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पौराणिक और ऐतिहासिक स्थलों का संगम है मेरठ
Wed, 18 Jun 2025 02:21 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, मेरठ
संवाद न्यूज एजेंसी, मेरठ
Updated Wed, 18 Jun 2025 02:21 AM IST
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इकरार अहमद..... टाउन हॉल की तिलक लाइब्रेरी
मेरठ। पौराणिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रूप से मेरठ दर्शनीय स्थलों का अनूठा संगम है। रामायण एवं महाभारत काल से लेकर 1857 की क्रांति का भी मेरठ साक्षी रहा है। इसलिए यहां कई पिकनिक स्पॉट ऐसे हैं जो युवाओं से लेकर सभी वर्ग के लोगों को अपनी ओर आकर्षित करते हैंं। परिवार के सदस्यों और दोस्तों के साथ एक दिन की सैर के लिए यहां कई स्थान हैं। आज विश्व पिकनिक दिवस पर ऐसे ही कई स्थलों के बारे में आपको बता रहे हैं।
मंदोदरी का तालाब, आबू का मकबरा सहित कई खास स्थल
- मेरठ को मय दंत का खेड़ा के नाम से भी जाना जाता है। इतिहासकार एके गांधी के अनुसार यहां सदर थाने के पीछे महाबिल्वेश्वरनाथ मंदिर, सूरजकुंड स्थित सती मंदिर, पिल्लोखड़ी श्यामनगर मंदोदरी का तालाब, नौचंदी स्थित चंडी देवी मंदिर रामायणकालीन हैं। इन मंदिरों में आज भी उसी समय की मूर्ति, नक्काशी आदि देखी जा सकती है। मराठा काल में इन मंदिरों का जीर्णोद्धार भी किया गया। मुगलकाल में मेरठ सात द्वार के अंदर बसा शहर था। इसमें शाहपीर गेट, खैरनगर गेट, घंटाघर शेष हैं। इसके अलावा दिल्ली रोड केसरगंज मंडी के पास आबू का मकबरा, जामा मस्जिद, सेंट जोंस चर्च, सेंट जोसफ चर्च, सरधना में बेगमसमरू के द्वारा बनवाई गई चर्च, टाउन हॉल तिलक लाइब्रेरी, भोला की झाल जैसे दर्शनीय स्थल हैं। कोतवाली क्षेत्र सुभाष बाजार में अशोक स्तंभ आज भी बौद्ध काल की याद दिलाता है। शहर में जाटव गेट क्षेत्र में आज भी बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर की अस्थितयां मौजूद हैं।
- हस्तिनापुर का इतिहास और प्राकृतिक सौंदर्य
- शहर से 40 किलोमीटर दूर हस्तिनापुर एक ऐसा स्थान है, जो महाभारतकाल में कौरवों की राजधानी रहा। इतिहासकार अमित पाठक ने बताया कि यहां गंगा नदी के किनारे का शांत वातावरण और हरियाली पिकनिक के लिए उपयुक्त है। यहां का प्राकृतिक सौंदर्य सभी को लुभाता है। जैन मंदिर, पांडव टीला और गंगा तट पर्यटकों को आकर्षित करता है। जम्मू द्वीप पर टॉय ट्रेन, मीनार, ध्यान केंद्र भी आकर्षक का केंद्र है।
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1857 की क्रांति का उद्गम स्थल
- सूरजकुंड पार्क अपनी हरियाली और शांत वातावरण के लिए जाना जाता है। यहां बाबा मनोहरनाथ मंदिर में पहुंचे फकीर ने 1857 की क्रांति की ज्वाला को जलाया था। सूरजकुंड पार्क के बाहर शाम के समय सर्दी हो या गर्मी, यहां मेले जैसा माहौल रहता है। छावनी स्थित बाबा औघड़नाथ मंदिर 1857 की क्रांति का उद्गम स्थल है। यहां शहीद स्तंभ पर उन 85 सैनिकों के नाम अंकित हैं जिन्होंने 1857 की क्रांति में अहम योगदान दिया। इसके अलावा छावनी में 20 से अधिक स्थानों पर स्मारक बनाकर दिखाया गया है कि क्रांति में कब क्या हुआ। भैसाली ग्राउंड के बराबर में शहीद स्मारक पर प्रदर्शनी में 1857 का संपूर्ण इतिहास देखा जा सकता है। कंपनी गार्डन में नांव में सैर, ऊंठ की सवारी, म्यूजिकल फाउंटेन सभी को आकर्षित करता है।
- नौचंदी मेला...ऐतिहासिक और आकर्षक
