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Meerut: सड़क से उठाए गोवंश चार दिन तक वाहन में ही बांधे रखे, बारिश-धूप में भूखे-प्यासे तड़पते हुए पांच की मौत

Thu, 04 Sep 2025 10:07 PM IST
मोहम्मद मुस्तकीम अमर उजाला नेटवर्क, मेरठ
अमर उजाला नेटवर्क, मेरठ Published by: मोहम्मद मुस्तकीम Updated Thu, 04 Sep 2025 10:07 PM IST
सार

सूरजकुंड स्थित नगर निगम के ट्रॉमा सेंटर में इन गोवंशों को लाया गया था, मगर वाहन से निकालने की भी जहमत नहीं उठाई। जब इनके शवों से बदबू उठी, तो पता चला। पार्षदों ने हंगामा किया तो मेयर ने कार्रवाई का आश्वासन दिया। 

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Meerut: Cows picked up from the road were not taken out of the vehicle, five died in agony
धरने पर बैठे पार्षद। गोवंश इस हालत में हैं कि हम उनकी तस्वीरें आपको दिखा भी नहीं सकते। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कान्हा उपवन में गोवंशों की मौत का मामला अभी ठंडा भी नहीं पड़ा था कि बृहस्पतिवार को सूरजकुंड स्थित नगर निगम के ट्रॉमा सेंटर में पांच गोवंशों की मौत हो गई। यहां ट्रॉमा सेंटर में काफी गंदगी थी और मरे हुए गोवंशों से दुर्गंध उठ रही थी। सूचना पर पहुंचे पार्षदों ने नगर निगम के अधिकारियों को गोवंशों की मौत का जिम्मेदार ठहराते हुए हंगामा किया। बाद में वे धरने पर बैठ गए। हंगामा बढ़ते देख महापौर हरिकांत अहलूवालिया ने कमिश्नर से जांच कराने का आश्वासन देकर पार्षदों को धरने से उठाया।
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परतापुर स्थित कान्हा उपवन गोशाला में बीते दिनों गोवंशों की मौत के कई मामले सामने आए थे। इसमें भ्रष्टाचार और कुप्रबंधन का खुलासा हुआ था। मौत का कारण गोवंशों को पर्याप्त चारा और चिकित्सा सुविधा न मिलना बताया गया था। इस मामले में पूर्व नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. हरपाल सिंह को गिरफ्तार किया गया था और गोशाला में चारा आपूर्ति करने वाली फर्मों के खिलाफ कार्रवाई की गई। अफसरों ने एजेंसी को ब्लैकलिस्ट कर भुगतान रोकने के दावे किए थे।
 
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देखरेख के अभाव में लापरवाही से दम तोड़ रहे गोवंश
पार्षद संजय सैनी ने बताया कि बीवीजी कंपनी के डिपो में ही ट्रॉमा सेंटर बनाया हुआ है। कुछ लोगों ने गोवंशों के मरे होने की सूचना दी। इस पर पार्षद पवन चौधरी और पार्षद प्रतिनिधि रचित गुलाटी आदि पहुंचे। उन्होंने बताया कि ट्रॉमा सेंटर में लावारिस और कान्हा उपवन के बीमार गोवंशों को लाकर उपचार किया जाता है। 
तीन-चार दिन पहले दो गोवंश को लाया गया था। पिछले तीन दिन से बारिश हो रही है और दोनों गोवंशों को वाहन में ही बांधा हुआ था। उन्हें नीचे तक नहीं उतारा गया। बंधे-बंधे ही भूख-प्यास से उनकी मौत हो गई। देखरेख में लापरवाही के कारण ही गोवंश बार-बार दम तोड़ रहे हैं।
 
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ताला खुलते ही सामने आया सच
पार्षदों ने बताया कि ट्रॉमा सेंटर में ताला लगा हुआ था। तैनात निगम कर्मचारियों से ताला खोलने को कहा तो वे तैयार नहीं हुए। हंगामे के बाद ताला खोला तो लापरवाही का सच सामने आ गया। यहां पांच गोवंश मरे हुए थे और दो की हालत खराब थी। मरे हुए गोवंश से दुर्गंध उठ रही थी। 

ये हालात निगम अधिकारियों की लापरवाही उजागर करते हैं। करता है। गोवंशों की मौत से गुस्साए पार्षद धरने पर बैठ गए। महापौर हरिकांत अहलूवालिया व अपर नगर आयुक्त पंकज कुमार पहुंचे और पार्षदों को शांत कराया। महापौर ने आश्वासन दिया कि मामले में कमिश्नर को पत्र लिखा है। जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। पंकज कुमार ने कहा कि लापरवाही बरतने वाले कर्मचारियों को बख्शा नहीं जाएगा। विभागीय जांच कर कार्रवाई होगी।

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