Meerut: प्रदूषण कर रहा हमला, सुनने की क्षमता हो रही प्रभावित, खराब हो रहे नाक-कान-गला
ध्वनि और वायु प्रदूषण न सिर्फ लोगों को गंभीर बीमारियां दे रहा है बल्कि नाक कान और गले की गंभीर बीमारियां भी दे रहा है। चिकित्सकों की मानें तो नाक की एलर्जी और गले के इंफेक्शन की शिकायत बढ़ रही हैं।
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प्रदूषण नाक, कान और गले को बेहद नुकसान पहुंचा रहा है। ध्वनि और वायु प्रदूषण खासकर कानों को न सिर्फ गंभीर बीमारियां दे रहे हैं, बल्कि सुनने की क्षमता को भी काफी कम कर रहा है। एक जनवरी 2023 से 31 दिसंबर 2023 तक जिला अस्पताल की नाक-कान-गला रोग (ईएनटी) ओपीडी में आए 16706 मरीजों पर की गई स्टडी में यह स्थिति सामने आई।
अवलोकन करने वाले जिला अस्पताल के ईएनटी डॉ. बीपी कौशिक ने बताया कि इनमें से करीब 25 प्रतिशत मरीज ऐसे निकले, जिनके सुनने की क्षमता प्रभावित थी। इसके अलावा उन्हें टिनिटस (कान बजना) बीमारी निकली है। इनमें सबसे ज्यादा मरीज 20 से 50 साल उम्र के बीच के थे। इन मरीजों में नाक की एलर्जी और गले के इंफेक्शन की भी शिकायत थी।
सामान्य तौर पर यह बीमारी पहले 60 साल की उम्र के बाद होती थीं, मगर अब युवा अवस्था में ही यह चपेट में ले रहा है। तेज स्वर में संगीत सुनने और ईयरफोन पर घंटों गाना सुनने के कारण कान की बाहरी परत क्षतिग्रस्त हो जाती है और सुनने की क्षमता कम हो जाती है।
एलएलआरएम मेडिकल कॉलेज के ईएनटी डॉ. वीपी सिंह ने बताया कि जुकाम में मरीजों की नाक बहती है। नाक से कान के बीच स्थित यूस्टेकियन ट्यूब में नाक से पानी चला जाता है। इस पानी के कारण मध्य कान में संक्रमण हो जाता है। कई बार कफ के कारण ट्यूब ब्लॉक हो जाता है। इससे कान का संक्रमण होने के साथ ही सुनने की क्षमता भी मरीज की कम हो जाती है।
ध्वनि और वायु प्रदूषण निकला सबसे बड़ा कारण
जिला अस्पताल में ऑडियो मीटर के जरिए मरीजों की सुनने की क्षमता मापी जाती है, जिसमें पता चला कि बड़ी संख्या में युवा प्रदूषण (वायु-ध्वनि) के कारण कानों की बीमारियों और सुनने की क्षमता कम होने के शिकार हो रहे हैं।
यह लक्षण दिखें तो हो जाएं सावधान
-कानों में संक्रमण के चलते दर्द का उभरना सबसे पहला लक्षण होता है।
-कान में भारीपन महसूस होना।
-मवाद होना, बुखार, कानों का बहना।
-सोने में परेशानी आना, सिरदर्द, भूख न लगना।
-कानों में घंटी की आवाज सुनाई देना।
यह हैं सुनने की क्षमता के मानक
-15 से 20 डेसीबेल तक की आवाज से कान को कोई नुकसान नहीं होता है
-60 से 65 डेसीबेल के बाद कान को आवाज चुभने लगती है
-115 डेसीबेल की आवाज से कान का पर्दा फट सकता है
-85 से 120 डेसीबेल आवाज पटाखे की होती है
-85 से 115 डेसीबेल आवाज हेडफोन का होता है