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प्रतिबंध से पॉलीथिन इंडस्ट्री में भ्रम की स्थिति
ब्यूरो/अमर उजाला, मेरठ
Updated Thu, 21 Jan 2016 02:00 AM IST
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मेरठ। पॉलीथिन पर प्रतिबंध से असमंजस की स्थिति बनी हुई है। अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि कौन सी कैटेगरी बैन होगी और किसका उत्पाद जारी रहेगा।
शहर में 80 से ज्यादा छोटी-बड़ी पॉलीथिन की इकाइयां संचालित हैं। ये मुख्य रूप से टीपीनगर, मोहकमपुर, शताब्दीनगर, हापुड़ रोड, मवाना रोड, बागपत रोड क्षेत्रों में हैं। इन इकाइयों में प्रति वर्ष 24 करोड़ से ज्यादा का कारोबार होता है। पॉलीथिन का 70 फीसदी हिस्सा पैकेजिंग और करीब 30 फीसदी हिस्सा कैरीबैग बनाने में जाता है।
प्रदेश सरकार ने किन पर बैन लगाया है और किन पर नहीं, यह इंडस्ट्री को अभी साफ नहीं हो सका है। जैसे, फैब्रिक की प्लास्टिक थैलियों को छूट दी गई है या नहीं। इससे बोरियां बनती हैं। कपड़ों की दुकान और दूसरी जगहों पर कपड़ों की तरह दिखने वाले प्लास्टिक बैग इस्तेमाल होते हैं जो नॉन वीविंग मैटेरियल हैं।
इनकी क्या स्थिति होगी? ये अभी किसी को नहीं पता। इस पालीथिन बैन में बॉयोमेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट एंड हैडलिंग रूप 1998 के तहत इस्तेमाल करने वाली प्लास्टिक थैलियों के इस्तेमाल की छूट दी जाएगी या नहीं। ऐसे तमाम सवाल हैं जिनको साफ होने के बाद ही प्रभाव का मूल्यांकन हो सकेगा।
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इस उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि प्रावधान के दुरुपयोग की सबसे ज्यादा गुंजाइश है। वेस्ट के लिए इस्तेमाल होने वाली पीली, काली और दूसरी रंगीन पॉलीथिन के निर्माण में भी मानकों का सही से पालन नहीं होता है।
ये भी चुनौती
इंडस्ट्री से जुड़े लोग बताते हैं कि यूपी में कैरीबैग के तौर पर इस्तेमाल की जा रही पॉलीथिन का बड़ा हिस्सा रिसाइकल करके दुबारा पॉलीथिन बनाई जाती है। कैरीबैग पर बैन लगाने के बाद इकाइयां प्लास्टिक वेस्ट खरीदने से कतराएंगी। अभी और अगले एकाध महीने तक इस्तेमाल की जानेवाली प्लास्टिक के डिस्पोज की वैकल्पिक व्यवस्था क्या होगी ये भी सरकार के सामने चुनौती होगी।
छावनी में पॉलीथिन के प्रयोग पर होगी कार्रवाई
मेरठ। प्रदेश सरकार के आदेश अनुसार बृहस्पतिवार से शहर के साथ छावनी क्षेत्र में भी पॉलीथिन पर प्रतिबंध लागू हो जाएगा। ऐसे में कोई भी दुकानदार पॉलीथिन का प्रयोग नहीं करेगा। मेरठ के मुख्य बाजारों में पॉलीथिन का बड़ा कारोबार होता है। लेकिन, सरकार के निर्देश के बाद इस कारोबार पर ब्रेक लग जाएगा।
कैंट बोर्ड अध्यक्ष मेजर जनरल सुनील यादव छावनी क्षेत्र में पॉलीथिन के प्रयोग पर रोष व्यक्ति कर चुके हैं। अब सीईओ राजीव श्रीवास्तव ने भी निर्देश दिया है कि कैंट में पॉलीथिन का प्रयोग करने पर कार्रवाई की जाएगी।
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शहर में 80 से ज्यादा छोटी-बड़ी पॉलीथिन की इकाइयां संचालित हैं। ये मुख्य रूप से टीपीनगर, मोहकमपुर, शताब्दीनगर, हापुड़ रोड, मवाना रोड, बागपत रोड क्षेत्रों में हैं। इन इकाइयों में प्रति वर्ष 24 करोड़ से ज्यादा का कारोबार होता है। पॉलीथिन का 70 फीसदी हिस्सा पैकेजिंग और करीब 30 फीसदी हिस्सा कैरीबैग बनाने में जाता है।
प्रदेश सरकार ने किन पर बैन लगाया है और किन पर नहीं, यह इंडस्ट्री को अभी साफ नहीं हो सका है। जैसे, फैब्रिक की प्लास्टिक थैलियों को छूट दी गई है या नहीं। इससे बोरियां बनती हैं। कपड़ों की दुकान और दूसरी जगहों पर कपड़ों की तरह दिखने वाले प्लास्टिक बैग इस्तेमाल होते हैं जो नॉन वीविंग मैटेरियल हैं।
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इनकी क्या स्थिति होगी? ये अभी किसी को नहीं पता। इस पालीथिन बैन में बॉयोमेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट एंड हैडलिंग रूप 1998 के तहत इस्तेमाल करने वाली प्लास्टिक थैलियों के इस्तेमाल की छूट दी जाएगी या नहीं। ऐसे तमाम सवाल हैं जिनको साफ होने के बाद ही प्रभाव का मूल्यांकन हो सकेगा।
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इस उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि प्रावधान के दुरुपयोग की सबसे ज्यादा गुंजाइश है। वेस्ट के लिए इस्तेमाल होने वाली पीली, काली और दूसरी रंगीन पॉलीथिन के निर्माण में भी मानकों का सही से पालन नहीं होता है।
ये भी चुनौती
इंडस्ट्री से जुड़े लोग बताते हैं कि यूपी में कैरीबैग के तौर पर इस्तेमाल की जा रही पॉलीथिन का बड़ा हिस्सा रिसाइकल करके दुबारा पॉलीथिन बनाई जाती है। कैरीबैग पर बैन लगाने के बाद इकाइयां प्लास्टिक वेस्ट खरीदने से कतराएंगी। अभी और अगले एकाध महीने तक इस्तेमाल की जानेवाली प्लास्टिक के डिस्पोज की वैकल्पिक व्यवस्था क्या होगी ये भी सरकार के सामने चुनौती होगी।
छावनी में पॉलीथिन के प्रयोग पर होगी कार्रवाई
मेरठ। प्रदेश सरकार के आदेश अनुसार बृहस्पतिवार से शहर के साथ छावनी क्षेत्र में भी पॉलीथिन पर प्रतिबंध लागू हो जाएगा। ऐसे में कोई भी दुकानदार पॉलीथिन का प्रयोग नहीं करेगा। मेरठ के मुख्य बाजारों में पॉलीथिन का बड़ा कारोबार होता है। लेकिन, सरकार के निर्देश के बाद इस कारोबार पर ब्रेक लग जाएगा।
कैंट बोर्ड अध्यक्ष मेजर जनरल सुनील यादव छावनी क्षेत्र में पॉलीथिन के प्रयोग पर रोष व्यक्ति कर चुके हैं। अब सीईओ राजीव श्रीवास्तव ने भी निर्देश दिया है कि कैंट में पॉलीथिन का प्रयोग करने पर कार्रवाई की जाएगी।