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युवा वैज्ञानिकों पर देश की बड़ी जिम्मेदारी
ब्यूरो/अमर उजाला, मेरठ
Updated Fri, 29 Jan 2016 02:24 AM IST
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पूरा विश्व भारत की यूथ शक्ति को देख रहा है। भारत ही इस समय ऐसा देश है जो अपनी युवा शक्ति की बदौलत विश्व का दृश्य बदल सकता है। युवा वैज्ञानिकों पर देश की बड़ी जिम्मेदारी है।
यह बात राष्ट्रीय दुग्ध अनुसंधान संस्थान करनाल के निदेशक एवं कुलपति डॉ. अनिल कुमार श्रीवास्तव ने बृहस्पतिवार को कही। सरदार वल्लभ भाई पटेल कृषि विश्वविद्यालय के आठवें दीक्षांत समारोह में बतौर मुख्य अतिथि डॉ. श्रीवास्तव ने कहा कि देश के कुल युवाओं में 65 प्रतिशत संख्या 35 वर्ष आयु वर्ग की है।
इसलिए विश्व में भारत सबसे अधिक युवाओं का देश कहा जाता है। हमें अपनी इस युवा शक्ति का सही इस्तेमाल देश और विश्व निर्माण में करना होगा। देश की बढ़ती जनसंख्या के दबाव में युवा वैज्ञानिकों के कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी है। कृषि वैज्ञानिकों को आने वाले भविष्य की चुनौतियों को ध्यान में रखकर खाद्यान्न की समस्या दूर करने के लिए नए शोध करने होंगे।
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इससे पूर्व कृषि विवि के कुलपति डॉ. एचएस गौड ने दीक्षांत समारोह के शुरू होने की विधिवत घोषणा की। समारोह में 323 छात्र-छात्राओं को डिग्री प्रदान की गई। डॉ. श्रीवास्तव और डॉ. गौड़ ने मेधावी छात्र-छात्राओं को मेडल पहनाकर सम्मानित किया। कार्यक्रम में राज्यपाल की प्रमुख सचिव ज्योतिका पांडेनकर भी मौजूद रहीं। उन्हें भी कुलपति ने स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया।
कुल सचिव डॉ. सीएस प्रसाद ने दीक्षांत समारोह का संचालन किया। इस मौके पर सीसीएसयू के कुलपति प्रोफेसर एनके तनेजा, जिला पंचायत अध्यक्ष सीमा प्रधान, डीन बायोटेक डॉ. एसके भटनागर, डीन पीजी डॉ. एनएस राणा, निर्माण प्रभारी अधिकारी डॉ. बीआर सिंह, डॉ. आरएस सेंगर, डॉ. सुनील मलिक, डॉ. सतेंद्र खारी,
संजय विकल, नितिन कटारिया, संतकुमार भारती, प्रबंध समिति सदस्य संगीता राहुल, डॉ. महेश कौशिक, रणवीर सिंह चिकारा समेत अन्य अतिथि मौजूद रहे।
सभी को नहीं मिलती दो वक्त की रोटी
मोदीपुरम। मुख्य अतिथि ने कहा कि ये सच है कि कृषि क्षेत्र में हमने काफी तरक्की की है। लेकिन अभी भविष्य की चिंताएं समाप्त नहीं हुई हैं। आज भी आबादी का एक बड़ा हिस्सा दो वक्त की रोटी को तरस रहा है। युवा वैज्ञानिकों को मौसम को देखकर शोध करने होंगे। प्राकृतिक संसाधनों के अधिक से अधिक संरक्षण पर ध्यान देना होगा।
हार्वेस्टिंग मैनेजमेंट पर फोकस करना होगा। साथ ही किसानों को शिक्षित करना होगा, ताकि वह कम लागत पर अधिक लाभ और उत्पादन ले सकें।
दुग्ध उत्पादन में भारत नंबर वन
मोदीपुरम। मुख्य अतिथि ने कहा कि विगत 12 साल से भारत दुग्ध उत्पादन में विश्व में पहले स्थान पर है। मांस निर्यात में भी भारत सबसे बड़े देश के रूप में उभर कर सामने आया है।
लेकिन देश में कृषि उत्पादन के संरक्षण का अभाव है। एक अनुमान के मुताबिक भारत में फल और सब्जी का इतनी बड़ी मात्रा में उत्पादन हार्वेस्टिंग के अभाव में बेकार हो जाता है कि जितनी खपत पूरे यूरोप की है।
मायूस हुए विद्यार्थी