- मेरठ का नौचंदी मेला भी ऐतिहासिक और आकर्षक है। स्थानीय लोगों के लिए यह शानदार आयोजन है। यहां खाद्य पदार्थों के साथ बच्चे झूले आदि का भी आनंद लेते हैं। इस बार मेले में जलपरी, मौत का कुंआ खास है। प्रांतीय मेला होने के कारण पटेल मंडप में प्रतिदिन सांस्कृतिक कार्यक्रम हो रहे हैं। अब मेला समाप्त होने में अब सिर्फ दस दिन शेष हैं। इस बीच अलग अलग दिन गीत संगीत, हास्य कवि सम्मेलन, सूफी नाइट, राष्ट्रीय मुशायरा, नया रंग नया ढंग, राजस्थानी नाइट और पंजाबी नाइट होगी।
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मंदोदरी का तालाब, आबू का मकबरा सहित कई खास स्थल
- मेरठ को मय दंत का खेड़ा के नाम से भी जाना जाता है। इतिहासकार एके गांधी के अनुसार यहां सदर थाने के पीछे महाबिल्वेश्वरनाथ मंदिर, सूरजकुंड स्थित सती मंदिर, पिल्लोखड़ी श्यामनगर मंदोदरी का तालाब, नौचंदी स्थित चंडी देवी मंदिर रामायणकालीन हैं। इन मंदिरों में आज भी उसी समय की मूर्ति, नक्काशी आदि देखी जा सकती है। मराठा काल में इन मंदिरों का जीर्णोद्धार भी किया गया। मुगलकाल में मेरठ सात द्वार के अंदर बसा शहर था। इसमें शाहपीर गेट, खैरनगर गेट, घंटाघर शेष हैं। इसके अलावा दिल्ली रोड केसरगंज मंडी के पास आबू का मकबरा, जामा मस्जिद, सेंट जोंस चर्च, सेंट जोसफ चर्च, सरधना में बेगमसमरू के द्वारा बनवाई गई चर्च, टाउन हॉल तिलक लाइब्रेरी, भोला की झाल जैसे दर्शनीय स्थल हैं। कोतवाली क्षेत्र सुभाष बाजार में अशोक स्तंभ आज भी बौद्ध काल की याद दिलाता है। शहर में जाटव गेट क्षेत्र में आज भी बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर की अस्थितयां मौजूद हैं।
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- हस्तिनापुर का इतिहास और प्राकृतिक सौंदर्य
- शहर से 40 किलोमीटर दूर हस्तिनापुर एक ऐसा स्थान है, जो महाभारतकाल में कौरवों की राजधानी रहा। इतिहासकार अमित पाठक ने बताया कि यहां गंगा नदी के किनारे का शांत वातावरण और हरियाली पिकनिक के लिए उपयुक्त है। यहां का प्राकृतिक सौंदर्य सभी को लुभाता है। जैन मंदिर, पांडव टीला और गंगा तट पर्यटकों को आकर्षित करता है। जम्मू द्वीप पर टॉय ट्रेन, मीनार, ध्यान केंद्र भी आकर्षक का केंद्र है।
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1857 की क्रांति का उद्गम स्थल
- सूरजकुंड पार्क अपनी हरियाली और शांत वातावरण के लिए जाना जाता है। यहां बाबा मनोहरनाथ मंदिर में पहुंचे फकीर ने 1857 की क्रांति की ज्वाला को जलाया था। सूरजकुंड पार्क के बाहर शाम के समय सर्दी हो या गर्मी, यहां मेले जैसा माहौल रहता है। छावनी स्थित बाबा औघड़नाथ मंदिर 1857 की क्रांति का उद्गम स्थल है। यहां शहीद स्तंभ पर उन 85 सैनिकों के नाम अंकित हैं जिन्होंने 1857 की क्रांति में अहम योगदान दिया। इसके अलावा छावनी में 20 से अधिक स्थानों पर स्मारक बनाकर दिखाया गया है कि क्रांति में कब क्या हुआ। भैसाली ग्राउंड के बराबर में शहीद स्मारक पर प्रदर्शनी में 1857 का संपूर्ण इतिहास देखा जा सकता है। कंपनी गार्डन में नांव में सैर, ऊंठ की सवारी, म्यूजिकल फाउंटेन सभी को आकर्षित करता है।
- नौचंदी मेला...ऐतिहासिक और आकर्षक
- मेरठ का नौचंदी मेला भी ऐतिहासिक और आकर्षक है। स्थानीय लोगों के लिए यह शानदार आयोजन है। यहां खाद्य पदार्थों के साथ बच्चे झूले आदि का भी आनंद लेते हैं। इस बार मेले में जलपरी, मौत का कुंआ खास है। प्रांतीय मेला होने के कारण पटेल मंडप में प्रतिदिन सांस्कृतिक कार्यक्रम हो रहे हैं। अब मेला समाप्त होने में अब सिर्फ दस दिन शेष हैं। इस बीच अलग अलग दिन गीत संगीत, हास्य कवि सम्मेलन, सूफी नाइट, राष्ट्रीय मुशायरा, नया रंग नया ढंग, राजस्थानी नाइट और पंजाबी नाइट होगी।