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लापरवाह सिस्टम ने ‘निगल’ लिया गौरव

Thu, 04 Feb 2016 02:55 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, मेरठ
ब्यूरो/अमर उजाला, मेरठ Updated Thu, 04 Feb 2016 02:55 AM IST
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Meerut News

नेहरूनगर नाले में डूबे गौरव को लापरवाह सिस्टम ने ‘निगल’ लिया। पहले दिन से ही तलाशी अभियान में कोताही बरती गई। बुधवार को केवल दो घंटे अभियान चला। नगर स्वास्थ्य अधिकारी ने अभियान पर ब्रेक लगा दिया है। वहीं दूसरी ओर मां की आंखें अपने लाल को तलाश रही हैं। जब भी दरवाजे पर आहट होती है, वह दौड़कर बाहर आ जाती है। प्रशासन की लापरवाही से लोगों में रोष व्याप्त है।

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शनिवार को फूलबाग कॉलोनी निवासी 12 वर्षीय गौरव नेहरूनगर नाले में गिर गया था। पहले दिन से ही नगर निगम की लापरवाही उजागर होती रही। घटना के तीन घंटे बाद निगम प्रशासन ने सर्च अभियान शुरू किया। अगले दिन दोपहर 12 बजे से घटनास्थल से रंगोली मंडप के बीच जगह-जगह जेसीबी से तलाश की गई।
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तीन दिन तक निगम कर्मचारियों ने सर्च अभियान तो चलाया, लेकिन केवल खानापूर्ति के लिए। मंगलवार को नगरायुक्त उमेश प्रताप ने नेहरूनगर नाले का निरीक्षण किया। उन्होंने आशंका जताई कि गौरव नाले में डूबा ही नहीं होगा। बुधवार को घटनास्थल से काली नदी तक नाले का निरीक्षण किया गया।
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दोपहर लगभग एक बजे 5-7 सफाई कर्मचारी तेजगढ़ी से पीवीएस मॉल की तरफ जाने वाले मार्ग पर बांस डालते मिले। अंत में शाम को नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. प्रेम सिंह ने गौरव के न मिलने की बात कही। साथ ही कहा कि नाले की सफाई में कर्मचारी तो तैनात रहेंगे।

बेटे को कैसे भूला पाएगी मां
नगर निगम प्रशासन भले ही गौरव के डूबने की घटना को संदिग्ध मान रहा हो, लेकिन मां सुशीला अपने बेटे गौरव को भला कैसे भूल पाएगी।

पुरानी घटना से सीख लें अधिकारी
नगरायुक्त उमेश प्रताप को पिछले साल दिल्ली रोड पर फ्लाईओवर के निकट नाले गिरे बच्चे की घटना का संज्ञान लेना चाहिए। पॉलिथीन बीनने वाला बच्चा नाले में डूबा था। उसके साथी ने उसके डूबने की जानकारी लोगों को दी थी। लगातार तीन दिन तक नाले में तलाशी अभियान चला था। उस समय भी निगम और जिला प्रशासनिक अधिकारियों ने बच्चे के डूबने की घटना को संदिग्ध बताया था।


कुछ अधिकारियों ने घटना को एक सिरे से खारिज करना शुरू कर दिया था। लेकिन मीडिया के दबाव में नाले में सर्च चलता रहा। उसका परिणाम तीसरे दिन सामने आ गया। यानी घटनास्थल से लगभग एक किलोमीटर दूर संजय वन के निकट नाले में बालक का शव मिला था। ठीक उसी प्रकार गौरव की घटना को देखा जाना चाहिए।

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