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Meerut: नवरात्र-रोजे एक साथ, यह संयोग भाईचारे और सौहार्द का एक पैगाम, पढ़िए क्या बोले आचार्य

Fri, 24 Mar 2023 01:28 PM IST
कपिल kapil शाह आलम त्यागी, संवाद न्यूज एजेंसी, मेरठ
शाह आलम त्यागी, संवाद न्यूज एजेंसी, मेरठ Published by: कपिल kapil Updated Fri, 24 Mar 2023 01:28 PM IST
सार

Meerut News : इस बार नवरात्र और रोजे एक साथ हैं। यह संयोग भाईचारे और सौहार्द का एक पैगाम है। पढ़िए आखिर इस पर आचार्य का क्या कहना है।

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Meerut News: Navratri and fasting are together, this is a message of brotherhood and harmony
फाइल फोटो। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मां की उपासना के दिन नवरात्र और अल्लाह की इबादत का पाक महीना माह-ए-रमजान एक साथ आ गए हैं। यह संयोग और त्योहार देशहित में आपसी भाईचारे और सौहार्द का एक पैगाम भी है, जिसे लेकर हर कोई उत्साहित है। 22 मार्च को देवी के नवरात्र की कलश स्थापना हुई, वहीं रमजान की चांद रात की शुरुआत शुक्रवार से हो गई।

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आचार्य डॉ. कपिल मलिक ने बताया कि चैत्र नवरात्र 22 मार्च से आरंभ हो चुके हैं। इस दिन से ही नववर्ष शुरू होता है। नवरात्र वास्तव में साधनात्मक है। वैदिक संस्कृति में देवियों का स्थान उच्चतम रहा है। वेदों में कुछ उल्लेखनीय देवियों जैसे अदिति, दिति, पृथ्वी, सरस्वती, लक्ष्मी, शक्ति आदि अनेक नामों का वर्णन प्राप्त होता है। देवी वस्तुत: ईश्वर का ही मातृ-स्वरूप है।
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वहीं, शहर काजी मुफ्ती शाकिर कासमी ने बताया कि चांद दिखाई देने के बाद से ही तराहवी की नमाज शुरू हो गई। माह-ए-रमजान रहमत व बरकत की बारिश का ऐसा महीना है, जिसमें हर तरफ इबादत का सिलसिला चलता है। रमजानुल मुबारक का महीना मुसलमानों के लिए सबसे अफजल महीना माना गया है। जहां इस महीने में खुदा रोजेदार पर अपनी रहमतों की बारिश करता है।
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बताया गया कि यह महीना भाईचारे और इंसानियत का पैगाम भी देता है। रोजा सिर्फ दिन भर भूखा रहने का नाम नहीं, बल्कि रोजा इंसान को इंसान से प्यार करना सिखाता है।

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उन्होंने कहा कि पूरी दुनिया की कहानी भूख, प्यास और इंसानी ख्वाहिशों के ईद-गिर्द घूमती है। रोजा इन तीनों चीजों पर सब्र रखने का पैगाम है। रमजान का महीना तमाम इंसानों के दुख, दर्द और भूख, प्यास को समझने का महीना है, ताकि रोजेदारों में भले-बुरे को समझने की सलाहियत पैदा हो।

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