुपये से अधिक का नगद लेनदेन प्रतिबंधित है। ऐसे में एक करोड़ रुपये के नगद आदान-प्रदान पर सवाल खड़े हो गए हैं।
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मेरठ के बड़े सराफा कारोबारियों में शुमार में आबूलेन निवासी रघुनंदन ज्वेलर्स और सदर चौक बाजार निवासी भगवान बुक डिपो के संचालकों ने एक करोड़ रुपये का नकद लेनदेन किया है। एक करोड़ रुपये नकद जिसने लिया और जिसने दिया, इससे जुड़े तत्थों की आयकर विभाग जानकारी जुटाने में लग गया है।
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जानकारी मिली है कि आयकर अधिकारी सदर थाना पुलिस से भी इस मामले में पूछताछ करेंगे। आयकर विभाग मेरठ के कई अधिकारी शुक्रवार को आगरा में मिष्ठान कारोबारी के यहां छापामारी में व्यस्त रहे। शनिवार और रविवार को छुट्टी होने के कारण अब सोमवार को ज्वेलर्स और बुक डिपो संचालक के लेनदेन संबंधी रिकॉर्ड खंगाले जा सकते हैं।
आयकर विभाग के अफसरों के मुताबिक नोटिस जारी कर दोनों व्यापारियों से पूछताछ की जा जाएगी। एक करोड़ रुपये की धनराशि बुक डिपो संचालक ने कहां से और कैसे जुटाई, इसका विवरण आयकर विभाग के समक्ष प्रस्तुत करना होगा। इसके अलावा सराफा कारोबारी ने जो धनराशि ली, उसका कहां और किस मद में प्रयोग किया गया, इसकी जानकारी देनी होगी।
पुलिस की जांच में डायरी एंट्री की बात सामने आई है। बुक डिपो संचालक ने सराफा कारोबारी के पास पैसा जमा करने की बात कही है। ऐसे में आयकर विभाग यह भी जानकारी जुटाएगा कि किस तरह की डायरी एंट्री की जा रही थी।
दो लाख रुपये से अधिक नगद धनराशि के लेनदेन पर 100 प्रतिशत जुर्माना
सीए अनुपम शर्मा बताते हैं कि आयकर अधिनियम की धारा- 269 एसटी के तहत किसी भी व्यक्ति से एक दिन में एक ही लेनदेन में या एक ही इवेंट (आयोजन) से संबंधित लेनदेन के लिए दो लाख रुपये या उससे अधिक की नकद राशि प्राप्त करना प्रतिबंधित है। इसका उल्लंघन करने पर धारा 271 डीए के तहत ली गई राशि के बराबर 100 प्रतिशत जुर्माना लग सकता है। यह नियम धनराशि प्राप्त करने वाले पर लगता है।
सीए अनुपम शर्मा बताते हैं कि आयकर अधिनियम की धारा- 269 एसटी के तहत किसी भी व्यक्ति से एक दिन में एक ही लेनदेन में या एक ही इवेंट (आयोजन) से संबंधित लेनदेन के लिए दो लाख रुपये या उससे अधिक की नकद राशि प्राप्त करना प्रतिबंधित है। इसका उल्लंघन करने पर धारा 271 डीए के तहत ली गई राशि के बराबर 100 प्रतिशत जुर्माना लग सकता है। यह नियम धनराशि प्राप्त करने वाले पर लगता है।
ये है मामला...
मेरठ के आबूलेन पर आबू प्लाजा स्थित रघुनंदन ज्वेलर्स के शोरूम पर बुधवार दोपहर एक करोड़ की ठगी का चौंकाने वाला मामला सामने आया। कृष्णा नाम के व्यक्ति ने व्हाट्सएप कॉल कर शोरूम संचालक के बेटे तन्मय अग्रवाल को एक करोड़ के आभूषण खरीदने का झांसा दिया। इसके बाद कृष्णा ने अपने कथित भतीजे को भेजकर आभूषण पसंद करा लिए। तभी वहां भगवान बुक डिपो के संचालक प्रवीण शर्मा और उनकी पत्नी पहुंचे।
उन्होंने एक करोड़ रुपये तन्मय को दे दिए। तभी कथित भतीजा आभूषण लेकर चला गया और प्रवीण शर्मा और ज्वेलर्स में रुपयों को लेकर विवाद शुरू हो गया। प्रवीण शर्मा का कहना है कि उसने रुपये आभूषण खरीदने के लिए नहीं बल्कि अपनी फर्म के खाते में जमा कराने के लिए दिए हैं। इसी को लेकर विवाद चल रहा है।
मेरठ के आबूलेन पर आबू प्लाजा स्थित रघुनंदन ज्वेलर्स के शोरूम पर बुधवार दोपहर एक करोड़ की ठगी का चौंकाने वाला मामला सामने आया। कृष्णा नाम के व्यक्ति ने व्हाट्सएप कॉल कर शोरूम संचालक के बेटे तन्मय अग्रवाल को एक करोड़ के आभूषण खरीदने का झांसा दिया। इसके बाद कृष्णा ने अपने कथित भतीजे को भेजकर आभूषण पसंद करा लिए। तभी वहां भगवान बुक डिपो के संचालक प्रवीण शर्मा और उनकी पत्नी पहुंचे।
उन्होंने एक करोड़ रुपये तन्मय को दे दिए। तभी कथित भतीजा आभूषण लेकर चला गया और प्रवीण शर्मा और ज्वेलर्स में रुपयों को लेकर विवाद शुरू हो गया। प्रवीण शर्मा का कहना है कि उसने रुपये आभूषण खरीदने के लिए नहीं बल्कि अपनी फर्म के खाते में जमा कराने के लिए दिए हैं। इसी को लेकर विवाद चल रहा है।