दीक्षांत समारोह की अध्यक्षता राज्यपाल रामनाइक को करनी थी। लेकिन स्वास्थ्य ठीक न होने के कारण वह समारोह में भाग नहीं ले सके। जिन छात्र-छात्राओं को राज्यपाल के हाथों मेडल और डिग्री लेने की हसरत थी, वह उनके न आने पर पूरी नहीं हो सकी। कई विद्यार्थियों को इस दौरान मायूस देखा गया।
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यह बात राष्ट्रीय दुग्ध अनुसंधान संस्थान करनाल के निदेशक एवं कुलपति डॉ. अनिल कुमार श्रीवास्तव ने बृहस्पतिवार को कही। सरदार वल्लभ भाई पटेल कृषि विश्वविद्यालय के आठवें दीक्षांत समारोह में बतौर मुख्य अतिथि डॉ. श्रीवास्तव ने कहा कि देश के कुल युवाओं में 65 प्रतिशत संख्या 35 वर्ष आयु वर्ग की है।
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इसलिए विश्व में भारत सबसे अधिक युवाओं का देश कहा जाता है। हमें अपनी इस युवा शक्ति का सही इस्तेमाल देश और विश्व निर्माण में करना होगा। देश की बढ़ती जनसंख्या के दबाव में युवा वैज्ञानिकों के कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी है। कृषि वैज्ञानिकों को आने वाले भविष्य की चुनौतियों को ध्यान में रखकर खाद्यान्न की समस्या दूर करने के लिए नए शोध करने होंगे।
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इससे पूर्व कृषि विवि के कुलपति डॉ. एचएस गौड ने दीक्षांत समारोह के शुरू होने की विधिवत घोषणा की। समारोह में 323 छात्र-छात्राओं को डिग्री प्रदान की गई। डॉ. श्रीवास्तव और डॉ. गौड़ ने मेधावी छात्र-छात्राओं को मेडल पहनाकर सम्मानित किया। कार्यक्रम में राज्यपाल की प्रमुख सचिव ज्योतिका पांडेनकर भी मौजूद रहीं। उन्हें भी कुलपति ने स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया।
कुल सचिव डॉ. सीएस प्रसाद ने दीक्षांत समारोह का संचालन किया। इस मौके पर सीसीएसयू के कुलपति प्रोफेसर एनके तनेजा, जिला पंचायत अध्यक्ष सीमा प्रधान, डीन बायोटेक डॉ. एसके भटनागर, डीन पीजी डॉ. एनएस राणा, निर्माण प्रभारी अधिकारी डॉ. बीआर सिंह, डॉ. आरएस सेंगर, डॉ. सुनील मलिक, डॉ. सतेंद्र खारी,
संजय विकल, नितिन कटारिया, संतकुमार भारती, प्रबंध समिति सदस्य संगीता राहुल, डॉ. महेश कौशिक, रणवीर सिंह चिकारा समेत अन्य अतिथि मौजूद रहे।
सभी को नहीं मिलती दो वक्त की रोटी
मोदीपुरम। मुख्य अतिथि ने कहा कि ये सच है कि कृषि क्षेत्र में हमने काफी तरक्की की है। लेकिन अभी भविष्य की चिंताएं समाप्त नहीं हुई हैं। आज भी आबादी का एक बड़ा हिस्सा दो वक्त की रोटी को तरस रहा है। युवा वैज्ञानिकों को मौसम को देखकर शोध करने होंगे। प्राकृतिक संसाधनों के अधिक से अधिक संरक्षण पर ध्यान देना होगा।
हार्वेस्टिंग मैनेजमेंट पर फोकस करना होगा। साथ ही किसानों को शिक्षित करना होगा, ताकि वह कम लागत पर अधिक लाभ और उत्पादन ले सकें।
दुग्ध उत्पादन में भारत नंबर वन
मोदीपुरम। मुख्य अतिथि ने कहा कि विगत 12 साल से भारत दुग्ध उत्पादन में विश्व में पहले स्थान पर है। मांस निर्यात में भी भारत सबसे बड़े देश के रूप में उभर कर सामने आया है।
लेकिन देश में कृषि उत्पादन के संरक्षण का अभाव है। एक अनुमान के मुताबिक भारत में फल और सब्जी का इतनी बड़ी मात्रा में उत्पादन हार्वेस्टिंग के अभाव में बेकार हो जाता है कि जितनी खपत पूरे यूरोप की है।
मायूस हुए विद्यार्थी
दीक्षांत समारोह की अध्यक्षता राज्यपाल रामनाइक को करनी थी। लेकिन स्वास्थ्य ठीक न होने के कारण वह समारोह में भाग नहीं ले सके। जिन छात्र-छात्राओं को राज्यपाल के हाथों मेडल और डिग्री लेने की हसरत थी, वह उनके न आने पर पूरी नहीं हो सकी। कई विद्यार्थियों को इस दौरान मायूस देखा गया।