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मेरठ में केक पर टूट पड़े बसपाई
ब्यूरो/अमर उजाला, मेरठ
Updated Sat, 16 Jan 2016 02:39 AM IST
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शाम चार बजे जैसे ही बसपा सुप्रीमो मायावती के जन्मदिन पर केक काटा गया तो बसपाई टूट पड़े। केक के लिए आपाधापी, छीनाझपटी शुरू हो गई। 60 किलो का केक साठ सेकेंड से भी कम समय में गायब हो गया। मंच पर ऐसी स्थिति हो गई कि कई कार्यकर्ता नीचे गिरते-गिरते बचे। जिसके हाथ जितना केक लगा, झपट लिया गया। बाद में लड्डू भी बांटे गए, लेकिन आपाधापी कम नहीं हुई।
कार्यक्रम खत्म होने से पहले ही उखाड़ डाले होर्डिंग
एक तरफ कार्यक्रम चलता रहा तो दूसरी तरफ रैली स्थल पर लगे होर्डिंग्स को ले जाने की होड़ लग गई। आपाधापी में कुछ होर्डिंग फट भी गए। मंच से जिलाध्यक्ष अश्वनी जाटव बार-बार अपील करते रहे कि अभी कार्यक्रम खत्म नहीं हुआ है। ऐसा न करें पर किसी ने एक नहीं सुनी।
पहले ही निकलने लगी भीड़, नेता भी खिसके
रैली में केक काटने का इंतजार कम ही लोगों ने किया। एक बार तो मैदान पूरा खचाखच भर गया पर धीरे-धीरे लोग जाने लगे। केक कटने के समय आधी भीड़ जा चुकी थी। कई नेता भी खिसक लिए। पूर्व विधायक विनोद हरित तो काफी देर पहले ही जा चुके थे। याकूब कुरैशी भी एक बार बीच में जाकर बाद में लौटे।
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अनुशासनहीनता पर भड़के जोनल कोआर्डिनेटर
कार्यक्रम में अनुशासनहीनता भी हावी रही। मंच पर पैर रखने की भी जगह नहीं रही। वक्ताओं को संबोधन करने केलिए भी जगह बनानी पड़ती। माइक पर भी कार्यकर्ताओं का जमघट रहा। सबसे आखिर में जब जोनल कोआर्डिनेटर नरेश गौतम ने संबोधन किया तो उन्होंने इस पर नाराजगी जताई। उन्होंने तो यहां तक कह दिया कि वे तभी बोलना शुरू करेंगे जब मंच पर खड़े लोग बैठ जाएंगे। हालांकि लोगों पर इसका असर कम ही हुआ।
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कार्यक्रम खत्म होने से पहले ही उखाड़ डाले होर्डिंग
एक तरफ कार्यक्रम चलता रहा तो दूसरी तरफ रैली स्थल पर लगे होर्डिंग्स को ले जाने की होड़ लग गई। आपाधापी में कुछ होर्डिंग फट भी गए। मंच से जिलाध्यक्ष अश्वनी जाटव बार-बार अपील करते रहे कि अभी कार्यक्रम खत्म नहीं हुआ है। ऐसा न करें पर किसी ने एक नहीं सुनी।
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पहले ही निकलने लगी भीड़, नेता भी खिसके
रैली में केक काटने का इंतजार कम ही लोगों ने किया। एक बार तो मैदान पूरा खचाखच भर गया पर धीरे-धीरे लोग जाने लगे। केक कटने के समय आधी भीड़ जा चुकी थी। कई नेता भी खिसक लिए। पूर्व विधायक विनोद हरित तो काफी देर पहले ही जा चुके थे। याकूब कुरैशी भी एक बार बीच में जाकर बाद में लौटे।
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अनुशासनहीनता पर भड़के जोनल कोआर्डिनेटर
कार्यक्रम में अनुशासनहीनता भी हावी रही। मंच पर पैर रखने की भी जगह नहीं रही। वक्ताओं को संबोधन करने केलिए भी जगह बनानी पड़ती। माइक पर भी कार्यकर्ताओं का जमघट रहा। सबसे आखिर में जब जोनल कोआर्डिनेटर नरेश गौतम ने संबोधन किया तो उन्होंने इस पर नाराजगी जताई। उन्होंने तो यहां तक कह दिया कि वे तभी बोलना शुरू करेंगे जब मंच पर खड़े लोग बैठ जाएंगे। हालांकि लोगों पर इसका असर कम ही हुआ।